एक लाख किसानों की 18 हजार एकड़ जमीन पर बना गंगा एक्सप्रेसवे, क्या अभी भी बकाया है मुआवजा?

Ganga Expressway Compensation: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए लगभग 18,000 एकड़ भूमि अन्नदाता किसानों से ली गई है. जबकि क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब के लिए 7,000 एकड़ भूमि और ली गई है. इस खबर में बताया गया है कि किसानों को कितना मुआवजा दिया गया है और किस जिले के किसानों को सबसे ज्यादा पैसा मिला है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 29 Apr, 2026 | 08:33 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में आज गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर दिया है. करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बना गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा और 6-लेन का बना हुआ है. इस एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के 1 लाख से ज्यादा किसानों ने अपनी कीमती 18 हजार एकड़ जमीन सरकार को दे दी. इसके अलावा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लाजिस्टिक हब के लिए करीब 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि सरकार ने ली है. इस जमीन के बदले किसानों को 9 हजार करोड़ से ज्यादा का मुआवजा दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेसवे लोकार्पण पर कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए लगभग 18,000 एकड़ भूमि अन्नदाता किसानों से प्राप्त की गई है, जबकि इससे जुड़े क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब हेतु विभिन्न स्थानों पर लगभग 7,000 एकड़ भूमि लेकर निवेश को आकर्षित करने के साथ ही रोजगार सृजन को और गति दी जा रही है. अपनी जमीन देने के लिए मुख्यमंत्री ने किसानों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे के साथ 27 स्थानों पर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब तेजी से विकसित किए जा रहे हैं.

Ganga Expressway Compensation

519 गांवों के किसानों ने गंगा एक्सप्रेसवे के लिए दी अपनी जमीन

दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने एक्सप्रेसवे की आधारशिला रखी थी. कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के बावजूद परियोजना की रफ्तार नहीं रुकी और काम चालू रहा, जिसके चलते तय समय में इसे पूरा कर लिया गया. यह एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से प्रयागराज के जुदापुर डंडू गांव तक 12 जिलों को जोड़ता है. 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लिए 519 गांवों में भूमि अधिग्रहण की गई है.

2 फीसदी गांवों में मुआवजे पर था विवाद, अब किसी का बकाया नहीं

रिपोर्ट के अनुसार 519 गांवों में से मात्र 2 फीसदी गांवों में मुआवजे को लेकर विवाद था, जिन्हें सहमति के आधार पर सुलझाया गया. किसानों को अपनी जमीन के बदले सरकार की ओर से 9,252 करोड़ से अधिक का मुआवजा वितरित किया जा चुका है. बदायूं में किसानों को कुल 1250 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी किया गया है. जबकि उन्नाव-हरदोई में लगभग 2100 करोड़ रुपये दिए गए. इसी तरह अन्य जिलों को भी मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है. एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित कुल जमीन का 99 फीसदी से अधिक मुआवजा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जा चुका है. अब 18 हजार एकड़ जमीन के लिए किसी भी किसान का मुआवजा बकाया नहीं रहा है, सभी किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा दे दिया गया है.

अमरोहा के किसानों को मिला 2.5 करोड़ प्रति बीघा तक मुआवजा

गंगा एक्सप्रेसवे में अमरोहा के 26 गांव एक्सप्रेसवे में आए हैं. यहां के मंगरौला इलाके की जमीन के लिए सबसे ज्यादा मुआवजा दिया गया. गंगा एक्सप्रेसवे से पहले यहां की कृषि भूमि का दाम औसतन 15 से 20 लाख रुपये प्रति बीघा था. सर्किल रेट और बाजार दर के अंतर के चलते एक्सप्रेसवे के किनारे की व्यावसायिक जमीनें 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई हैं. यहां गजरौला इंडस्ट्रियल हब से करीब होने से मंगरौला इलाके के जमीन मालिकों को सबसे ज्यादा मुआवजा मिला.

इन जिलों के गांवों में सर्किल रेट से 4 गुना ज्यादा मिला मुआवजा

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर में मुआवजे की दरें सबसे अधिक रहीं. यहां औसतन 20 लाख से 45 लाख रुपये प्रति बीघा तक मुआवजा राशि मिली है, जो सर्किल रेट का 4 गुना ज्यादा रही है. वहीं, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई में कृषि भूमि का मुआवजा 12 लाख से 25 लाख रुपये प्रति बीघा रहा. प्रयागराज और प्रतापगढ़ में मुआवजा दरें 15 लाख से 30 लाख रुपये प्रति बीघा रही हैं.

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