छत्तीसगढ़ में मखाना बनेगा किसानों की नई कमाई का जरिया, चार जिलों में शुरू हुई खास विकास योजना
राज्य में पहले चरण में धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों को मखाना विकास योजना के लिए चुना गया है. इन जिलों में जल संसाधन, मिट्टी की प्रकृति और तालाबों की उपलब्धता को देखते हुए मखाना की खेती के अच्छे अवसर माने गए हैं. योजना के तहत पुराने तालाबों के साथ-साथ किसानों की निजी जमीन पर भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है.
Makhana farming scheme: छत्तीसगढ़ को अब तक “धान का कटोरा” कहा जाता रहा है, लेकिन बदलते समय के साथ प्रदेश के किसान अब सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रहना चाहते. बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार के उतार-चढ़ाव ने किसानों को नई और फायदेमंद फसलों की तलाश की ओर मोड़ दिया है. इसी दिशा में अब छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती एक नई उम्मीद बनकर उभरी है. राज्य में मखाना उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए मखाना विकास योजना की शुरुआत की गई है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है.
केंद्र की योजना से मिली छत्तीसगढ़ को नई पहचान
मखाना विकास योजना को केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना के तहत लागू किया जा रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा के बाद राज्य में इस योजना को जमीन पर उतारने का काम तेजी से शुरू हुआ. वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ को इस योजना के तहत करीब 178 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है. इसका उद्देश्य मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को मजबूत करना है, ताकि किसान सिर्फ कच्चा माल बेचने तक सीमित न रहें.
चार जिलों से हुई शुरुआत, आगे और विस्तार की तैयारी
राज्य में पहले चरण में धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों को मखाना विकास योजना के लिए चुना गया है. इन जिलों में जल संसाधन, मिट्टी की प्रकृति और तालाबों की उपलब्धता को देखते हुए मखाना की खेती के अच्छे अवसर माने गए हैं. योजना के तहत पुराने तालाबों के साथ-साथ किसानों की निजी जमीन पर भी मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा बीज उत्पादन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को बाहर से बीज मंगाने की जरूरत न पड़े.
मखाना की खेती क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद
मखाना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण मखाना अब सिर्फ व्रत या त्योहारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनता जा रहा है. अगर किसान सिर्फ बीज बेचने के बजाय उसे सुखाकर, भूनकर और पैक करके बाजार में उतारते हैं, तो उन्हें कई गुना ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. यही वजह है कि सरकार किसानों को सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि प्रसंस्करण और पैकेजिंग की ओर भी प्रोत्साहित कर रही है.
धमतरी बना मखाना उत्पादन का मॉडल जिला
मखाना विकास योजना में धमतरी जिला तेजी से आगे बढ़ रहा है. यहां महिला स्व-सहायता समूहों ने मखाना उत्पादन की कमान संभाल ली है. शैल पुत्री, नई किरण और जय मां नव ज्योति जैसे समूहों ने तालाबों में मखाना की बुवाई शुरू कर दी है. जिले में अब तक 55 एकड़ क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है और अतिरिक्त क्षेत्र में तैयारी चल रही है. वर्तमान में धमतरी में 40 से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं, जो आने वाले समय में अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं.
प्रशिक्षण और तकनीक से मजबूत हो रही खेती
मखाना की खेती में सफलता के लिए सही तकनीक और जानकारी बेहद जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. राज्य में पहले मखाना प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना के बाद अब स्थानीय स्तर पर किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी जानकारी दी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी मखाना उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है, जिससे यहां यह फसल लंबे समय तक सफल रह सकती है.
आने वाले समय में और बढ़ेगा मखाना का दायरा
राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए भी मखाना खेती को लेकर बड़ी योजना तैयार की है. इसके तहत नए तालाबों का निर्माण, अतिरिक्त क्षेत्र में खेती और किसानों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में मखाना छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक मजबूत नकदी फसल के रूप में स्थापित होगा. इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई शुरुआत
मखाना विकास योजना छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि खेती के नए भविष्य की शुरुआत है. धान पर निर्भरता कम कर विविध फसलों की ओर बढ़ना आज की जरूरत है और मखाना इस बदलाव का मजबूत उदाहरण बन रहा है. अगर यह योजना इसी तरह सफल रही, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ मखाना उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना सकता है.