फसल बीमा क्लेम में धांधली, बिना खेती किए ही कर दिए दावे.. पकड़ी गईं 217 करोड़ की गड़बड़ियां
यह मामला तब सामने आया जब जलगांव जिले में केले की फसल बीमा के दावों में पिछले साल की तुलना में अचानक बढ़ोतरी हुई. पिछले सीजन के मुकाबले दावों की संख्या 27,259 और बीमित क्षेत्र 28,196 हेक्टेयर बढ़ गया, जो असामान्य रूप से तेज वृद्धि थी और इसने गहराई से जांच की जरूरत पैदा की.
Maharashtra News: महाराष्ट्र के जलगांव जिले में राज्य कृषि विभाग ने केले की फसल बीमा में लगभग 217 करोड़ रुपये की गड़बड़ियां पकड़ी हैं. यह राज्य में फसल बीमा के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर सैटेलाइट इमेजरी से की गई जांच थी. फरवरी के दूसरे हफ्ते में हुई जांच अचानक बढ़ी बीमा मांग के बाद शुरू की गई थी. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि बीमा के लिए घोषित खेत और जमीन पर असल में उगी फसल में बड़ा फर्क है. जमीन पर जाकर निरीक्षण करने पर पाया गया कि कई जगहों पर केले की फसल ही नहीं बोई गई थी, लेकिन बीमा दावे कर दिए गए थे.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि 2025- 26 के अंबिया बहार सीजन के मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के तहत लगभग 44,041 हेक्टेयर के लिए दावे किए गए, लेकिन वहां केले की खेती नहीं पाई गई. जांच महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन्स सेंटर (MRSAC) की सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर की गई. परिणामों के आधार पर सरकार ने सब्सिडी फंड की रिलीज रोक दी और हजारों दावों को आगे की जांच के लिए चिन्हित किया, जिससे जनता के पैसों के बड़े नुकसान को रोका गया.
बीमा के दावों में भारी बढ़ोतरी
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब जलगांव जिले में केले की फसल बीमा के दावों में पिछले साल की तुलना में अचानक बढ़ोतरी हुई. पिछले सीजन के मुकाबले दावों की संख्या 27,259 और बीमित क्षेत्र 28,196 हेक्टेयर बढ़ गया, जो असामान्य रूप से तेज वृद्धि थी और इसने गहराई से जांच की जरूरत पैदा की. बीमा में घोषित कृषि क्षेत्र में पिछले तीन सालों में काफी बदलाव देखा गया है. 2023- 24 में कुल 81,465.11 हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के तहत था. यह 2024-25 में घटकर 67,956 हेक्टेयर हो गया, यानी बीमित क्षेत्र में बड़ी कमी आई. लेकिन 2025-26 में यह अचानक बढ़कर 96,152 हेक्टेयर हो गया.
44,041 हेक्टेयर में केले की खेती के कोई प्रमाण नहीं मिले
इन चेतावनी संकेतों को देखते हुए कृषि आयुक्तालय ने घोषित फसल क्षेत्र की सैटेलाइट से जांच कराने का आदेश दिया. जांच में सामने आया कि जलगांव में 96,152 हेक्टेयर घोषित बीमित केले के खेतों में से असल में केवल 52,110 हेक्टेयर ही खेती में थे. बाकी 44,041 हेक्टेयर में केले की खेती के कोई प्रमाण नहीं मिले. राज्य कृषि आयुक्त सुरज मंडहरे के अनुसार, MRSAC की सैटेलाइट जांच में सबसे अधिक गड़बड़ियां चोपड़ा और धरंगाॉन तहसील में पाई गईं. उन्होंने कहा कि चोपड़ा में 18,016 हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के तहत घोषित था, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों में केवल 5,942 हेक्टेयर पर ही केले की खेती मिली. बाकी 12,073 हेक्टेयर में खेती नहीं थी. धरंगाॉन में 3,620 हेक्टेयर के दावे किए गए थे, लेकिन खेती केवल 646.47 हेक्टेयर पर मिली और लगभग 2,994 हेक्टेयर खाली थे.
96,152 हेक्टेयर बीमित केले के खेत घोषित
2025- 26 के सीजन में जलगांव जिले में कुल 96,152 हेक्टेयर बीमित केले के खेत घोषित किए गए थे, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार असल में केवल 52,110 हेक्टेयर पर ही खेती हुई, यानी 44,041 हेक्टेयर पर कोई खेती नहीं थी. कृषि आयुक्त द्वारा जमा की गई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद, इन दावों से जुड़े लगभग 37 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि यह राशि उन बीमा प्रीमियम की है, जहां सैटेलाइट तस्वीरों में केले की खेती नहीं पाई गई.