किसान खरीफ फसलों का जरूर कराएं बीमा, नुकसान की भरपाई कर रही सरकार

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को मौसम की मार जैसे सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि या कीट प्रकोप से फसल को हुए नुकसान पर आर्थिक सुरक्षा दे रही है. वो भी नाममात्र प्रीमियम पर यह योजना बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक तीन स्तरों पर नुकसान की भरपाई करती है.

धीरज पांडेय
नोएडा | Published: 8 May, 2025 | 06:24 PM

कभी बारिश की कमी तो कभी बेमौसम ओलावृष्टि, कीट प्रकोप या बाढ़. किसानों की जिंदगी साल भर मौसम कगे भरोसे चलती है. एक छोटी सी प्राकृतिक मार और पूरे साल की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है. ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को इन अनिश्चिताओं से राहत देने वाली एक सुरक्षा ढाल बनकर सामने आई है. सरकार की यह योजना प्राकृतिक आपदओं से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का काम करती है.

किसानों को आर्थिक सहारा देने का उद्देश्य

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य मौसम की मार से जूझ रहे किसानों को आर्थिक सहारा देना है.जब फसल सूखे, बाढ़, जलभराव, कीटों या बेमौसम बारिश की वजह से बर्बाद हो जाती है तो यह योजना नुकसान की भरपाई करती है. इसमें खत से फसल कटाई तक के हर चरण में सुरक्षा में दी जाती है, चाहे बुवाई ना हो पाई हो, फसल की खड़ी हो या कटने के बाद सुखाई के दौरान नष्ट हुई हो.

लाभ लेने के लिए कराना होगा बीमा

इस योजना के अंतर्गत किसानों को बीमा प्रीमियम भी कराना होता है. हालांकि यह बीमा प्रीमियम नाम मात्र का होता है. इसके तहत खरीफ फसलों के लिए केवल 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और बागवानी व वाणिज्यिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसानों को देना होता है. बाकी राशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर देते हैं.

ऐसे करें आवदेन

सभी वो किसान जो अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसलों की बुवाई करते हैं, इस योजना के पात्रहैं. जबकि ऋणी किसानों के लिए यह योजना अनिवार्य होती है. वहीं गैर- ऋणी किसान इसे स्वेच्छा से चुन सकते हैं. गैर -ऋणी किसान आवेदन के लिए अपने नजदीकी बैंक, जन सेवा केन्द्र, सहकारी समिति या बीमा एजेंट से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही www.pmfby.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है.

इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) आवेदन करते समय किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, जमाबंदी की नकल, फसल और खेत की जानकारी वाला स्व-घोषणा पत्र और अगर बटाईदार हैं तो शपथ पत्र और मूल निवास प्रमाण पत्र जमा करना होता है.

 तीन स्तरों पर नुकसान की भरपाई

  • बुवाई न हो पाना या निष्फल बुवाई- खरीफ फसलों के लिए कम वर्षा या खराब मौसम से बुवाई नहीं हो पाने की स्थिति में मुआवजा मिलता है.
  • खड़ी फसल को नुकसान- सूखा, बाढ़, ओले, तूफान, कीट-व्याधि जैसी आपदाओं से खड़ी फसल में नुकसान की भरपाई होती है.
  • कटाई के बाद नुकसान- फसल कटने के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाई के दौरान ओलावृष्टि या बारिश से नुकसान की स्थिति में भी किसान को राहत मिलती है.

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