विकसित भारत जी राम जी बिल पारित, विपक्ष ने बिल की प्रतियां फाड़ीं.. आंदोलन की चेतावनी दी, सियासत गरमाई
‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ लोकसभा में पारित हो गया है. लेकिन, इस पर राजनीति गरमाई हुई है. विपक्षी दल के नेता संजय सिंह ने कहा कि सरकार को यह बिल वापस लेना होगा. नहीं तो आंदोलन की चेतावनी दी है.
केंद्र सरकार के मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को खत्म करने के लिए लाया गया नया बिल संसद में पास हो गया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज विपक्ष के सवालों के जवाब दिए और योजना के फायदों की जानकारी दी. इस बीच लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध किया. बता दें कि मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन का मजदूरी रोजगार कानूनी रूप से मिलता था. इसकी जगह अब विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): वीबी- जी राम जी बिल 2025 लाया जा रहा है. विपक्षी दलों के नेताओं ने बिल का विरोध किया है और इसे वापस लेने को कहा है और आंदोलन की चेतावनी दी है.
कृषि मंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने प्रतियां फाड़ीं
केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दोपहर 12 बजे लोक सभा में “विकसित भारत जी राम जी बिल” पर जवाब दिए और उन्होंने योजना के फायदे बताए. विधेयक को संसद में पारित कर दिया गया. शिवराज सिंह चौहान के भाषण के अंतिम बिंदु पढ़ रहे थे तब विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और बिल की प्रतियां फाड़ दीं. स्पीकर ओम बिरला ने बिल पास होने के बाद कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी. शुक्रवार शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है. इसके पहले कृषि मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के हर ऐसे परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य बिना कौशल वाला शारीरिक काम करना चाहते हैं, हर वित्तीय वर्ष में 125 दिन का मजदूरी रोजगार कानूनी गारंटी के साथ दिया जाएगा. इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर, तेजी से विकसित और मजबूत बनाना है, ताकि समग्र विकास और सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके.
तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया वैसे ही इसे भी वापस लेना होगा- संजय सिंह
‘वीबी-जी राम जी’ बिल AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, “यह बहुत बड़ा विश्वासघात है और मैं सरकार को आगाह करना चाहता हूं कि जैसे आपने तीनों किसानों के काले कानूनों को वापस लिया वैसे ही आपको इस बिल को भी वापस लेना होगा. देश भर में इसके खिलाफ आंदोलन होगा. इस बिल के नाम के पीछे आप अपना अपराध छिपाना चाहते हैं… पूरे साल में औसतन 50 दिन का भी काम इस देश के मजदूरों को नहीं मिल रहा है लेकिन उस पर आप बातचीत नहीं करेंगे. आपने इस योजना में राज्य सरकार की जिम्मेदारी 40% रख दी. जो राज्य सरकारें पहले से ही घाटे में हैं वे इसे चलाने के लिए पैसे कैसे देंगी? कुल मिलाकर जो मनरेगा योजना थी, जो देश के मजदूरों के लिए बहुत बड़ा सहारा थी उसे पूरी तरह से मारने का काम किया गया है. हम इसका खूब विरोध करेंगे.
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काम के दिन बढ़ाना एक चालाकी, यह बिल मनरेगा को खत्म कर देगा- प्रियंका गांधी वाड्रा
विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हम इस बिल का पूरी तरह विरोध करेंगे. इस बिल से मनरेगा खत्म होने जा रही है. 100 से 125 दिन के रोजगार वाली चालाकी है. जो इस बिल को पढ़ेगा उसे समझ आ जाएगा कि आने वाले दिनों में इस बिल से ये योजना खत्म हो जाएगी. जैसे ही प्रदेश सरकारों पर इस योजना को भार पड़ेगा, ये योजना खत्म हो जाएगी. राज्य सरकारों के पास इतना पैसा नहीं है.
विपक्ष को मजदूर और किसानों के बारे में क्या पता, उन्हें गरीबों से कोई मतलब नहीं – केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 पर कहा कि बिल तो बिल्कुल ठीक है लेकिन कांग्रेस पार्टी के लिए मैं कहना चाहता हूं कि उन्हें मजदूर और किसानों के बारे में क्या पता. कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष तो करोड़ों की गाड़ियों में सवारी कर रहे हैं और यहां उन्हें गरीब लोगों से क्या मतलब. वे यहां तो अपने सांसदों को शोर मचाने के लिए कह रहे हैं लेकिन आप अंदाजा लगाएं कि क्या करोड़ों रुपये की गाड़ियों पर बैठने वाला व्यक्ति गरीब व्यक्ति की 100-200 रुपये की दिहाड़ी की बात करेगा?…ये बहुत बड़ा अंतर है जिसका जवाब कांग्रेस पार्टी और उनके सांसद कभी नहीं दे पाएंगे.”
मनरेगा की जगह नए कानून में क्या बदलाव लागू हो रहे
केंद्र के नए बिल के तहत खर्च की जिम्मेदारी राज्यों पर ज्यादा होगी. फंडिंग का पैटर्न 60 फीसदी केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य का होगा. जबकि अभी मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है और सामग्री लागत का 75 प्रतिशत केंद्र देता है. यानी नए कानून में राज्यों की आर्थिक भागीदारी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी. यह बिल विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक नया ग्रामीण विकास ढांचा तैयार करने के लिए लाया गया है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के हर ऐसे परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य बिना कौशल वाला शारीरिक काम करना चाहते हैं, हर वित्तीय वर्ष में 125 दिन का मजदूरी रोजगार कानूनी गारंटी के साथ दिया जाएगा. इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर, तेजी से विकसित और मजबूत बनाना है, ताकि समग्र विकास और सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके.
नए बिल में 125 दिनों तक काम मिलेगा
नए बिल में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है. मजदूरी दरें केंद्र सरकार तय करेगी, लेकिन वे मनरेगा की मौजूदा मजदूरी से कम नहीं होंगी. मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते या अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. अगर 15 दिन में काम नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार को बेरोजगारी भत्ता देना होगा. इस बिल में मनरेगा से एक बड़ा बदलाव यह है कि खेती के पीक सीजन में काम नहीं दिया जाएगा. राज्य सरकारें साल में अधिकतम 60 दिन तय करेंगी, जिनमें बुवाई और कटाई के समय काम बंद रहेगा. इसका मकसद किसानों को मजदूरों की कमी से बचाना और ग्रामीण श्रम बाजार में संतुलन बनाए रखना है.
ग्रामीण भारत को बदलने के लिए चार श्रेणियों में काम होंगे
बिल के तहत कामों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है. जल सुरक्षा के तहत चेक डैम, तालाब, भूजल रिचार्ज, सिंचाई और वृक्षारोपण होंगे. बुनियादी ग्रामीण ढांचे में सड़कें, स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वच्छता, सोलर लाइट और आवास से जुड़े काम शामिल हैं. आजीविका से जुड़े ढांचे में भंडारण, बाजार, स्वयं सहायता समूह भवन, डेयरी, मत्स्य पालन और कम्पोस्ट यूनिट बनाए जाएंगे. वहीं जलवायु और आपदा से सुरक्षा के लिए बाढ़ नियंत्रण, चक्रवात शेल्टर, तटबंध और आग से बचाव जैसे कार्य किए जाएंगे.
नए बिल में निगरानी व्यवस्था सख्त की गई
नए बिल में मनरेगा की तुलना में काफी सख्त निगरानी व्यवस्था लाई गई है. इसके तहत मजदूरों की बायोमेट्रिक पहचान, जियो-टैग किए गए कार्य स्थल, डिजिटल मस्टर रोल (ई-मस्टर), रियल-टाइम डैशबोर्ड, हर हफ्ते सार्वजनिक जानकारी जारी करना, एआई आधारित फर्जीवाड़ा रोकने की व्यवस्था और ग्राम सभा द्वारा अनिवार्य सोशल ऑडिट शामिल होंगे. इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी.
2005 में यूपीए सरकार ने लागू किया था मनरेगा
मनरेगा को वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने लागू किया था और 2 अक्टूबर 2009 को इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) रखा गया. इस कानून के तहत काम को कानूनी अधिकार बनाया गया था, यानी मांग करने पर सरकार को रोजगार देना अनिवार्य है. मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबी कम करना, ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना और गांवों में स्थायी व उपयोगी संपत्तियां तैयार करना है.