ईरानी शिपमेंट रुकी तो बढ़े पिस्ता के दाम, अंजीर-किशमिश भी महंगी, उपभोक्ताओं की जेब पर बढ़ेगा बोझ
उत्तर भारत में होली के आसपास कुछ दिनों की छुट्टियों के चलते थोक बाजारों में कारोबार धीमा है. इस वजह से तत्काल प्रभाव थोड़ा सीमित दिख रहा है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि जैसे ही छुट्टियां खत्म होंगी और मांग बढ़ेगी, कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है.
Gulf crisis impact on India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय रसोई तक पहुंचने लगा है. पिस्ता, अंजीर और किशमिश जैसे सूखे मेवों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में ग्राहकों को इन उत्पादों के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं. हालांकि अखरोट की कीमतें फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
ईरानी सप्लाई पर ब्रेक, कीमतों में उछाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत पिस्ता मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के कैलिफोर्निया से मंगाता है. लेकिन ईरान के बंदर अब्बास और चाबहार बंदरगाह बंद होने से वहां से होने वाली आपूर्ति प्रभावित हो गई है. नतीजतन पिस्ता के दामों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कारोबारियों के अनुसार थोक बाजार में पिस्ता करीब 100 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो चुका है.
दिल्ली और उत्तर भारत के बाजारों में भी कीमतों में 40 से 50 रुपये प्रति किलो की तेजी देखी गई है. संकट से पहले पिस्ता गिरी की कीमत 1500 से 1600 रुपये प्रति किलो के आसपास थी, जबकि छिलके वाले पिस्ता 1200 से 1300 रुपये प्रति किलो बिक रहे थे. अब व्यापारियों का कहना है कि नई खेप आने में देरी हुई तो दाम और बढ़ सकते हैं.
अंजीर और किशमिश पर भी दबाव
अंजीर और किशमिश की आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है. भारत को बड़ी मात्रा में अंजीर और किशमिश अफगानिस्तान से मिलते हैं. पहले ही भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण जमीनी रास्ते प्रभावित थे और समुद्री मार्ग ही प्रमुख विकल्प बचा था. अब खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से समुद्री आपूर्ति भी बाधित हो सकती है.
अंजीर के दामों में भी करीब 100 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की खबर है. किशमिश की कीमतों में फिलहाल हल्की तेजी है, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि घरेलू स्टॉक खत्म होने के बाद बाजार में और उछाल आ सकता है.
होली के कारण बाजार में हलचल कम
उत्तर भारत में होली के आसपास कुछ दिनों की छुट्टियों के चलते थोक बाजारों में कारोबार धीमा है. इस वजह से तत्काल प्रभाव थोड़ा सीमित दिख रहा है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि जैसे ही छुट्टियां खत्म होंगी और मांग बढ़ेगी, कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है.
त्योहारी सीजन में सूखे मेवों की खपत बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आपूर्ति में रुकावट जारी रही तो खुदरा बाजार में असर साफ दिखाई देगा.
अखरोट फिलहाल सुरक्षित
अखरोट के मामले में स्थिति अलग है. बाजार में पहले से पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे अगले एक-दो महीने तक कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है. कश्मीर से आने वाली आपूर्ति भी घरेलू बाजार को सहारा दे रही है.
भारत अखरोट पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाता है, जबकि अन्य मेवों पर करीब 30 प्रतिशत से अधिक शुल्क है. हालांकि दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते के तहत अफगानिस्तान से आयात पर शुल्क नहीं लगता, जिससे वहां से आने वाले माल को कुछ राहत मिलती है.
वहीं व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी संकट लंबा खिंचता है तो आयातकों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है. इससे लागत बढ़ेगी और उसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.
फिलहाल बाजार हालात पर नजर रखे हुए है. अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम हुआ तो सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है. लेकिन जब तक बंदरगाहों की गतिविधियां पूरी तरह बहाल नहीं होतीं, तब तक पिस्ता, अंजीर और किशमिश जैसे सूखे मेवे महंगे रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.