भारत का बड़ा लक्ष्य: 2040 तक कोको उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी, किसानों को मिलेगा फायदा

2030 से 2035 के बीच कोको की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 1 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य है. इसके साथ ही उत्पादन बढ़ाने और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा. इस चरण तक भारत अपनी कुल मांग का करीब 50 फीसदी हिस्सा खुद ही पूरा करने की स्थिति में आ सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Apr, 2026 | 08:20 AM

India cocoa production: भारत में चॉकलेट और उससे जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग ने कोको (Cocoa) की अहमियत को काफी बढ़ा दिया है. लेकिन अभी भी देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अब एक नई योजना तैयार की गई है, जिसका लक्ष्य है कि भारत वर्ष 2040 तक कोको उत्पादन में आत्मनिर्भर बन जाए.

क्यों जरूरी हो गया है कोको में आत्मनिर्भर होना

भारत में कोको की मांग तेजी से बढ़ रही है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इसकी खपत लगातार बढ़ेगी और 2040 तक यह करीब 4.67 लाख टन तक पहुंच सकती है. लेकिन फिलहाल देश अपनी कुल जरूरत का 20 फीसदी से भी कम उत्पादन करता है.

यही वजह है कि हर साल भारत को कोको के आयात पर 866 मिलियन डॉलर (करीब 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा) खर्च करने पड़ते हैं. यह बढ़ता आयात देश के लिए आर्थिक बोझ भी बन रहा है और एक बड़ा अवसर भी, जिसे अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर बदला जा सकता है.

2026 से 2040 तक की पूरी योजना

कोको सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसे ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) ने FICCI के सहयोग से तैयार किया है. इस योजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत लागू करने की बात कही गई है.

इस योजना में अलग-अलग चरणों में काम करने का लक्ष्य रखा गया है.

पहला चरण: मिशन और आधार तैयार करना

2026 से 2028 के बीच सबसे पहले ‘नेशनल मिशन ऑन कोको’ शुरू करने की सिफारिश की गई है. इसके तहत इस क्षेत्र में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) बनाने की योजना है, जहां आधुनिक तकनीक और शोध पर काम होगा.

इसके अलावा देशभर में करीब 250 हेक्टेयर में बेहतर गुणवत्ता वाले पौधों के बीज तैयार करने के लिए पॉलीक्लोनल सीड गार्डन विकसित किए जाएंगे.

दूसरा चरण: किसानों को प्रशिक्षण और संसाधन

2028 से 2030 के बीच इस योजना का फोकस किसानों को मजबूत बनाने पर होगा. इस दौरान करीब 1 लाख किसानों को कोको खेती की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है.

इसके साथ ही लगभग 2.5 करोड़ पौधों (सीडलिंग) की आपूर्ति की जाएगी, ताकि बड़े स्तर पर खेती को बढ़ावा मिल सके. एक डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया जाएगा, जिससे किसानों का डेटा और फसल की जानकारी ट्रैक की जा सके.

तीसरा चरण: खेती और उत्पादन का विस्तार

2030 से 2035 के बीच कोको की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 1 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य है. इसके साथ ही उत्पादन बढ़ाने और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा. इस चरण तक भारत अपनी कुल मांग का करीब 50 फीसदी हिस्सा खुद ही पूरा करने की स्थिति में आ सकता है.

अंतिम लक्ष्य: 2040 तक पूरी आत्मनिर्भरता

इस योजना का अंतिम लक्ष्य है कि 2035 से 2040 के बीच भारत कोको उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए. इतना ही नहीं, देश को एक ग्लोबल कोको प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित करने की भी योजना है. इससे न सिर्फ आयात कम होगा, बल्कि भारत कोको का निर्यात भी कर सकेगा और किसानों की आय में भी बड़ा सुधार होगा.

विशेषज्ञों की राय क्या कहती है

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त आयुक्त (बागवानी) नवीन कुमार पाटले ने कहा कि कोको एक ऐसा फसल क्षेत्र है, जहां अभी कई चुनौतियां हैं, खासकर उत्पादन और प्रोसेसिंग में. लेकिन इस नई योजना से इन समस्याओं को दूर करने का मजबूत आधार मिलेगा.

वहीं FICCI के टास्क फोर्स चेयरमैन सैयद जुनैद अल्ताफ का मानना है कि कोको सेक्टर में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उद्योग को मजबूत करने की काफी संभावनाएं हैं.

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर चिराग जैन ने भी कहा कि इस क्षेत्र में सरकार, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि पूरी वैल्यू चेन मजबूत हो सके.

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Published: 16 Apr, 2026 | 08:20 AM
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