भारत का खाद्य तेल आयात पहली तिमाही में 2 प्रतिशत घटा, पाम ऑयल की खरीद बढ़ी तो सोयाबीन-सूरजमुखी में आई गिरावट

जहां पाम ऑयल की खरीद बढ़ी, वहीं कच्चे सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात में कमी दर्ज की गई. कच्चे सोयाबीन तेल का आयात 9 प्रतिशत घटकर 1.20 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल 1.27 मिलियन टन था. बंदरगाहों पर इसका स्टॉक घटकर 1.90 लाख टन रह गया, जो एक महीने पहले 3 लाख टन था.

नई दिल्ली | Published: 14 Feb, 2026 | 08:41 AM

India edible oil imports: भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक माना जाता है, ने चालू तेल वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (नवंबर से जनवरी) में खाद्य तेल के आयात में हल्की गिरावट दर्ज की है. ताजा उद्योग आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में देश का कुल वेजिटेबल ऑयल आयात 2 प्रतिशत घटकर 3.96 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.05 मिलियन टन था.

यह आंकड़े सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा जारी किए गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि कुल आयात में गिरावट के बावजूद पाम ऑयल की खरीद में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात में कमी आई है.

पाम ऑयल की मांग क्यों बढ़ी?

नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच पाम ऑयल का आयात 18 प्रतिशत बढ़कर 1.91 मिलियन टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.62 मिलियन टन था. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पाम ऑयल की वैश्विक कीमतों में नरमी और उपलब्धता में स्थिरता के कारण भारतीय आयातकों ने इसकी खरीद बढ़ाई. इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को पाम ऑयल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश हैं और इन दोनों देशों से आयात स्थिर बना हुआ है.

1 फरवरी तक भारतीय बंदरगाहों पर पाम ऑयल का स्टॉक 4.86 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले महीने की तुलना में 33 हजार टन अधिक है. इससे संकेत मिलता है कि जनवरी में आयात में तेजी आई थी.

सोयाबीन और सूरजमुखी तेल में गिरावट

जहां पाम ऑयल की खरीद बढ़ी, वहीं कच्चे सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात में कमी दर्ज की गई. कच्चे सोयाबीन तेल का आयात 9 प्रतिशत घटकर 1.20 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल 1.27 मिलियन टन था. बंदरगाहों पर इसका स्टॉक घटकर 1.90 लाख टन रह गया, जो एक महीने पहले 3 लाख टन था.

इसी तरह कच्चे सूरजमुखी तेल का आयात 15 प्रतिशत गिरकर 7.59 लाख टन पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 8.94 लाख टन था. बंदरगाहों पर सूरजमुखी तेल का स्टॉक भी घटकर 1.85 लाख टन रह गया. विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में सूरजमुखी तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैकल्पिक तेलों की उपलब्धता ने आयात रुझान को प्रभावित किया है.

नेपाल से परिष्कृत तेल की आपूर्ति

इस अवधि में नेपाल से भी परिष्कृत खाद्य तेल की आपूर्ति जारी रही. नवंबर 2025 में नेपाल ने भारत को लगभग 54 हजार टन रिफाइंड ऑयल निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से 47,639 टन रिफाइंड सोया तेल, 3,022 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 2,484 टन आरबीडी पामोलीन शामिल था.

दिसंबर 2025 में भी नेपाल से करीब 48 हजार टन परिष्कृत तेल भारत आया, जिसमें ज्यादातर हिस्सा रिफाइंड सोया तेल का था. यह रुझान दिखाता है कि भारत न केवल कच्चे तेल का आयात करता है, बल्कि पड़ोसी देशों से परिष्कृत तेल भी खरीदता है.

कुल स्टॉक की स्थिति

1 फरवरी 2026 तक भारतीय बंदरगाहों पर कुल खाद्य तेल स्टॉक 8.64 लाख टन था. वहीं घरेलू उत्पादन और खपत को मिलाकर पाइपलाइन स्टॉक 8.85 लाख टन के आसपास रहा. कुल मिलाकर देश में खाद्य तेल का कुल उपलब्ध स्टॉक 17.5 लाख टन के आसपास बना रहा, जो 1 जनवरी के स्तर के बराबर है. जनवरी में आयात बढ़ने से स्टॉक में स्थिरता बनी रही.

घरेलू बाजार पर असर

खाद्य तेल आयात के इन बदलते रुझानों का असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी पड़ सकता है. पाम ऑयल की अधिक उपलब्धता से रिफाइंड तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कम खरीद से इनके दामों में हलचल संभव है.

भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की रसोई पर पड़ता है.

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