Crisil Report: 3 साल बाद झींगा निर्यात में आई तेजी… 50,000 करोड़ रुपये के पार जा सकता है कारोबार

India shrimp exports 2026: इस साल निर्यात बढ़ने का एक बड़ा कारण भारतीय रुपये का डॉलर और यूरो के मुकाबले कमजोर होना भी है. जब रुपये की कीमत कम होती है तो विदेशी खरीदारों को भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं, जिससे निर्यातकों को बेहतर दाम मिलते हैं.

नई दिल्ली | Updated On: 10 Mar, 2026 | 09:49 AM

India shrimp exports 2026: भारत के समुद्री खाद्य उद्योग के लिए इस साल अच्छी खबर सामने आ रही है. लंबे समय से धीमी चल रही झींगा (श्रिम्प) निर्यात की रफ्तार अब फिर तेज होती दिखाई दे रही है. अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का झींगा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है. यह पिछले साल की तुलना में लगभग 13 से 15 प्रतिशत की वृद्धि मानी जा रही है.

क्रिसिल रिपोर्ट के अमुसार, पिछले तीन वर्षों से इस क्षेत्र में खास बढ़ोतरी नहीं देखी गई थी, लेकिन अब नए बाजारों में मांग बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. समुद्री उत्पाद निर्यात से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में भारत के झींगे की मांग लगातार बनी हुई है और यही वजह है कि इस उद्योग में फिर से तेजी देखने को मिल रही है.

रुपये की कमजोरी से निर्यातकों को फायदा

इस साल निर्यात बढ़ने का एक बड़ा कारण भारतीय रुपये का डॉलर और यूरो के मुकाबले कमजोर होना भी है. जब रुपये की कीमत कम होती है तो विदेशी खरीदारों को भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं, जिससे निर्यातकों को बेहतर दाम मिलते हैं. इसी कारण इस साल झींगा निर्यात से मिलने वाली आय में अच्छी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि निर्यात की मात्रा में बहुत बड़ी छलांग नहीं लगेगी, लेकिन बेहतर कीमत मिलने से कुल राजस्व में वृद्धि होगी.

निर्यात मात्रा में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में झींगा निर्यात की कुल मात्रा में लगभग 6 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. हालांकि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में ऊंचे टैरिफ के कारण भारत के झींगा निर्यात को कुछ नुकसान हुआ है. इसके बावजूद भारतीय निर्यातकों ने अन्य देशों के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे कुल निर्यात पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा. अगले वित्त वर्ष में निर्यात मात्रा में 3 से 5 प्रतिशत की और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है.

नए बाजारों से मिल रही मजबूती

पिछले कुछ समय में भारतीय झींगा उद्योग ने केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों में भी अपने बाजार मजबूत किए हैं. यूरोप, चीन, वियतनाम और रूस जैसे देशों में भारतीय झींगे की मांग तेजी से बढ़ी है. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में अमेरिका को झींगा निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बावजूद कुल निर्यात मात्रा में करीब 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

अमेरिका का हिस्सा कुल निर्यात में घटकर इस साल 32 से 33 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह करीब 40 प्रतिशत था. हालांकि अगले वित्त वर्ष में अमेरिका में भी मांग बढ़ने की संभावना है.

किसानों ने बढ़ाया उत्पादन

देश में झींगा पालन करने वाले किसानों ने भी इस साल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. उन्हें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे कीमतें बेहतर मिल सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका में झींगा पर लगने वाले आयात शुल्क में कमी आ सकती है. यदि ऐसा होता है तो भारतीय झींगा उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है.

मुनाफे की स्थिति स्थिर रहने की उम्मीद

झींगा प्रोसेसिंग और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे की स्थिति भी स्थिर रहने का अनुमान है. उद्योग के जानकारों के अनुसार इस वित्त वर्ष और अगले वर्ष में कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकता है. हालांकि व्यापार में उतार-चढ़ाव के कारण कभी-कभी कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन अधिकांश कंपनियों पर लंबी अवधि का कर्ज कम है. इसलिए उनकी वित्तीय स्थिति फिलहाल स्थिर मानी जा रही है.

वैश्विक बाजार पर रहेगी नजर

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां इस उद्योग को प्रभावित कर सकती हैं. फिलहाल भारत का झींगा उद्योग नए बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. यदि यह रणनीति सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है.

Published: 10 Mar, 2026 | 09:48 AM

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