देश में चीनी उत्पादन में 8 फीसदी बढ़ा, महाराष्ट्र-कर्नाटक की बदौलत बढ़ा उत्पादन, यूपी में हल्की गिरावट
देश में इस सीजन के दौरान कुल 541 चीनी मिलें चली थीं, जिनमें से 15 अप्रैल तक 520 मिलों में पेराई का काम बंद हो चुका है. पिछले साल इसी समय तक 499 मिलें बंद हुई थीं, यानी इस बार पेराई का काम तेजी से खत्म हुआ है. फिलहाल 21 मिलें अभी भी चल रही हैं.
Sugar production: इस साल देश में चीनी उत्पादन को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. गन्ना पेराई सत्र 2025-26 में 15 अप्रैल तक भारत में कुल 27.39 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है. अगर पिछले साल के इसी समय से तुलना करें, तो यह करीब 8 फीसदी ज्यादा है. उस समय उत्पादन 25.43 मिलियन टन था. यानी इस बार उत्पादन में साफ तौर पर बढ़त देखने को मिल रही है.
महाराष्ट्र और कर्नाटक ने संभाली कमान
फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक इस बार उत्पादन बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र और कर्नाटक का रहा है. महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, वहां इस बार उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया है. यहां 9.92 मिलियन टन चीनी तैयार हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है.
कर्नाटक में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. यहां इस बार 4.71 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ है. इन दोनों राज्यों के बेहतर प्रदर्शन ने देश के कुल उत्पादन को ऊपर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
उत्तर प्रदेश में हल्की गिरावट
जहां एक ओर कुछ राज्यों में उत्पादन बढ़ा है, वहीं उत्तर प्रदेश में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है. उत्तर प्रदेश, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, वहां इस बार उत्पादन करीब 2 प्रतिशत घटकर 8.92 मिलियन टन रह गया है. पिछले साल इसी अवधि में यहां 9.1 मिलियन टन उत्पादन हुआ था. हालांकि, यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन कुल उत्पादन के संतुलन पर इसका असर जरूर पड़ा है.
बेहतर रिकवरी रेट से मिली मदद
इस बार चीनी उत्पादन बढ़ने की एक और बड़ी वजह बेहतर रिकवरी रेट भी है. 15 अप्रैल तक देश का औसत चीनी रिकवरी रेट 9.55 प्रतिशत रहा है, जो पिछले साल के 9.37 प्रतिशत से ज्यादा है.
रिकवरी रेट का मतलब होता है कि गन्ने से कितनी मात्रा में चीनी निकाली जा रही है. जब यह दर ज्यादा होती है, तो उत्पादन अपने आप बढ़ जाता है, भले ही गन्ने की मात्रा समान ही क्यों न हो.
मिलों की स्थिति और आगे की संभावना
देश में इस सीजन के दौरान कुल 541 चीनी मिलें चली थीं, जिनमें से 15 अप्रैल तक 520 मिलों में पेराई का काम बंद हो चुका है. पिछले साल इसी समय तक 499 मिलें बंद हुई थीं, यानी इस बार पेराई का काम तेजी से खत्म हुआ है.
फिलहाल 21 मिलें अभी भी चल रही हैं, जिनमें:
- 11 तमिलनाडु में
- 9 उत्तर प्रदेश में
- 1 हरियाणा में
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की मिलें इसी महीने पेराई बंद कर सकती हैं.
सीजन खत्म होने से पहले और बढ़ सकता है उत्पादन
यह गन्ना सीजन 30 सितंबर तक चलेगा, इसलिए अभी भी उत्पादन बढ़ने की संभावना बनी हुई है. खासकर अगस्त और सितंबर के दौरान तमिलनाडु और कर्नाटक में दूसरी पेराई (सेकंड सीजन) से अतिरिक्त उत्पादन जुड़ सकता है. इसका मतलब है कि अंतिम आंकड़े और बेहतर हो सकते हैं और कुल उत्पादन में और इजाफा देखने को मिल सकता है.