India-UAE FTA: भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए खुला बड़ा बाजार, मिलेट से रेडी-टू-ईट तक बढ़ेंगे निर्यात के मौके

India UAE FTA Food Export: भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय खाद्य उद्योग के लिए निर्यात के नए अवसर खुले हैं. प्रोसेस्ड खाद्य, बेकरी उत्पाद और काजू के साथ मिलेट, जैविक, जीआई-टैग और रेडी-टू-ईट उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 13 Sep, 2026 | 08:42 AM

India-UAE FTA: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब भारतीय खाद्य उद्योग के लिए नए अवसर लेकर आ रहा है. इस समझौते के चलते न केवल पारंपरिक खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि जैविक, जीआई-टैग, मिलेट और रेडी-टू-ईट उत्पादों के लिए भी नए बाजार खुल रहे हैं. वाणिज्य मंत्रालय और एपीडा (APEDA) का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह समझौता भारतीय खाद्य कंपनियों, किसानों और छोटे उद्यमों के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है.

क्या है भारत-यूएई सीईपीए समझौता?

भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) 18 फरवरी 2022 को हुआ था और इसे 1 मई 2022 से लागू किया गया. इस समझौते के तहत यूएई ने अपनी 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर आयात शुल्क खत्म कर दिया है. इससे भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को सीधा लाभ मिल रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि भारतीय उत्पाद अब यूएई के बाजार में कम कीमत पर और अधिक प्रतिस्पर्धी तरीके से पहुंच पा रहे हैं. खाद्य और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पाद इस समझौते के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं.

इन खाद्य उत्पादों को मिलेगा फायदा

भारत पहले से ही यूएई को कई खाद्य उत्पादों का निर्यात करता है. इनमें प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, मीठे बिस्कुट, बेकरी उत्पाद, चॉकलेट, काजू, सूखी मिर्च, संरक्षित आलू और अन्य कई उत्पाद शामिल हैं. आयात शुल्क कम होने से इन उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनेगी, जिससे उनकी मांग बढ़ सकती है. इसका सीधा लाभ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, निर्यातकों और किसानों को मिल सकता है.

मिलेट, जैविक और रेडी-टू-ईट उत्पादों के लिए नए मौके

यह समझौता केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है. अब भारतीय मिलेट यानी श्री अन्न, जैविक उत्पाद, जीआई टैग वाले खाद्य पदार्थ, रेडी-टू-ईट फूड, प्लांट-बेस्ड उत्पाद और पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों के लिए भी बड़ा बाजार तैयार हो रहा है. दुनिया भर में हेल्दी और प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में भारतीय मिलेट, ऑर्गेनिक फूड और तैयार खाद्य पदार्थ यूएई के उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकते हैं. इससे भारत के खाद्य निर्यात में विविधता आएगी और नए उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी.

एपीडा की पहल से बढ़ेगा निर्यात

कृषि और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है. एपीडा भारतीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए काम करता है. इंडिया ऑर्गेनिक जैसी प्रमाणन व्यवस्था भारतीय जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद बनाती है. इसके अलावा, एपीडा ने ‘भारती’ (BHARATI) पहल भी शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत के कृषि और खाद्य निर्यात को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है.

100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य में खाद्य क्षेत्र की भूमिका

भारत और यूएई ने वर्ष 2030 तक गैर-तेल और गैर-कीमती धातु व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. खाद्य और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पाद इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. यूएई केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों, अफ्रीका और यूरोप तक पहुंचने का महत्वपूर्ण केंद्र भी है. ऐसे में भारतीय खाद्य कंपनियों के लिए यूएई एक रणनीतिक बाजार बनकर उभर रहा है.

किसानों और एमएसएमई के लिए बड़ा अवसर

यह समझौता किसानों, कृषि स्टार्टअप, फूड प्रोसेसिंग उद्योग और छोटे-मझोले उद्यमों (MSME) के लिए भी नए अवसर लेकर आया है. अब केवल कच्चे कृषि उत्पादों की बजाय अधिक मूल्य वाले, ब्रांडेड और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों के निर्यात पर जोर दिया जा सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में राहत, आसान व्यापार प्रक्रिया और बढ़ती मांग के कारण आने वाले वर्षों में भारतीय खाद्य उद्योग को यूएई के बाजार में मजबूत पहचान मिल सकती है. इससे किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य निर्यात को नई ऊंचाई देने में भी मदद मिलेगी.

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