बच्चों की सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबलिंग को लेकर FSSAI से मांगा जवाब

पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और फैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने FSSAI से चेतावनी लेबल की समयसीमा, लाल रंग और लेबलिंग के तरीके पर जवाब मांगा है. बच्चों में बढ़ती अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतों पर भी चिंता जताई.

नोएडा | Updated On: 12 Sep, 2026 | 12:10 PM

पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और फैट की जानकारी देने वाले चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से कई अहम सवाल पूछे हैं. कोर्ट ने कहा कि बच्चों में गलत और अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतें विकसित होने का खतरा बढ़ रहा है. ऐसे में खाद्य पदार्थों पर सही जानकारी देना और बच्चों में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना जरूरी है.

FSSAI की लेबलिंग योजना पर कोर्ट ने उठाए सवाल

द ट्रिब्यून के अनुसार, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने FSSAI की प्रस्तावित फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FoPL) योजना में मौजूद कुछ कमियों पर स्पष्टीकरण मांगा है. यह लेबल पैकेट के सामने  लगाया जाता है, ताकि ग्राहक खरीदारी से पहले आसानी से समझ सकें कि किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की मात्रा कितनी अधिक है. कोर्ट ने खास तौर पर पूछा कि अगर किसी उत्पाद में दो या उससे अधिक चिंताजनक पोषक तत्व ज्यादा हैं, तो उनके लिए एक ही संयुक्त षट्भुज (Hexagon) चेतावनी क्यों प्रस्तावित की गई है. कोर्ट ने हर पोषक तत्व के लिए अलग-अलग स्पष्ट चेतावनी देने के विकल्प पर भी जवाब मांगा.

बच्चों में पोषण जागरूकता बढ़ाने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को अस्वास्थ्यकर खानपान से बचाने के लिए स्कूलों में पोषण संबंधी शिक्षा  बढ़ाने की जरूरत बताई. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि स्कूलों के पाठ्यक्रम, कार्यशालाओं और अन्य गतिविधियों के जरिए बच्चों को पैकेज्ड फूड पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी को समझना कैसे सिखाया जाएगा. पीठ ने कहा कि बच्चे अक्सर बिना पूरी जानकारी के या विज्ञापनों और आकर्षक पैकेजिंग से प्रभावित होकर खाद्य पदार्थ चुन लेते हैं. इसलिए उन्हें खाद्य लेबल पढ़ने और सही खानपान का फैसला लेने की जानकारी देना जरूरी है.

लाल रंग के चेतावनी लेबल पर भी सवाल

द ट्रिब्यून के अनुसार, FSSAI ने ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य उत्पादों के लिए लाल रंग के प्रमुख चेतावनी लेबल का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस रंग के चुनाव पर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि भारत में आम उपभोक्ता लाल रंग को अक्सर मांसाहारी उत्पादों से जोड़कर देखता है. ऐसे में क्या FSSAI को चेतावनी लेबल के रंग पर दोबारा विचार करना चाहिए? कोर्ट ने यह भी पूछा कि लेबल लागू करने की स्पष्ट समयसीमा क्या होगी, ताकि उपभोक्ताओं और खाद्य उद्योग दोनों को स्थिति समझने में आसानी हो.

दो चरणों में लागू करने की योजना पर जवाब तलब

FSSAI ने लेबलिंग व्यवस्था  को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया है. पहले चरण में केवल उन उत्पादों को शामिल करने की बात कही गई है, जिनमें चीनी, नमक और फैट में से कम से कम दो की मात्रा अधिक है. सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और पूछा कि किसी एक पोषक तत्व की अधिक मात्रा वाले उत्पादों को शुरुआत में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा. कोर्ट ने कहा कि उद्योग को उत्पादों में बदलाव करने के लिए समय देना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके नाम पर समयसीमा अनिश्चित नहीं रह सकती. सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को 10 दिनों के भीतर सभी सवालों पर जवाब देने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी.

Published: 12 Sep, 2026 | 11:52 AM

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