भारत से मूंगफली (ग्राउंडनट) निर्यात करने वाले किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ी चिंता की खबर सामने आई है. इंडोनेशिया की क्वारंटाइन अथॉरिटी (IQA) ने 27 अगस्त 2025 से भारत से मूंगफली के आयात को अस्थायी रूप से रोक दिया है. यह निर्णय अचानक नहीं बल्कि गुणवत्ता से जुड़े गंभीर मुद्दों के बाद लिया गया है.
रोक का कारण
भारत से भेजी गई कुछ मूंगफली की खेपों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं पाया गया. इंडोनेशियन अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला “नॉन-कम्प्लायंस” (NNC) का है, यानी निर्यात के दौरान जरूरी क्वालिटी चेक और सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन नहीं हुआ. चूंकि मूंगफली सीधा खाने योग्य उत्पाद है और इसे स्नैक्स, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इंडोनेशिया ने तुरंत यह कदम उठाया ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं की सेहत पर कोई असर न पड़े.
मौजूदा शिपमेंट्स का क्या होगा?
यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू है, लेकिन एक ट्रांजिशन पीरियड रखा गया है. नोटिस जारी होने की तारीख से अगले 7 दिनों के भीतर भेजे गए शिपमेंट्स (Bills of Lading) को इंडोनेशिया में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, इन खेपों की कड़ी जांच और री-टेस्टिंग होगी. अगर किसी शिपमेंट में मानकों की कमी पाई गई तो उसे तुरंत रिजेक्ट कर वापस भेज दिया जाएगा.
भारतीय निर्यातकों पर असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मूंगफली उत्पादक देशों में से एक है और इसका बड़ा हिस्सा निर्यात होता है. इंडोनेशिया भारतीय मूंगफली के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. ऐसे में इस रोक का सीधा असर निर्यातकों और किसानों दोनों पर पड़ेगा.
किसानों की चिंता: जिन किसानों ने अपनी फसल निर्यात के लिए बेची है, उनके दामों पर असर पड़ सकता है. अगर मांग घटती है, तो बाजार में कीमतें नीचे आ सकती हैं.
निर्यातकों का नुकसान: पहले से तैयार शिपमेंट्स पर अनिश्चितता बनी हुई है. अगर खेप रिजेक्ट होती है तो बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बाजार पर असर: यह स्थिति भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को भी प्रभावित कर सकती है. अन्य देश भी भारत से आने वाले उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा सकते हैं.
यह रोक कब तक चलेगी?
फिलहाल यह रोक अस्थायी है. इंडोनेशिया ने साफ किया है कि जब तक भारत से आने वाले शिपमेंट्स में क्वालिटी सुधार नहीं दिखेगा, तब तक यह रोक बनी रहेगी. यानी, जब तक नई गाइडलाइन या व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक भारतीय मूंगफली पर यह पाबंदी जारी रह सकती है.
आगे क्या होगा?
भारतीय निर्यातकों और सरकार के लिए यह एक चेतावनी है. अब निर्यातकों को ज्यादा सख्ती से गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग, स्टोरेज और प्रोसेसिंग पर ध्यान देना होगा. सरकार भी निर्यात संगठनों के साथ मिलकर इंडोनेशियाई अधिकारियों से बातचीत कर रही है ताकि जल्द ही इसका समाधान निकल सके.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ने क्वालिटी कंट्रोल पर गंभीरता दिखाई तो यह रोक लंबे समय तक नहीं चलेगी. पहले भी कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तरह की स्थितियां बनी हैं और भारत ने उनमें सुधार किया है.