राजस्थान सहित कई राज्यों में मक्का का रेट MSP से कम, किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार

देशभर में मक्का के दाम MSP से नीचे गिरने से किसान परेशान हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में स्थिति गंभीर है, जहां खरीद में देरी और कम कीमतों के कारण किसान नुकसान झेल रहे हैं. वारंगल में किसान हफ्तों इंतजार कर रहे हैं और मजबूरी में सस्ते दाम पर उपज बेच रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 5 May, 2026 | 08:29 PM

Maize Mandi Rate: देश की अलग-अलग मंडियों में मक्का का रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी नीचे गिर गया है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में मक्का का भाव एमएसपी से कम है. लेकिन तेलंगाना में स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है. यहां पर किसान मंडियों में अपनी उपज भी नहीं बेच पा रहे हैं. किसानों को मंडियों में अपनी उपच बेचने के लिए हफ्ते भर इंतजार करना पड़ रहा है. इससे किसानें में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

राजस्थान की बात करें तो अटरू एपीएमसी में 1 मई को 0.80 मीट्रिक टन मक्का की आवक दर्ज की गई. इस दिन मंडी में मक्का का निनिमम, मैक्सिमम और मॉडल प्राइस 1,701 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो एमएसपी से काफी कम है. वहीं, मध्य प्रदेश में भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है. Agmarknet के आंकड़ों के अनुसार, आगर एपीएमसी में 5 मई को 0.16 मीट्रिक टन स्थानीय किस्म के मक्का की आवक दर्ज की गई. इस दिन न्यूनतम, अधिकतम और मॉडल भाव 1,757 रुपये प्रति क्विंटल रहे, यानी कीमत पूरी तरह स्थिर रही. ऐसे अभी मक्का का एमएसपी 2400 रुपये प्रति क्विंटल है. यानी राजस्थान और मध्य प्रदेश में किसान मजबूरी में एमएसपी से कम रेट पर उपज बेच रहे हैं.

कब शुरू होगी मक्का की सरकारी खरीद

वहीं, तेलंगाना के वारंगल जिले में मक्का किसान कुछ ज्यादा ही परेशान हैं. एनुमामुला कृषि बाजार में किसान पिछले 20 दिनों से मक्का खरीद का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और खरीद प्रक्रिया  में देरी के कारण वे परेशान हैं, जबकि निजी व्यापारी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं. किसानों का कहना है कि मार्कफेड द्वारा खरीद शुरू न होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों को 1,782 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर मक्का बेचना पड़ रहा है, जो MSP 2,400 रुपये से काफी कम है. हालांकि, कई जगहों पर कीमतें गिरकर 1,609 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है.

मंडी परिसर में खुले में पड़े मक्का के ढेर

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एनुमामुला कृषि बाजार में 22 लाइसेंस प्राप्त निजी व्यापारी मक्का की खरीद कर रहे हैं, लेकिन बहुत सीमित मात्रा में और कम दाम पर. मंडी परिसर में मक्का के ढेर खुले में पड़े हुए हैं, जबकि किसान तौल केंद्रों के पास अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. कुछ किसान अपनी फसल को सुखाने के लिए भी फैला रहे हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि सरकारी खरीद कब शुरू होगी. किसानों ने आरोप लगाया है कि अधिकारी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार को तुरंत मक्का की खरीद शुरू करनी चाहिए और MSP के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए.

प्रयाप्त खरीद केंद्र न होने से किसान परेशान

वहीं, किसान संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार के 20 मार्च के निर्देश के बावजूद जिले में MARKFED के जरिए 31 खरीद केंद्र स्थापित किए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 10 से 12 केंद्र ही शुरू हो पाए हैं और उनमें भी पूरी तरह से खरीद शुरू नहीं हुई है. इस सीजन में जिले में करीब 1.81 लाख एकड़ में मक्का की खेती हुई है. किसानों ने मांग की थी कि उत्पादन को देखते हुए कम से कम 54 खरीद केंद्र बनाए जाएं, लेकिन केवल 31 केंद्रों की मंजूरी दी गई और वे भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं. देरी के कारण किसान मजबूरी में 1,600 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर मक्का बेच रहे हैं, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है.

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