महाराष्ट्र में 300 रुपये क्विंटल प्याज, ईरान-इजरायल जंग के बीच 150 कंटेनर प्याज खाड़ी देशों के लिए रवाना

महाराष्ट्र के बड़े किसान नेता और शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल सिंह घनवत ने किसान इंडिया को बताया कि होलसेल मार्केट में प्याज की कीमत  3 से 9 रुपये प्रति किलो तक गिर कर हो गई है, जिससे किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर करीब 150 कंटेनर फंसे थे, लेकिन अब सभी खाड़ी देशों के लिए रवाना हो गए हैं.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 4 Apr, 2026 | 06:15 PM

Mandi Rate: महाराष्ट्र के प्याज किसान इस समय भारी नुकसान झेल रहे हैं. निर्यात में रुकावट और बेमौसम बारिश की वजह से न सिर्फ फसल की गुणवत्ता खराब हुई है, बल्कि दाम भी काफी गिर गए हैं. खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण खासकर ईरान से जुड़े निर्यात रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों क्विंटल प्याज देश में ही अटक गया और बाजार में ज्यादा आपूर्ति होने से कीमतें गिर गईं. मौजूदा वक्त में मंडियों के अंदर प्याज 300 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.

महाराष्ट्र के बड़े किसान नेता और शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल सिंह घनवत ने किसान इंडिया को बताया कि होलसेल मार्केट में प्याज की कीमत  3 से 9 रुपये प्रति किलो तक गिर गई है, जिससे किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर करीब 150 कंटेनर फंसे थे, लेकिन अब सभी खाड़ी देशों के लिए रवाना हो गए हैं. उन्होंने कहा कि ईरान-इजरायल संघर्ष की वजह से निर्यात में पहले एक हफ्ते का समय लगता था, अब 15 दिन लग रहे हैं. अनिल सिंह घनवत ने सरकार से तुरंत कदम उठाकर किसानों की मदद करने की अपील की है.

बारिश से फसल को पहुंचा नुकसान

अनिल सिंह घनवत ने बताया कि मंडियों में प्याज की कीमत 300 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर कर हो गई है, जबकि इसकी लागत 1500 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल है, जिससे किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है. साथ ही, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि  ने फसलों को और नुकसान पहुंचाया है. मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र और पश्चिमी महाराष्ट्र जैसे बड़े कृषि क्षेत्रों में फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं.

बफर स्टॉक्स के जारी होने से बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ गई

नासिक जिला, जो महाराष्ट्र का प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र है, वहां किसानों ने व्यापक फसल नुकसान की शिकायत की है. किसानों का कहना है कि पानी भरने की वजह से पूरी फसल नष्ट हो गई, जबकि अन्य ने स्टोर किए हुए प्याज का लगभग 40 फीसदी खराब होने की बात बताई. हालांकि 2025 में प्याज की पैदावार अच्छी रही और उत्पादन बढ़कर करीब 15,000 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया, फिर भी सरकारी बफर स्टॉक्स के जारी होने से बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ गई और कीमतें और गिर गईं.

किसान संगठन अब तुरंत मदद की मांग कर रहे हैं. महाराष्ट्र स्टेट ऑनीयन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) लागू कर कीमतें स्थिर करने और राहत देने की अपील की है. संगठन ने चेतावनी दी है कि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान प्रदर्शन भी कर सकते हैं.

कृषि मंत्री ने प्रभावित किसानों को समर्थन का भरोसा दिया है

राज्य अधिकारियों ने नुकसान की गंभीरता को स्वीकार किया है. कृषि मंत्री ने प्रभावित किसानों  को समर्थन का भरोसा दिया है, जबकि राजस्व विभाग ने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन करने के बाद मुआवजे का निर्णय लिया जाएगा. हालांकि, कई किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब बस अपनी रोजी-रोटी बचाना है, क्योंकि गिरती कीमतें और खराब हुई फसल ने जो मौसम लाभदायक होने की उम्मीद थी, उसे संकट में बदल दिया है.

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Published: 4 Apr, 2026 | 06:14 PM
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