आलू के रेट में गिरावट, 3 रुपये किलो बेचने को मजबूर हुए किसान.. कब शुरू होगी MSP पर खरीदी?

पश्चिम बंगाल में आलू की बंपर पैदावार के कारण कीमतें गिरकर 3.50- 4 रुपये प्रति किलो रह गई हैं, जबकि लागत करीब 7.50 रुपये है. किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. सरकार ने खरीद की घोषणा की है, लेकिन व्यवस्था ठीक से शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है.

नोएडा | Updated On: 14 Mar, 2026 | 12:12 PM

Potato Price Fall: पश्चिम बंगाल में लाखों आलू किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि फसल की कटाई शुरू होते ही आलू की कीमतों में तेज गिरावट आई है. इससे किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. फिलहाल किसानों को अपना आलू लगभग 3.50-4 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचना पड़ रहा है, जबकि 1 किलो आलू उगाने में उन्हें करीब 7.50 रुपये खर्च आता है. ऐसे भी इस साल आलू का उत्पादन बहुत ज्यादा हुआ है, इसलिए बाजार में कीमतें नीचे चली गईं.

कहा जा रहा है कि व्यापारी भी ज्यादा आलू खरीदने से हिचक रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ सालों में सरकार द्वारा दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उन्हें उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिला था. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने एक महीने पहले ही ऐसी स्थिति का अंदेशा जताया था और किसानों से आलू खरीदने का भरोसा दिया था, लेकिन इसे लागू करने की व्यवस्था अभी ठीक से शुरू नहीं हो पाई है.

पहले भी जब पश्चिम बंगाल में आलू का उत्पादन  100 लाख टन से ज्यादा हुआ है, तब किसानों को कम कीमत की समस्या झेलनी पड़ी है. पिछले साल राज्य में लगभग 110 लाख टन आलू पैदा हुआ था. उस समय भी कटाई के दौरान किसानों को सही दाम नहीं मिला. व्यापारियों ने आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखा, लेकिन सीजन के अंत में उन्हें भी आलू करीब 2 रुपये प्रति किलो के बहुत कम दाम पर बेचना पड़ा.

साल पश्चिम बंगाल में लगभग 130 लाख टन आलू पैदा होगा

पश्चिम बंगाल प्रगतिशील आलू व्यापारी समिति के सचिव लालू मुखर्जी ने द टेलीग्राफ ऑनलाइन से कहा कि इस साल उत्पादन और भी ज्यादा है, इसलिए समस्या पहले से बड़ी हो गई है. अनुमान है कि इस साल पश्चिम बंगाल  में लगभग 130 लाख टन आलू पैदा होगा, जो पिछले साल से करीब 20 लाख टन ज्यादा है. सरकार ने ज्यादा उत्पादन को देखते हुए घोषणा की थी कि वह किसानों से 12 लाख टन आलू 9.50 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदेगी. लेकिन फिलहाल यह योजना प्रभावी तरीके से काम करती नहीं दिख रही है. असल में कुल उत्पादन के मुकाबले सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली मात्रा बहुत कम है.

लगभग 20 फीसदी ने ही बैंक से कर्ज लिया है

सूत्रों के अनुसार समस्या यह भी है कि सरकार सीधे किसानों से आलू नहीं खरीद रही है. वह कोल्ड स्टोरेज के जरिए खरीद करने की कोशिश कर रही है, जहां कोल्ड स्टोरेज मालिक बैंक से कर्ज लेकर किसानों को पैसे देंगे. लेकिन राज्य के 485 निजी कोल्ड स्टोरेज में से केवल लगभग 20 फीसदी ने ही बैंक से कर्ज लिया है और आलू खरीदना शुरू किया है. इसके अलावा करीब 10 सहकारी कोल्ड स्टोरेज भी खरीद कर रहे हैं, जो इतनी बड़ी पैदावार के मुकाबले बहुत कम है.

राज्य में आलू की खपत करीब 60 लाख टन है

एक अधिकारी के अनुसार राज्य में आलू की खपत करीब 60 लाख टन है.  बाकी आलू पहले बिहार, ओडिशा, झारखंड और असम जैसे राज्यों में भेजा जाता था. लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने 2019 से 2024 के बीच कई बार दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर रोक लगाई. इसकी वजह से पड़ोसी राज्यों ने अब बंगाल के आलू पर निर्भर रहना कम कर दिया है. इसलिए व्यापारी अब इस कारोबार में पैसा लगाने से हिचक रहे हैं.

आलू किसानों को हो रहा नुकसान

हुगली जिले के पुरसुरा के किसानरजत मंडल ने कहा कि उन्होंने लगभग 30 टन आलू पैदा किया था, लेकिन कर्ज चुकाने के लिए उन्हें मजबूरी में सिर्फ 10 टन आलू बहुत कम दाम पर बेचना पड़ा. बाकी आलू उन्होंने अपने घर में ही रख दिया है, इस उम्मीद में कि या तो सरकार इसे खरीद लेगी या कुछ दिनों में बाजार में कीमत  बढ़ जाएगी. माना जा रहा है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में आलू किसानों ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया था, क्योंकि उस समय सरकार ने किसानों से सीधे आलू खरीदने के लिए दखल दिया था.

 

Published: 14 Mar, 2026 | 12:09 PM

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