MSP से कम मक्के का रेट, 16 रुपये किलो हुई मार्केट में कीमत..किसानों ने की सरकारी खरीद की मांग

तमिलनाडु के सलेम जिले में मक्का की कीमतों में भारी गिरावट से किसान परेशान हैं. MSP 24 रुपये प्रति किलो होने के बावजूद बाजार में मक्का 16-18 रुपये में बिक रहा है. उत्पादन बढ़ने से दाम गिरे हैं, जबकि किसान सरकार से हस्तक्षेप कर मक्का खरीदने की मांग कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Mar, 2026 | 04:58 PM

Maize Rate: तमिलनाडु के प्रमुख मक्का उत्पादक जिले सलेम में मक्के के रेट में तेजी से गिरावट आई है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि रेट में गिरावट आने से बाजार में मक्का नहीं बिका रहा है. मौजूदा वक्त में मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल है, जो लगभग 24 रुपये प्रति किलो होता है. लेकिन वर्तमान में यह मार्केट में केवल 16 से 18 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जो 1400 रुपये से 1800 रुपये क्विंटल हुआ. इससे किसानों को पिछले साल की तुलना में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. हालांकि, दाम में गिरावट आने से मक्का बड़े पैमाने पर व्यापारिक यार्डों में पड़ा है और बिक्री धीमी हो गई है. यह स्थिति राज्य के कई जिलों में देखने को मिल रही है.

विवासाया मुन्नेत्रा कजहगम के महासचिव के. बालासुब्रमण्यम ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मक्का की कीमतें गिरने का मुख्य कारण इस साल फसल की ज्यादा खेती है. उन्होंने कहा कि मक्का ज्यादातर पोल्ट्री फीड के लिए इस्तेमाल होता है. पिछले साल किसानों को मक्का से अच्छा मुनाफा मिला और कीमतें लाभकारी थीं. इससे इस साल कई किसानों ने मक्का की खेती बढ़ा दी, जिसकी वजह से उत्पादन बढ़ा और कीमतें गिर गईं.

MSP पर मक्के की खरीद करने की मांग

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य कृषि सांख्यिकी प्राधिकरण ने खेती के पैटर्न पर सही निगरानी नहीं रखी. अगर मक्का की खेती के क्षेत्र और संभावित उत्पादन का सही डेटा साझा किया गया होता, तो किसान मांग और आपूर्ति की स्थिति समझकर हरी मूंग जैसी वैकल्पिक फसलें अपना सकते थे. उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नियोजित (रेगुलेटेड) बाजार ही फसल को MSP पर खरीदते हैं और वहां भी खरीदी गई मात्रा सीमित होती है. इस वजह से कई किसान अपनी फसल को खुले बाजार में MSP से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हैं.

तमिलगा विवासायिगल पथुकप्पु संघम के संस्थापक ईसान मुरुगासामी ने भी स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सरकार को कदम उठाकर सीधे किसानों से मक्का खरीदना चाहिए ताकि कीमतें स्थिर रहें. उन्होंने कहा कि जैसे उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में मक्का सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खरीदा जाता है, तमिलनाडु भी ऐसा सिस्टम अपना सकता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मार्केट इंटरवेंशन स्कीम शुरू की जाए, जिसके तहत जब बाजार कीमतें अचानक गिरें, तो सरकार अस्थायी रूप से फसल खरीदकर किसानों को भारी नुकसान  से बचा सके.

रेट में गिरावट से किसानों को नुकसान

हालांकि, किसानों का कहना है कि पिछले साल मक्का 24 रुपये प्रति किलो बिकता था, लेकिन अब 18 रुपये भी मुश्किल से मिलते हैं. एक अन्नदाता का कहना है कि तीन एकड़ से मैंने लगभग 9 टन मक्का काटा, लेकिन कीमत कम होने के कारण लाभ बहुत कम है. अगर सरकार सीधे मक्का नहीं खरीदेगी, तो किसानों को भारी नुकसान होगा. लेकिन पोल्ट्री सेक्टर के लोग कहते हैं कि मक्का की खरीद  मुख्य रूप से उनके फीड की जरूरत के हिसाब से होती है.

पोल्ट्री पक्षी को रोज 110 ग्राम फीड चाहिए

नमक्कल के पोल्ट्री फार्म के एक मालिक ने कहा कि कि मक्का पोल्ट्री फीड का एक अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि एक पोल्ट्री पक्षी के लिए रोजाना लगभग 110 ग्राम फीड चाहिए, जिसमें करीब 40 फीसदी मक्का यानी 44 ग्राम शामिल है. हम मक्का की खरीद पक्षियों की संख्या और फीड की जरूरत के आधार पर करते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि मक्का लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता, क्योंकि नमी के अंतर से फफूंदी लग सकती है.

प्रति एकड़ 3-4 टन मक्के का उत्पादन

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई किसान कपास जैसी फसलों  से मक्का की खेती की ओर बढ़ गए हैं. सलेम जिले के संयुक्त कृषि निदेशक श्रीनिवासन ने कहा कि जिले में लगभग 52,000 हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है और किसान आमतौर पर प्रति एकड़ 3-4 टन मक्का पाते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि विभाग किसानों के साथ बैठकें कर रहा है और सरकार द्वारा उठाए जा सकने वाले कदमों पर विचार कर रहा है.

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Published: 7 Mar, 2026 | 04:57 PM

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