किसानों की कर्जमाफी मुद्दे पर सीएम के खिलाफ प्रदर्शन-नारेबाजी, शर्तें हटाने की मांग पर अड़ा विपक्ष

Maharashtra loan waivers: कृषि लोन माफी स्कीम की शर्तों के लेकर चल रहे विरोध के क्रम में विधानसभा परिसर में विपक्षी नेताों ने सीएम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया. पहले किसानों के प्रदर्शन और अब सियासी दलों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 22 Jun, 2026 | 02:26 PM

महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा सियासी रूप ले चुका है. विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को महाराष्ट्र विधानमंडल परिसर की सीढ़ियों पर देवेंद्र फडणवीस की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई और लोनमाफी की शर्तें हटाने की मांग की गई. विपक्षी नेताओं आदित्य ठाकरे समेत अन्य विधायकों ने कम से कम टेक्निकल शर्तों के साथ किसानों का पूरा लोन माफ करने की मांग की है.

महाराष्ट्र कैबिनेट ने बीते 2 जून को राज्य के 56 लाख किसानों के कर्ज को माफ करने की मंजूरी दी. इसके तहत किसानों पर बकाया कर्ज 36,585 करोड़ रुपये को कृषि लोन माफी स्कीम के तहत स्वीकृति दी गई. लेकिन, इस कर्जमाफी में लगाई गई शर्तों को लेकर लगातार बखेड़ा खड़ा हो रहा है. पहले किसानों के प्रदर्शन के बाद अब सियासी दलों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

आदित्य ठाकरे की मांग किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए

शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे, अंबादास दानवे और कांग्रेस के सतेज पाटिल की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को सरकार के खिलाफ नारे लगाए. उन्होंने मांग की कि किसानों का पूरा लोन माफ होना चाहिए. सरकार को इसे लागू करना चाहिए. विपक्ष ने दावा किया कि इस स्कीम से जुड़ी कई शर्तों की वजह से कई योग्य लाभार्थी इससे बाहर हो जाएंगे. बता दें कि NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने इस महीने की शुरुआत में स्कीम से सख्त शर्तों को हटाने और किसानों के लिए पूरी तरह से लोन माफ करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था.

नाना पटोले ने सरकार के कर्जमाफी पर सवाल उठाए

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने मीडिया से कहा कि कर्जमाफी पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कर्जमाफ करने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा सरकार कर्जमाफ करेगी?अगर सरकार करेगी तो झूठा करेगी. यह टाइमपास करने वाली सरकार है. आज विधानसभा में भी हमने सवाल उठाया था, लेकिन सरकार को बात नहीं करनी. ऑपरेशन टाइगर पर उन्होंने कहा कि राज्य का मुखिया लोकतंत्र की हत्या करने के बाद उसका समर्थन कर रहा है, यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है. इस भूमि पर अगर लोकतंत्र की हत्या हो रही है और मुख्यमंत्री उसका समर्थन कर रहा है तो यह महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है.

कौन सी शर्तें बनीं कर्जमाफी योजना के विरोध की वजह

  • महाराष्ट्र सरकार 36,585 करोड़ रुपये की कृषि लोन माफी स्कीम को मंजूरी दी है और इसके तहत 56 लाख किसानों को लाभ मिलना है. पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना के तहत किसानों का 2 लाख रुपये तक के कृषि लोन माफी का प्रावधान है. इसके तीन हिस्से हैं लोन माफी, वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) और इंसेंटिव बेनिफिट, एलिजिबिलिटी के लिए जमीन की कोई शर्त नहीं होगी.
  • माफी वाले हिस्से के तहत जिन किसानों का कुल बकाया शॉर्ट टर्म फसल लोन, मूलधन और ब्याज मिलाकर 2 लाख रुपये तक है, वे पूरी कर्ज माफी के लिए पात्र होंगे. लोन 1 अप्रैल 2019 और 31 मार्च 2025 के बीच दिए गए होने चाहिए. 30 सितंबर 2025 तक ओवरड्यू रहने चाहिए और 31 मार्च 2026 तक बिना पेमेंट के रहने चाहिए.
  • जिन किसानों का बकाया 2 लाख रुपये से ज्यादा है, वे OTS हिस्से के तहत कवर होंगे. ऐसे कर्जदारों को 2 लाख रुपये से ज्यादा की रकम चुकानी होगी. इसके बाद वे 2 लाख रुपये की छूट के हकदार हो जाएंगे. उन्हें बकाया रकम में से अपना हिस्सा जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है.

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Published: 22 Jun, 2026 | 02:23 PM

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