पंजाब के किसानों का कमाल! साल में दो बार झींगा की खेती, दोगुनी कमाई का नया मॉडल तैयार

पंजाब के किसानों ने झींगा पालन में नई मिसाल पेश की है. अब वे साल में दो बार झींगा की फसल लेकर आय बढ़ा रहे हैं. ऑफ-सीजन में बेहतर दाम मिलने से मुनाफा बढ़ा है. राज्य सरकार भी इस मॉडल को सफल मानते हुए दूसरे किसानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

नोएडा | Published: 13 Jul, 2026 | 12:10 PM

पंजाब के किसानों ने झींगा पालन में नया रिकॉर्ड बनाया है. अब कुछ किसान साल में एक नहीं, बल्कि दो बार झींगा की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इस सफल मॉडल से किसानों की आय बढ़ी है. इसे देखते हुए पंजाब का मत्स्य पालन विभाग भी दूसरे किसानों को दो फसल वाले इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. खास बात यह है कि इस पहल की बदौलत पंजाब में हर साल 2,500 से 3,000 मीट्रिक टन झींगा उत्पादन हो रहा है.

दरअसल, झींगा पालन का यह प्रयोग वर्ष 2021 में कुछ किसानों ने शुरू किया था. पिछले पांच वर्षों में यह तरीका सफल साबित हुआ है और अब इसके छठे साल में इसे एक व्यवहारिक खेती मॉडल माना जा रहा है. इससे खासकर खारे और जलभराव वाले खेतों  का बेहतर उपयोग हो रहा है, जहां सामान्य खेती करना मुश्किल होता है. पहले पंजाब में करीब 1,000 एकड़ में झींगा की खेती सिर्फ जून से सितंबर के बीच एक बार होती थी. लेकिन कुछ किसानों ने नई पहल करते हुए फरवरी में ही झींगा पालन शुरू किया और मई में पहली फसल तैयार कर ली. उस समय बाजार में झींगे की आपूर्ति कम होने से उन्हें अच्छे दाम मिले. इसके बाद किसानों ने पारंपरिक जून से सितंबर वाले सीजन में दूसरी फसल भी ली. इस तरह साल में दो बार झींगा उत्पादन कर उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हुई.

दो फसलों से बढ़ी आमदनी, झींगा उत्पादन भी बढ़ा

फाजिल्का जिले के बहादुर खेड़ा गांव के 67 वर्षीय किसान दर्शन सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स को कहा कि उन्होंने 2021 में साल में दो बार झींगा की खेती शुरू की थी और इसके अच्छे नतीजे मिले. वह फरवरी में पहली फसल के लिए झींगा के बीज डालते हैं और मई में उसकी कटाई कर लेते हैं. इसके बाद जून में तालाब तैयार कर दूसरी फसल की शुरुआत करते हैं. दर्शन सिंह ने कहा कि 2018 तक वे माल्टा (खट्टे फल) की खेती करते थे, लेकिन जब पंजाब सरकार ने झींगा पालन  को बढ़ावा देना शुरू किया तो उन्होंने 5 एकड़ में इसकी खेती शुरू की. अच्छे मुनाफे को देखते हुए उन्होंने साल में दो बार झींगा उत्पादन का फैसला किया, जो बेहद लाभदायक साबित हुआ. अब वह 25 एकड़ में झींगा की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले छह वर्षों में उन्हें हर सीजन में प्रति एकड़ 3 से 3.5 टन तक झींगा उत्पादन मिला है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.

प्रति एकड़ 6 से 7  लाख रुपये का मुनाफा

वहीं, बहादुर खेड़ा गांव के एक अन्य झींगा किसान अमरिंदर सिंह ने कहा कि मई में तैयार होने वाले झींगे की दिल्ली में अच्छी मांग रहती है. उन्होंने कहा कि एक फसल से ही प्रति एकड़ 10 से 12 लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि सालाना संचालन और उत्पादन पर करीब 6 लाख रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है. इसके बाद किसानों को हर साल प्रति एकड़ 6 से 7 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है.

दक्षिण-पश्चिम पंजाब के कई गांवों में भूजल खारा

राज्य मत्स्य पालन विभाग की सहायक निदेशक प्रभजोत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार 2016 से किसानों की आय बढ़ाने  के लिए झींगा पालन को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम पंजाब के कई गांवों में भूजल खारा है और जलभराव की समस्या भी बनी रहती है. ऐसे में इन क्षेत्रों की अनुपयोगी जमीन का बेहतर उपयोग करने के लिए झींगा पालन शुरू कराया गया था. अब किसान तय समय से आगे बढ़कर साल में दो बार झींगा की खेती कर रहे हैं और यह मॉडल सफल साबित हो रहा है.

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