किसान को आम का मूल्य 3 रुपये मिल रहा.. व्यापारी उसे 40 में बेच रहा, ये नाइंसाफी कौन दूर करेगा?
Tamil Nadu Mango Farmer Price Issue : आम किसान जीवा ने बताया कि आम के लिए मिलने वाली कीमत 3 रुपये प्रति किलोग्राम है. वहीं दूसरी ओर व्यापारी इसे 40 रुपये में उपभोक्ताओं को बेचकर खूब मुनाफा बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ नाइंसाफी है. किसानों ने अगले साल आम की खेती नहीं करने का फैसला किया है.
तमिलनाडु में ‘किली मूकु’ आम यानी तोतापरी की खेती होती है और यहां से इसे अलग-अलग राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है. लेकिन इस बार किसानों के लिए हालात मुश्किल भरे बन गए हैं. किसानों का कहना है कि इस साल उन्हें अपनी उपज के लिए सिर्फ 3 रुपये प्रति किलोग्राम का दाम मिल रहा है, जबकि वही आम खुदरा बाजार में 40 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा में बिक रहे हैं. कीमतों में इस अंतर की वजह से आम उत्पादक किसान बहुत परेशान हैं. कई किसान फल तोड़ने में लगने वाली मजदूरी का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं. नतीजतन, किसानों ने आम न तोड़ने का फैसला किया है और उन्हें पेड़ों पर ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है.
आम की खेती लागत निकालना मुश्किल हुआ
मदुरै जिले के मेलूर तालुक खासकर कोट्टमपट्टी इलाके के आम किसान जीवा ने एएनआई से बताया कि यहां बहुत बड़े इलाके में आम की खेती होती है. किसान आम की खेती में बहुत पैसा लगाते हैं. देखभाल और उत्पादन का खर्च हर साल प्रति एकड़ लगभग 1 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. हालांकि, इतना ज्यादा निवेश करने के बावजूद किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है और न ही उन्हें ठीक-ठाक कमाई हो पा रही है.
किसान ने कहा कि इस इलाके में सबसे ज्यादा ‘किलिमुक्कू’ यानी तोतापरी आम उगाया जाता है. किसान इस किस्म को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है और पारंपरिक रूप से इसे मुनाफे वाली फसल माना जाता रहा है. इसी वजह से इस इलाके में कई सालों से बड़े पैमाने पर आम की खेती हो रही है. अफसोस की बात है कि पिछले दो सालों में आम की कीमतों में लगातार और भारी गिरावट आई है.
किसान को 3 रुपये मिल रहे और व्यापारी 40 में बेच रहा
किसान जीवा ने बताया कि आम के लिए खेत पर मिलने वाली कीमत लगभग 5 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 4 रुपये और अब 3 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई है. वहीं दूसरी ओर बाजार में आम से बने उत्पाद जैसे जूस और ड्रिंक्स बहुत ऊंची कीमतों पर बिक रहे हैं. उदाहरण के लिए आम के जूस की एक छोटी बोतल लगभग 10 रुपये में बिकती है, जबकि किसानों को कच्चे फल के लिए प्रति किलोग्राम सिर्फ 3 रुपये मिलते हैं. वहीं, व्यापारी किसानों से 3 रुपये कम मूल्य पर आम खरीद कर उसे उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार में 40 रुपये में बेचकर मोटा मुनाफा बनाते हैं. यह भारी अंतर आम की खेती के भविष्य और किसानों की आजीविका को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है.
तुड़ाई खर्च भी नहीं निकल रहा, अगले साल खेती नहीं करेंगे किसान
किसान ने बताया कि आज किसान फसल तोड़ने की बुनियादी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. 3 रुपये प्रति किलोग्राम की मौजूदा कीमत पर मजदूरी, परिवहन खर्च, कमीशन और अन्य परिचालन लागतों का भुगतान करना असंभव है. इतनी कम कमाई में मजदूर भी आम तोड़ने को तैयार नहीं होते. एक मजदूर को 700 रुपये प्रतिदिन से कम पर काम पर नहीं रखा जा सकता, जबकि तोड़ी गई फसल की कीमत अक्सर उस खर्च को पूरा करने के लिए भी काफी नहीं होती है.
मदुरै जिले में आम की खेती करने वाले किसान जीवा.
किसान ने कहा कि बाजार की इन खराब स्थितियों के कारण हमारे गांवों के कई किसानों ने इस साल अपने आम के पेड़ काटने का फैसला कर लिया है और आम की खेती आगे नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि जब कोई मुनाफा ही नहीं हो रहा है, तो आम की खेती जारी रखने का क्या फायदा. लगभग दो सालों से किसान और किसान संगठन सरकार से आम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की लगातार अपील कर रहे हैं. अगर सरकार ने ऐसा कदम नहीं उठाया, तो आम किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा और कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं.
आम का समर्थन मूल्य 20 रुपये प्रति किलो घोषित करे सरकार
किसान ने कहा कि हम तमिलनाडु सरकार से अपील करते हैं कि वह बाजार की हकीकत और उत्पादन लागत के आधार पर सही समर्थन मूल्य तय करे. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं. पिछले साल कुछ इलाकों में लगभग 8 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य दिया गया था. तमिलनाडु में भी ऐसे ही उपाय किए जाने चाहिए. हम सरकार से यह भी अनुरोध करते हैं कि वह फ्रूट पल्प इंडस्ट्रीज, जूस बनाने वाली कंपनियों और आम की प्रोसेसिंग करने वाली कंपनियों को किसानों के लिए खरीद की सही कीमत पक्की करनी चाहिए.
किसान ने कहा कि आम की खेती को आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने पर विचार किया जाना चाहिए. किसान और किसान संगठन पिछले दो सालों से लगातार यह मांग कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है. आम की खेती सिर्फ मदुरै जिले तक ही सीमित नहीं है. यह पूरे तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है, जिसमें कृष्णगिरि, सलेम, धर्मपुरी, डिंडीगुल और कई अन्य जिले शामिल हैं। फिर भी, कीमतों में भारी गिरावट के कारण पूरे राज्य में आम किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ा है.