तंबाकू किसानों का फूटा गुस्सा! नहीं मिल रहे खरीदार, अब हाईवे पर होगा बड़ा प्रदर्शन
दक्षिण भारत में तंबाकू किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है. नीलामी में बड़ी संख्या में तंबाकू की बेल्स 'नो-बिड' के कारण रिजेक्ट हो रही हैं और किसानों को कम कीमत मिल रही है. विरोध में किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. 29 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़े धरने की तैयारी की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की अपील की गई है.
केंद्र सरकार, राज्य सरकार और तंबाकू बोर्ड की कोशिशों के बावजूद दक्षिण भारत के तंबाकू किसानों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं. तंबाकू नीलामी में बड़ी संख्या में गांठों (बेल्स) के ‘नो-बिड’ रिजेक्शन और फसल के कम दाम मिलने से किसान परेशान हैं. किसानों का कहना है कि 11 नीलामी केंद्रों पर तंबाकू की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल रही है. अच्छी गुणवत्ता की उपज होने के बावजूद किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है, जबकि कई बेल्स को बिना बोली के ही रिजेक्ट किया जा रहा है.
इस बीच, तंबाकू किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने अपने विरोध प्रदर्शन को जारी रखा है. शनिवार को आंध्र प्रदेश के कोंडापी और जरागुमल्ली मंडलों में किसानों ने लगातार तीसरे दिन बाइक रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया. किसानों की मांग है कि उनकी उपज की उचित कीमत सुनिश्चित की जाए और नीलामी प्रक्रिया में आ रही समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए. रविवार को आंदोलन के चौथे दिन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं ने वीवी पालम (वालेटिवारी पालम) मंडल के गांवों का दौरा किया. उन्होंने तंबाकू किसानों से 29 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार मौजूदा सीजन में तंबाकू की उपज का उचित दाम दिलाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड जारी करे. वहीं, बुधवार को हुई नीलामी में 6.3 लाख किलोग्राम तंबाकू की खरीद हुई. इस दौरान औसत न्यूनतम कीमत 194 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि 27.8 फीसदी तंबाकू की गांठें (बेल्स) बिना किसी बोली के खारिज कर दी गईं. इससे किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है.
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5.1 लाख किलोग्राम तंबाकू की खरीद
शनिवार को तंबाकू नीलामी की स्थिति और खराब हो गई. निर्यातकों ने केवल 5.1 लाख किलोग्राम तंबाकू की खरीद की. इस दौरान किसानों को औसतन 193.28 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम भाव मिला. वहीं, नीलामी में लाई गई 28.5 फीसदी तंबाकू की गांठें (बेल्स) बिना किसी बोली के खारिज कर दी गईं. कुछ नीलामी केंद्रों पर स्थिति और भी चिंताजनक रही. एक केंद्र पर 47.09 फीसदी बेल्स बिना बोली के लौटानी पड़ीं. वहीं, कनीगिरी नीलामी केंद्र में 43.9 फीसदी और ओंगोल-2 नीलामी केंद्र में 40.12 फीसदी तंबाकू की बेल्स को कोई खरीदार नहीं मिला. इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है.
आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेताओं चुंदुरी रंगा राव और पामिडी वेंकट राव ने कहा कि दक्षिणी क्षेत्र के सभी 11 तंबाकू नीलामी केंद्रों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारियों, केंद्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ कई दौर की बैठकें होने के बावजूद नीलामी व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा है. किसान नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में तंबाकू की बेल्स अब भी ‘नो-बिड’ के कारण खारिज हो रही हैं और किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा. इससे तंबाकू उत्पादकों की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.