बजट से पहले तंबाकू किसानों ने की वित्त मंत्री से मुलाकात, ज्यादा टैक्स पर जताई आपत्ति और कही ये बात
किसानों ने वित्त मंत्री को बताया कि तंबाकू उत्पादों पर ज्यादा कर लगाने से देश में कानूनी सिगरेट और अन्य वैध उत्पादों की खपत घट सकती है. जब खपत कम होगी, तो बाजार में तंबाकू की मांग भी कमजोर पड़ेगी. इसका सीधा नतीजा यह होगा कि नीलामी में दाम गिरेंगे, व्यापारियों की दिलचस्पी घटेगी और किसानों के पास बिना बिके तंबाकू का भंडार बढ़ता जाएगा.
Tobacco farmers: देश के तंबाकू किसानों ने एक बार फिर अपनी आजीविका को लेकर गहरी चिंता जताई है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के फ्ल्यू क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू उगाने वाले किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर तंबाकू उत्पादों पर बढ़ाए गए टैक्स को लेकर अपनी परेशानियां सामने रखीं. किसानों का कहना है कि अगर टैक्स का बोझ इसी तरह बना रहा, तो इसका सीधा असर खेती, नीलामी व्यवस्था और लाखों परिवारों की आय पर पड़ेगा.
टैक्स बढ़ने से क्यों डर रहे हैं किसान
किसानों ने वित्त मंत्री को बताया कि तंबाकू उत्पादों पर ज्यादा कर लगाने से देश में कानूनी सिगरेट और अन्य वैध उत्पादों की खपत घट सकती है. जब खपत कम होगी, तो बाजार में तंबाकू की मांग भी कमजोर पड़ेगी. इसका सीधा नतीजा यह होगा कि नीलामी में दाम गिरेंगे, व्यापारियों की दिलचस्पी घटेगी और किसानों के पास बिना बिके तंबाकू का भंडार बढ़ता जाएगा. किसानों का कहना है कि पहले से ही लागत बढ़ रही है और अगर दाम और गिरे, तो खेती घाटे का सौदा बन जाएगी.
नीलामी व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
कर्नाटक से आए किसानों ने बताया कि हाल के महीनों में तंबाकू की नीलामी कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. उन्हें आशंका है कि एक फरवरी के बाद व्यापारी नीलामी में हिस्सा लेने से बच सकते हैं, क्योंकि कच्चे तंबाकू पर 18 प्रतिशत टैक्स लगने से उनकी लागत बढ़ जाएगी. अगर खरीदार कम हुए, तो पूरी नीलामी प्रणाली कमजोर पड़ जाएगी और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
अवैध व्यापार बढ़ने का खतरा
किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि अचानक और ज्यादा टैक्स बढ़ाने से अवैध और तस्करी वाले उत्पादों को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने दूसरे देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि जब वैध उद्योग पर अत्यधिक टैक्स लगाया गया, तो गैरकानूनी कारोबार तेजी से फैल गया. इससे न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि कानूनी फैक्ट्रियां बंद होने की नौबत तक आ गई. किसानों का कहना है कि भारत में भी अगर यही स्थिति बनी, तो नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है.
वित्त मंत्री का आश्वासन, लेकिन इंतजार बरकरार
प्रतिनिधिमंडल में शामिल किसानों के अनुसार, वित्त मंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक रुख दिखाया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों, व्यापार और पूरे नियोजित तंबाकू इकोसिस्टम पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखेगी. किसानों को यह भी बताया गया कि सरकार का उद्देश्य तंबाकू क्षेत्र से अतिरिक्त राजस्व कमाना नहीं है और नीतियां राजस्व संतुलन के आधार पर तय की जाएंगी.
तंबाकू बोर्ड और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
इस बैठक में तंबाकू बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी और आंध्र प्रदेश से सांसद भी मौजूद रहे. उनका कहना था कि तंबाकू की खेती सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मजदूर, व्यापारी, परिवहन और प्रोसेसिंग उद्योग भी इस फैसले से प्रभावित होते हैं. अगर एक कड़ी कमजोर होती है, तो पूरी श्रृंखला पर असर पड़ता है.
किसानों की बढ़ती अनिश्चितता
किसानों का कहना है कि तंबाकू की खेती पहले ही मौसम, लागत और बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझ रही है. ऐसे में टैक्स का अतिरिक्त बोझ उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है. कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं और अगर नीलामी में सही दाम नहीं मिला, तो उनके लिए अगला सीजन शुरू करना भी मुश्किल हो जाएगा.
अब किसानों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं. उन्हें उम्मीद है कि बजट या नीतिगत समीक्षा के दौरान तंबाकू उत्पादों पर टैक्स को लेकर संतुलित फैसला लिया जाएगा. किसानों का मानना है कि अगर टैक्स नीति व्यावहारिक और स्थिर रही, तो न केवल उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी, बल्कि सरकार को भी लंबे समय में स्थायी राजस्व मिलता रहेगा. फिलहाल, तंबाकू किसान राहत की उम्मीद में सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.