सरकार लॉन्च कर रही है नई योजना! टमाटर की बर्बादी होगी कम, किसानों की बढ़ेगी कमाई

आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले में टमाटर किसानों की आय बढ़ाने और कीमतों में उतार-चढ़ाव कम करने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने की योजना बनाई गई है. टमाटर पेस्ट, प्यूरी और सॉस निर्माण से अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग होगा, किसानों को सुनिश्चित बाजार मिलेगा और फसल बर्बादी में कमी आएगी.

Kisan India
नोएडा | Published: 5 Jun, 2026 | 11:54 AM

टमाटर किसानों के लिए अच्छी खबर है. किसानों की आय बढ़ाने और टमाटर की बर्बादी रोकने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार एक नई योजना लॉन्च कर सकती है. इसके तहत टमाटर पेस्ट, प्यूरी और सॉस बनाने वाली प्रोसेसिंग यूनिट्स शुरू की जाएंगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और अतिरिक्त उत्पादन भी आसानी से खपाया जा सकेगा. इससे टमाटर की अधिक पैदावार वाले सीजन में अतिरिक्त उत्पादन को प्रोसेस किया जा सकेगा. अधिकारियों का मानना है कि इससे बाजार में टमाटर की अधिक आपूर्ति के कारण होने वाली कीमतों में भारी गिरावट को रोका जा सकेगा और किसानों को बेहतर व स्थिर आय मिल सकेगी.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि सरकार टमाटर के प्रोसेस्ड उत्पादों  को बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और लंबी शेल्फ लाइफ के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना बना रही है. इसका उद्देश्य अन्नामय्या जिले के टमाटर उत्पादकों को अधिक बाजार अवसर उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाना है. इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के साथ समझौते करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे किसानों को अपनी उपज के लिए सुनिश्चित बाजार मिलेगा और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम होगी.

8,400 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की होती है खेती

अन्नामय्या जिले में टमाटर प्रमुख बागवानी फसलों में से एक है. खासकर मदनपल्ले, पुंगनूर, तंबल्लापल्ले और पिलेरू क्षेत्र टमाटर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं. जिला बागवानी विभाग के अनुसार, जिले में करीब 8,400 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती  होती है और औसतन 55 से 60 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त होता है. ऐसे अन्नामय्या जिले में हर साल करीब 4.6 से 5 लाख टन टमाटर का उत्पादन होता है. इसका बड़ा हिस्सा देश के प्रमुख टमाटर व्यापार केंद्रों में शामिल मदनपल्ले टमाटर मंडी के जरिए बेचा जाता है. सीजन के दौरान यहां से रोजाना 300 से 500 ट्रकों में टमाटर दक्षिण भारत समेत कई बड़े बाजारों में भेजे जाते हैं.

कीमतों में उतार-चढ़ाव की समस्या से जूझ रही टमाटर की खेती

इतने बड़े उत्पादन और व्यापार के बावजूद टमाटर की खेती लंबे समय से कीमतों में उतार-चढ़ाव की समस्या से जूझ रही है. किसान फसल पर भारी निवेश करते हैं, लेकिन कई बार अचानक कीमतें गिर जाने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. कुछ मामलों में किसानों को मजबूरी में टमाटर खेत में छोड़ना पड़ता है या बहुत कम दाम पर बेचना पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज की कमी, पड़ोसी राज्यों से आने वाली अनियमित आवक और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. ऐसे में प्रोसेसिंग यूनिट्स और बेहतर विपणन व्यवस्था किसानों को स्थिर आय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

चार कृषि मंडियां e-NAM प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं

जिला कलेक्टर निशांत कुमार ने कहा है कि टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट्स  की योजना के साथ-साथ किसानों को राहत देने के लिए कई अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं. इनमें मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund), कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार और किसान-से-उपभोक्ता सीधे बिक्री प्रणाली को बढ़ावा देना शामिल है. उन्होंने कहा कि मदनपल्ले, पुंगनूर, कालिकिरी और गुर्रमकोंडा की चार कृषि मंडियां e-NAM प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं. इससे किसानों को ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से अपनी उपज बेचने का अवसर मिलता है. साथ ही, वे स्थानीय बाजारों के अलावा देश के अन्य हिस्सों के खरीदारों तक भी आसानी से पहुंच सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है.

 

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