यूपी के आम ने समुद्र के रास्ते रचा इतिहास, 25 दिन बाद भी दुबई पहुंचा ताजा, किसानों की कमाई बढ़ने की उम्मीद

Mango Export: उत्तर प्रदेश के अमरोहा से भेजी गई 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप सफलतापूर्वक दुबई पहुंच गई. करीब 25 दिन की यात्रा के बाद भी 90 फीसदी आम बिक्री योग्य मिले. इस सफलता से समुद्री मार्ग से आम निर्यात सस्ता होगा.

नोएडा | Published: 23 Jul, 2026 | 12:18 PM

UP Mango Export: उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. पहली बार अमरोहा से भेजी गई 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम की व्यावसायिक खेप समुद्री रास्ते से सफलतापूर्वक दुबई पहुंची है. सबसे खास बात यह रही कि खेत से बाजार तक करीब 25 दिन का सफर तय करने के बावजूद लगभग 90 प्रतिशत आम अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में मिले. इस सफलता से अब यह उम्मीद बढ़ गई है कि महंगे हवाई परिवहन की बजाय समुद्री रास्ते से भी भारतीय आमों को विदेश भेजा जा सकेगा, जिससे किसानों और निर्यातकों दोनों को फायदा होगा.

वैज्ञानिक तकनीक और सही योजना से मिली सफलता

आमों की यह खेप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा तय किए गए विशेष समुद्री निर्यात नियमों के तहत भेजी गई. अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट ने अटाशी ग्लोबल के सहयोग से ये आम दुबई भेजे, जहां इन्हें लुलु ग्रुप की रिटेल स्टोर्स तक पहुंचाया गया. इस पूरी प्रक्रिया में आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी मदद दी, जबकि एपीडा ने निर्यात से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं और दूसरी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई.

कटाई के बाद अपनाई गई खास तकनीक

आमों की तुड़ाई 22 जून 2026 को की गई थी. इसके बाद फलों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया ताकि लंबी यात्रा के दौरान उनकी क्वालिटी बनी रहे. इसके लिए ICAR-CISH द्वारा विकसित METWASH तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे आमों की शेल्फ लाइफ बढ़ाई गई. इसके बाद फलों की ग्रेडिंग, पैकिंग और कोल्ड चेन व्यवस्था के तहत उन्हें 40 फीट के रीफर कंटेनर में रखकर समुद्री मार्ग से दुबई भेजा गया.

25 दिन बाद भी 90 प्रतिशत आम बिकने लायक

मौसम संबंधी कारणों से खेप को दुबई पहुंचने में लगभग 25 दिन लग गए. इसके बावजूद जांच में पाया गया कि करीब 90 प्रतिशत आम पूरी तरह बाजार में बेचने योग्य थे. यह सफलता बताती है कि, अगर वैज्ञानिक तरीके से पैकिंग और लगातार कोल्ड चेन का पालन किया जाए, तो समुद्री रास्ते से भी आमों को सुरक्षित विदेश भेजा जा सकता है.

किसानों की आय में होगा सीधा फायदा

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ आम उत्पादकों को मिलने की उम्मीद है. हवाई मार्ग की तुलना में समुद्री परिवहन काफी सस्ता होता है, जिससे निर्यात की लागत कम हो जाती है. कम लागत का फायदा किसानों तक भी पहुंचा. जानकारी के अनुसार, इस मॉडल से किसानों को करीब 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक अतिरिक्त कीमत मिलने की संभावना बनी है. इससे उनकी आय बढ़ सकती है और निर्यातकों को भी प्रतिस्पर्धी कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार करने का मौका मिलेगा.

खाड़ी देशों में बढ़ेगा यूपी के आम का बाजार

यह उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आम की पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप मानी जा रही है. इसकी सफलता से अब खाड़ी देशों सहित दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी समुद्री रास्ते से आम भेजने का भरोसा बढ़ेगा. अगर इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया गया, तो लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा, भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश समेत देश के दूसरे आम उत्पादक राज्यों के किसानों को भी बेहतर दाम मिल सकेंगे. यह पहल भारतीय आमों के निर्यात को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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