UP की देसी गायों का दूध बना सेना की पहली पसंद, डेनमार्क तकनीक से तैयार ‘स्कॉयर’ से जवान बन रहे भौलादी

उत्तर प्रदेश ने देसी गायों के दूध से बने उच्च प्रोटीन डेयरी उत्पादों की आपूर्ति भारतीय सेना को शुरू की है. ‘स्कायर’ और ‘स्कायरअप’ जैसे उत्पाद गिर और साहीवाल नस्लों के दूध से डेनमार्क-आइसलैंड तकनीक से तैयार किए जा रहे हैं. यह पहल गोसंरक्षण, ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भर डेयरी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, साथ ही सेना में तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 13 Jun, 2026 | 10:00 PM

उत्तर प्रदेश ने देसी गायों के दूध से बने उच्च प्रोटीन वाले डेयरी उत्पादों की आपूर्ति भारतीय सेना को शुरू कर दी है. इस पहल के तहत स्कायर (Skyr) सहित कई विशेष डेयरी उत्पाद सेना तक पहुंचाए जा रहे हैं. यह कार्यक्रम गोसंरक्षण, ग्रामीण रोजगार, दूध उत्पादन और आत्मनिर्भर डेयरी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. इन उत्पादों को मुख्य रूप से गिर और साहीवाल जैसी देसी नस्लों के दूध से तैयार किया जा रहा है, जिसमें डेनमार्क और आइसलैंड की आधुनिक डेयरी तकनीक का भी उपयोग किया गया है. यह उत्पाद अपनी उच्च पोषण क्षमता और स्वास्थ्य लाभों के कारण भारतीय सेना के जवानों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

स्कायर एक उच्च प्रोटीन और कम वसा वाला डेयरी उत्पाद है, जिसे पारंपरिक रूप से आइसलैंड से जोड़ा जाता है. यह एक तरह का फर्मेंटेड (संवर्धित) दूध उत्पाद है, जो अपने स्वाद और पोषण के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहा है. उत्तर प्रदेश में इस उत्पाद को आधुनिक तकनीक की मदद से तैयार किया जा रहा है और इसे ‘स्कायरअप’ (Skyrrup) नाम से बाजार में उतारा गया है. इसे भारतीय डेयरी  जरूरतों के हिसाब से विकसित किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर पोषण और गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल सके.

गाय आधारित आर्थिक मॉडल विकसित

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेस्राम ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने गाय आधारित एक आर्थिक मॉडल विकसित किया है. यह मॉडल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि देसी गायों के संरक्षण और मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों के उत्पादन में राज्य के प्रयासों से किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण समुदायों के लिए नए अवसर बन रहे हैं. साथ ही इससे डेयरी क्षेत्र को भी मजबूती मिल रही है.

इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी का अहम योगदान

इस पहल में प्रयागराज के इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी का भी अहम योगदान है. उन्होंने नोएडा में एक आधुनिक डेयरी सुविधा स्थापित की है, जहां 250 से अधिक देसी गायें रखी गई हैं. इनमें गिर और साहीवाल जैसी प्रमुख नस्लें शामिल हैं. इन गायों का दूध पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और इसका उपयोग प्रीमियम डेयरी उत्पाद बनाने में किया जा रहा है. इस सुविधा में स्कायर, ग्रीक योगर्ट, जेलाटो आइसक्रीम, स्कायर पाउडर, योगर्ट पाउडर, पनीर और घी  जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. आधुनिक अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन तकनीक और उन्नत प्रोसेसिंग विधियों की मदद से उच्च प्रोटीन वाले और बेहतर गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद बनाए जा रहे हैं.

500 देसी गायों की क्षमता वाली आधुनिक पशुशाला

वहीं, इस पहल के विस्तार की भी योजना है. इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी अब अलीगढ़ में 500 देसी गायों की क्षमता वाली एक आधुनिक पशुशाला विकसित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें गाय संरक्षण, पशुपालन और डेयरी उद्यमिता के क्षेत्र में और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है. यह पहल पारंपरिक पशुपालन और आधुनिक तकनीक के मेल का एक सफल उदाहरण बनती जा रही है. इसमें देसी गायों की नस्लों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर और अतिरिक्त आय के साधन भी तैयार हो रहे हैं.

इस बीच, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि राज्य की गौ संरक्षण योजनाओं के सकारात्मक और ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिक गौशालाओं, नई डेयरी तकनीकों, डिजिटल मार्केटिंग और नवाचार आधारित गाय-उत्पादों ने उत्तर प्रदेश को डेयरी क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है.

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Published: 13 Jun, 2026 | 10:00 PM

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