गौवंश संरक्षण के लिए बनाई गईं गौशालाएं केमिकल फ्री खेती करने में क्रांतिकारी मदद कर रही हैं. जैविक खाद बनाने से लेकर दूध उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. अब गौशालाओं को बिजली पैदा करने वाला भी बनाया जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में सक्रिय 2000 से अधिक गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट लगाकर ऊर्जा बनाने और उसके स्थानीय इस्तेमाल पर जोर दिया है. वहीं, प्राकृतिक खेती के लिए गायों के गोबर आदि के इस्तेमाल के लिए प्रॉसेसिंग यूनिट लगाई जा रही हैं.
मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने हिनौती गौधाम में बनाए जा रहे दो गौशाला शेड और भूसा हाउस का दौरा किया और भूमि पूजन किया. उन्होंने हिनौती गोधाम में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में कहा कि निर्माणाधीन तीन गौशालाओं का निर्माण पूर्ण कर इनका लोकार्पण कराएं जिससे निराश्रित गौवंश को आश्रय मिल सके. उन्होंने कहा कि राज्य की किसी भी गौशाला में पेयजल, चारा आदि की कमी नहीं होनी चाहिए.
गौशालाओं में तैयार प्राकृतिक खाद किसानों के बेची जाएगी
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिनौती गौधाम को प्राकृतिक खेती के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. इससे मिलने वाली खाद का उपयोग खेती में किया जाएगा. गौधाम में उपयोग के बाद शेष बची प्राकृतिक खाद को आसपास के किसानों को बेचा जाएगा. इससे हिनौती के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र में भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा. प्राकृतिक खेती हमारे जीवन को स्वस्थ रखने के साथ-साथ माटी को भी स्वस्थ रखेगी. धरती माता को स्वस्थ बनाए रखना और भावी पीढ़ी का जीवन सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है.
गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट लगाकर ऊर्जा जरूरत पूरी होगी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिनौती गौधाम में गोबर गैस प्लांट लगाकर इसकी ऊर्जा जरूरत को पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य की सभी गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट लगाए जा रहे हैं, जो गौशालाओं की ऊर्जा और बिजली जरूरत को पूरा करेंगे. राज्य में 2 हजार से ज्यादा गौशालाएं हैं जिनमें 25 लाख से ज्यादा गौवंश संरक्षित हैं. इन गौशालाओं में बड़े पैमाने पर जैविक खाद बनाई जा रही है और अब ऊर्जा बनाने का काम भी शुरू किया गया है.
प्राकृतिक तरीके से उगाई जा रही फसलें देखीं
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रविवार को हरिहर धाम स्थित खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया को देखा. उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है.
केमिकल फ्री खेती में गौशालाओं की अहम भूमिका
उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुंचाता है. राज्य की गौशालाएं प्राकृतिक खेती में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके.