Note: डॉ. एस.के. सिंह बिहार के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा-848125, समस्तीपुर) में पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष एवं पूर्व सह निदेशक अनुसंधान हैं. इन्होंने कृषि क्षेत्र में कई उल्लेखनीय शोध किए हैं.
आम के टिकोले हो रहे गायब? पत्तियों का मुड़ना दे रहा बड़े खतरे का अलर्ट… तुरंत अपनाएं एक्सपर्ट के उपाय
Thrips Control On Mango Farming: मार्च-अप्रैल में आम की फसल पर थ्रिप्स कीट का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, जिससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं और टिकोले झड़ने लगते हैं. समय पर पहचान और सही प्रबंधन जैसे IPM, जैविक उपाय और संतुलित पोषण अपनाकर इस नुकसान को रोका जा सकता है. किसानों के लिए नियमित निगरानी और सही समय पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है.
Mango Cop Protection Tips: मार्च-अप्रैल का समय आम के किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इसी समय पेड़ों पर नई पत्तियां, बौर और छोटे-छोटे टिकोले विकसित होते हैं. लेकिन बदलते मौसम, अचानक तापमान बढ़ना, नमी में उतार-चढ़ाव और हल्की बारिश की वजह से अब एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, आम की पत्तियों का मुड़ना, सिकुड़ना और फलों पर खुरदरे धब्बे दिखना इस बात का संकेत है कि बाग में थ्रिप्स नामक खतरनाक कीट सक्रिय हो चुका है.
थ्रिप्स: दिखने में छोटा, नुकसान में बड़ा
थ्रिप्स बेहद छोटे और तेजी से बढ़ने वाले कीट होते हैं, जो पत्तियों, फूलों और फलों से रस चूसते हैं. इससे पौधे के टिशू कमजोर हो जाते हैं और ग्रोथ रुक जाती है. इनके पनपने के लिए 25-35°C तापमान, अधिक नमी और हल्की बारिश के बाद का मौसम सबसे अनुकूल होता है. यही वजह है कि इन दिनों इनका प्रकोप बढ़ने का खतरा अधिक रहता है.
थ्रिप्स के प्रमुख लक्षण
अगर समय रहते लक्षण पहचान लिए जाएं, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
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- नई पत्तियों का मुड़ना और टेढ़ा-मेढ़ा होना
- टिकोले (छोटे फलों) पर भूरे और खुरदरे धब्बे
- फलों का समय से पहले गिरना
- बौर (फूल) का सूखना
- गंभीर स्थिति में फलों में दरारें पड़ना
एकीकृत कीट प्रबंधन: सबसे कारगर उपाय
थ्रिप्स से बचाव के लिए सिर्फ दवा छिड़कना ही काफी नहीं है. इसके लिए समेकित यानी एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) अपनाना जरूरी है.
खेती और सफाई से करें बचाव
बाग की नियमित सफाई और सही देखभाल से कीटों का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए किसानों को चाहिए कि नवंबर-दिसंबर के दौरान गहरी जुताई करें, जिससे मिट्टी में छिपे कीट नष्ट हो जाएं. साथ ही बाग में पड़ी सूखी पत्तियों और गिरे हुए फलों को समय-समय पर हटाते रहें, क्योंकि ये कीटों के पनपने का मुख्य कारण बनते हैं. इसके अलावा प्रति एकड़ 10-12 नीले स्टिकी ट्रैप लगाना भी बेहद प्रभावी उपाय है, जो कीटों को अपनी ओर आकर्षित कर फंसा लेते हैं और उनकी संख्या कम करने में मदद करते हैं.
जैविक उपाय: सुरक्षित और प्रभावी
कीट नियंत्रण के लिए रासायनिक उपायों के बजाय जैविक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है. इसके तहत नीम आधारित कीटनाशक (Azadirachtin) का छिड़काव करना फायदेमंद होता है, जो कीटों की वृद्धि और प्रजनन को रोकता है. साथ ही ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैविक फंगस का उपयोग करने से हानिकारक कीट प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा लेडीबर्ड बीटल और लेसविंग जैसे लाभकारी कीटों को बचाना भी जरूरी है, क्योंकि ये कीटों के प्राकृतिक दुश्मन होते हैं.
जरूरत पड़ने पर ही करें रासायनिक नियंत्रण
जब कीटों का प्रकोप ज्यादा हो जाए, तब ही वैज्ञानिक तरीके से दवाओं का उपयोग करें.
- शुरुआती अवस्था में स्पिनोसैड का छिड़काव करें
- 10-15 दिन बाद थायमेथोक्साम का प्रयोग करें
- दवाओं को बदल-बदलकर इस्तेमाल करें, ताकि कीटों में प्रतिरोध न बढ़े
- छिड़काव सुबह या शाम के समय ही करें
पोषण और सिंचाई का रखें संतुलन
स्वस्थ और मजबूत पौधे ही कीटों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं, इसलिए उनकी सही पोषण और देखभाल बेहद जरूरी है. इसके लिए संतुलित उर्वरक (NPK) के साथ-साथ जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करें, ताकि पौधों की वृद्धि बेहतर हो सके. साथ ही नियमित सिंचाई करना जरूरी है, लेकिन खेत या बाग में पानी जमा न होने दें, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान हो सकता है.
नियमित निगरानी है सबसे बड़ा हथियार
बाग की लगातार निगरानी करने से समस्या को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है.
- सप्ताह में कम से कम 2 बार निरीक्षण करें
- नई पत्तियों और टिकोले पर खास ध्यान दें
- शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें
बदलते मौसम में बढ़ी चुनौती
जलवायु परिवर्तन के कारण अब थ्रिप्स का जीवनचक्र तेजी से बढ़ रहा है. अनियमित बारिश और तापमान में बदलाव इनके प्रकोप को और बढ़ा सकते हैं. इसलिए किसानों को पहले से तैयार रहना जरूरी है, न कि केवल नुकसान होने के बाद कदम उठाना. आम के पेड़ों में पत्तियों का मुड़ना एक साधारण समस्या नहीं, बल्कि बड़े नुकसान की चेतावनी है. यदि समय रहते थ्रिप्स को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है.