ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बाजार में अडानी की ‘खामोश’ एंट्री क्या इंडस्ट्री के लिए लाएगी तूफान

अडानी की नजर अब ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बाजार पर है. 'हरित अमृत' की बिक्री एक साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी है. जानिए कंपनी की रणनीति क्या है और इससे किसानों व पूरे बाजार पर क्या असर पड़ सकता है.

नोएडा | Updated On: 27 Jun, 2026 | 01:18 PM

बिजनेस के तमाम क्षेत्रों में अपना दबदबा जमाने के बाद अडानी की नजर अब ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर मार्केट पर है. देश में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात करते हुए निजी क्षेत्र की तमाम कंपनियां इस क्षेत्र में हैं. इसी कड़ी में अडानी एंटरप्राइजेज एक और नाम है. कंपनी ने अपने वेस्टटूएनर्जी कारोबार का विस्तार करते हुए हरित अमृतनाम से ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर ब्रैंड बाजार में उतारा है. यह ब्रैंड अभी लॉन्च नहीं हुआ, बल्कि काफी पहले है. लेकिन जिस तरह खामोशी से इसको विस्तार दिया जा रहा है, वो रोचक है.

कंपनी का दावा है कि यह सिर्फ एक नया कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि ऐसा मॉडल है जिसमें कृषि अवशेष और जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर किसानों को बेहतर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा. इससे खेतों की उर्वरता बढ़ाने के साथसाथ पराली और अन्य कृषि अवशेषों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

एक साल में दोगुनी से ज्यादा बिक्री ने खींचा ध्यान

पहले लॉन्च की बात कर लेते हैं. ‘हरित अमृतकी सबसे बड़ी खासियत इसका लॉन्च नहीं, बल्कि बेहद कम समय में इसकी बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता है. अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 20225 में लॉन्च के बाद पहले ही साल हरित अमृत ब्रैंड के तहत 2,000 टन से अधिक ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर की बिक्री हुई. इसके बाद वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात तक अपने नेटवर्क का विस्तार किया और बिक्री दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 4,575 टन पर पहुंच गई. इसी दौरान कंप्रेस्ड बायोगैस  (CBG) की बिक्री भी 730 टन से बढ़कर 1,654 टन हो गई. यह संकेत देता है कि अडानी सिर्फ नया उत्पाद बाजार में नहीं उतार रही, बल्कि अपने बायोमास कारोबार को तेजी से व्यावसायिक स्तर पर विस्तार दे रही है.

क्या संकेत देता है यह आंकड़ा?

ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर  सेक्टर के जानकारों का मानना है कि किसी नए ब्रांड का एक साल में बिक्री दोगुनी से अधिक होना बताता है कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वितरण नेटवर्क भी तेजी से विकसित कर रही है. अडानी समूह की मजबूत लॉजिस्टिक्स क्षमता और पूंजी निवेश की ताकत को देखते हुए आने वाले वर्षों में ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है. इसका असर केवल कीमतों पर ही नहीं, बल्कि उत्पाद की उपलब्धता, ब्रांडिंग और डीलर नेटवर्क पर भी पड़ सकता है.

हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल बड़े निवेश से सफलता तय नहीं होगी. किसानों का भरोसा जीतने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, लगातार उपलब्धता और फसल पर उसके परिणाम सबसे महत्वपूर्ण होंगे. यही वजह है कि अडानी को उन कंपनियों से मुकाबला करना होगा जो वर्षों से जैविक और बायो-फर्टिलाइजर बाजार में काम कर रही हैं.

क्या बदलेगा बाजार का समीकरण?

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे बाजार का समीकरण बदलेगा? विश्लेषकों का कहना है कि अगर अडानी अपने कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर कारोबार को एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करने में सफल रहता है तो यह केवल एक नया ब्रांड लॉन्च नहीं होगा, बल्कि पूरे ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ बिजनेस मॉडल  को व्यावसायिक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है. इससे अन्य बड़े औद्योगिक समूह भी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे आने वाले वर्षों में भारत का ऑर्गेनिक इनपुट बाजार तेजी से विस्तार कर सकता है.

कृषि अवशेष से बन रही है खाद, किसानों को मिल रहा नया विकल्प

अब जानिए कि इस खाद की खासियत क्या है. अडानी समूह की बायोमास इकाई Adani TotalEnergies Biomass Limited (ATBL) के माध्यम से लॉन्च किया गया ‘हरित अमृत’ कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से तैयार किया जा रहा है. कंपनी के अनुसार यह उत्पाद उसके कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों से निकलने वाले फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर से विकसित किया गया है.

कंपनी का मानना है कि इस जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ेगी, जल धारण क्षमता बेहतर होगी और लंबे समय में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.

चार राज्यों में तेजी से बढ़ रहा है कारोबार

रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में अपने बायोमास और सीबीजी कारोबार का विस्तार कर रही है. इन राज्यों में कृषि अवशेषों के बड़े स्तर पर संग्रहण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था विकसित की जा रही है.

कंपनी का लक्ष्य कृषि अवशेषों को खुले में जलाने की बजाय उन्हें ऊर्जा और जैविक खाद  के उत्पादन में इस्तेमाल करना है. इससे एक तरफ स्वच्छ ऊर्जा तैयार होगी तो दूसरी ओर किसानों को जैविक उर्वरक का नया विकल्प भी मिलेगा.

सरकार की प्राथमिकताओं से मेल खाती पहल

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती, सर्कुलर इकोनॉमी और कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग पर लगातार जोर देती रही है. गोबरधन (GOBARdhan) मिशन, SATAT योजना और राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम जैसी योजनाओं का उद्देश्य भी कृषि एवं जैविक कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलना है.

ऐसे में अडानी की यह पहल सरकार की इन्हीं नीतियों के अनुरूप मानी जा रही है. इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने और ऑर्गेनिक इनपुट्स के बाजार के विस्तार की संभावना भी बढ़ेगी.

Published: 27 Jun, 2026 | 12:51 PM

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