केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देश की प्रगति रिपोर्ट आर्थिक सर्वेक्षण जारी करके दी है. कृषि विकास दर बीते दशक के दौरान सर्वाधिक रही है और इसे असाधारण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, केमिकल उर्वरकों के इस्तेमाल से खराब होती खेतों की मिट्टी के साथ ही खाद की बेहतहाशा बढ़ती बिक्री के आंकड़ों ने फिर से फर्टिलाइजर मिशन की घोषणा को हवा दे दी है. दरअसल, बीते कुछ समय से कृषि एक्सपर्ट भी इसको लेकर चिंता जता रहे थे और दलहन मिशन और कपास मिशन की सफलता को देखकर फर्टिलाइजर मिशन लाने की चर्चाएं भी तेज रही हैं. अब सरकारी आंकड़ों ने भी इस चर्चा को हकीकत बनने की उम्मीद बढ़ा दी है.
खाद इस्तेमाल और बिक्री में बेतहाशा बढ़ोत्तरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में देश में फर्टिलाइजर की बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 655.94 लाख टन पर पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 600.79 लाख टन थी. इससे पहले सबसे ज्यादा खाद का इस्तेमाल 2020-21 में 621.91 लाख टन दर्ज किया गया था. इसमें यूरिया की बिक्री 387.92 लाख टन तक पहुंच गई, जो 2023-24 में 357.81 लाख टन से 8.4 फीसदी अधिक दर्ज की गई है. इसी तरह म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) में 33.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर की बिक्री 116.8 लाख टन से बढ़कर 149.72 लाख टन हो गया.
सरकार के पास यूरिया की कीमत बढ़ाने का विकल्प
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 दस्तावेज में यूरिया की रिटेल कीमत में मामूली बढ़ोतरी करने की बात कही गई है, जो मार्च 2018 से 45 रुपये प्रति किलो के बैग के लिए 242 रुपये है और अब तक बदली नहीं गई है. हालांकि, यूरिया की कीमत बढ़ाने के साथ ही किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से बढ़ाई गई रकम सीधे ट्रांसफर करने का सुझाव भी दिया गया है. दस्तावेज में कहा गया है कि इनपुट सब्सिडी से इनकम सपोर्ट में बदलाव का मकसद खाद के इस्तेमाल में तीन दशक पुराने असंतुलन को ठीक करना है, जिससे मिट्टी की क्वालिटी खराब हो रही है और फसल की पैदावार कम हो रही है.
ज्यादा खाद इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही
इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि भारतीय किसानों के जरिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटेशियम (N:P:K) अनुपात 2009-10 में 4:3.2:1 से खराब होकर 2023-24 में 10.9:4.1:1 हो गया है. इसकी वजह सब्सिडी वाले यूरिया के जरिए नाइट्रोजन का ज्यादा इस्तेमाल है. कृषि विज्ञान के मानकों के अनुसार ज्यादातर फसलों और मिट्टी के प्रकारों के लिए यह अनुपात 4:2:1 के करीब होना चाहिए.
टिकाऊ सुधार के लिए मिट्टी और फसल जरूरत पर ध्यान देना होगा
सर्वे ने चेतावनी दी कि ज्यादा नाइट्रोजन मिट्टी के ऑर्गेनिक पदार्थ को खराब करता है, सूक्ष्म पोषक तत्वों को कम करता है, मिट्टी की संरचना को कमजोर करता है और नाइट्रेट को भूजल में मिलाता है. कई सिंचित क्षेत्रों में खाद के इस्तेमाल में बढ़ोतरी के बावजूद पैदावार स्थिर हो गई है या कम हो गई है, जो इनपुट के कम इस्तेमाल के बजाय गलत इस्तेमाल का संकेत देता है. सर्वे में कहा गया है एक ज्यादा टिकाऊ सुधार के लिए खाद पर फैसला लेते हुए मिट्टी और फसल की जरूरतों के हिसाब से इसे फिर से तय करने की आवश्यकता है.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए बजट में फर्टिलाइजर मिशन की घोषणा संभव
खराब होती खेतों की मिट्टी और पैदावार स्थिर होने की चिंताओं के साथ ही फर्टिलाइजर आयात और केमिकल इस्तेमाल को कम करने के लिए सरकार फर्टिलाइजर मिशन की घोषणा बजट (Budget 2026) में कर सकती है. कई मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से फर्टिलाइजर मिशन (Fertilizer Mission 2026) लाने की बात कही गई है. इसके लिए दलहन-तिलहन मिशन और कपास मिशन की सफलता और प्रगति को आधार बताया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसारॉ सरकार आने वाले बजट में फर्टिलाइजर पर मिशन की घोषणा कर सकती है. मिशन में मौजूदा केमिकल फर्टिलाइजर के आयात को 20 फीसदी तक घटाने के लिए बायो फर्टिलाइजर सहित विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन भी शामिल हो सकते हैं. सरकार मिशन के लिए 5 या 10 साल की टाइमलाइन भी तय कर सकती है.