Heat Stroke In Cattle: मई और जून की तेज गर्मी अब सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी बड़ी परेशानी बनती जा रही है. बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं की वजह से गाय और भैंस जैसे मवेशियों में हीट स्ट्रोक यानी लू लगने के मामले बढ़ने लगते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार गर्मियों में पशुपालकों को अपने पशुओं की खास देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पशुओं की सेहत पर भारी पड़ सकती है. खासकर भैंसों में लू लगने का खतरा ज्यादा माना जाता है. अगर समय रहते सही उपाय नहीं किए गए तो पशु गंभीर रूप से बीमार भी हो सकते हैं.
भैंसों में ज्यादा होता है लू लगने का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार गाय के मुकाबले भैंसों को गर्मी ज्यादा परेशान करती है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भैंसों के शरीर से पसीना कम निकलता है, जिससे उनका शरीर जल्दी ठंडा नहीं हो पाता. अगर भैंस लंबे समय तक धूप में रहती है या गर्म हवा वाले बाड़े में बंधी रहती है, तो हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. कई पशुपालक दिन के समय पशुओं को खेतों या खुले स्थानों में छोड़ देते हैं. ऐसे में तेज धूप और गर्म हवाएं पशुओं की हालत खराब कर सकती हैं. पानी की कमी भी लू लगने की बड़ी वजह बनती है. इसलिए गर्मियों में पशुओं को बार-बार साफ और ठंडा पानी देना बेहद जरूरी माना जाता है.
इन लक्षणों से पहचानें कि पशु को लगी है लू
पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर किसी पशु को लू लगती है तो उसके शरीर में कई साफ लक्षण दिखाई देने लगते हैं. पशु तेजी से सांस लेने लगता है और लगातार हांफता रहता है. कई बार उसके मुंह से लार गिरने लगती है और शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. कुछ पशु खाना-पीना छोड़ देते हैं और बेचैन दिखाई देते हैं. गंभीर स्थिति में पशु चक्कर खाकर गिर भी सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर शरीर का तापमान 106 से 108 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच जाए तो स्थिति खतरनाक हो सकती है. ऐसे समय में देरी करना पशु के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत बचाव करना जरूरी होता है.
लू लगने पर तुरंत करें ये आसान उपाय
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसी पशु को लू लग जाए तो सबसे पहले उसे धूप से हटाकर ठंडी और छायादार जगह पर बांधना चाहिए. इसके बाद पशु के सिर, गर्दन और कान पर लगातार पानी डालना या छिड़काव करना चाहिए ताकि शरीर का तापमान कम हो सके. पशु को पंखे या कूलर के सामने रखने से भी राहत मिलती है. इसके अलावा पशु को नमक और गुड़ मिला पानी देना फायदेमंद माना जाता है. लगभग 10 लीटर पानी में थोड़ा नमक मिलाकर पशु को पिलाया जा सकता है. अगर संभव हो तो गुड़ घोलकर देना भी शरीर में ताकत बनाए रखने में मदद करता है. विशेषज्ञ ओआरएस घोल देने की भी सलाह देते हैं ताकि शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी पूरी हो सके. हालांकि हालत ज्यादा खराब होने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी होता है.
गर्मियों में पशुपालकों को रखनी होगी खास सावधानी
पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल का तरीका बदलना जरूरी होता है. दोपहर की तेज धूप में पशुओं को बाहर नहीं छोड़ना चाहिए. बाड़े में हवा आने-जाने की सही व्यवस्था होनी चाहिए ताकि गर्म हवा सीधे पशुओं तक न पहुंचे. पशुओं को दिन में कई बार पानी पिलाना चाहिए और समय-समय पर उन्हें नहलाना भी फायदेमंद हो सकता है. अगर पशुपालक छोटी-छोटी सावधानियां अपनाएं तो पशुओं को लू, कमजोरी और गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ पशु ही अच्छी दूध उत्पादन क्षमता बनाए रखते हैं. इसलिए गर्मियों में पशुओं की सुरक्षा और देखभाल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देना जरूरी है.