ग्रामीण संकट और खाद्य महंगाई का खतरा? AIKS ने खाद स्टॉक और फसल पैदावार पर चेताया

Fertlizer stock and price : किसानों के संगठन AIKS ने खाद की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी कका विरोध किया है और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. संगठन ने कहा है कि कई राज्यों में खरीफ सीजन से पहले ही खाद की कमी देखी जा रही है और खुदरा कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 20 May, 2026 | 12:28 PM

किसानों के संगठन अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने खाद की कीमतों में कथित बढ़ोतरी पर आपत्ति जताई और केंद्र और राज्य सरकारों पर कालाबाज़ारी और जमाखोरी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. संगठन ने चेतावनी दी कि खाद की अपर्याप्त उपलब्धता से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है, ग्रामीण संकट गहरा सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. संगठन ने बयान में कहा कि पूरे देश में किसान कृषि मौसम शुरू होने से पहले ही मुख्य खादों की बाजार कीमतों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे हैं.

खाद के दाम में 33 फीसदी बढ़ोत्तरी का दावा

CPI(M) से जुड़े किसानों के संगठन अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने जारी बयान में आरोप लगाया है कि म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) खाद की खुदरा कीमत पिछले सीजन के 1500 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 1800-2000 रुपये प्रति बोरी हो गई है. केरल के कुट्टनाड, कोट्टायम और पलक्कड़ जैसे कृषि क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 20 से 33 फीसदी तक दर्ज की गई है. इसी तरह फैक्टमफॉस (NPK) की कीमत भी पिछले सीजन के 1425 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 1750-1900 रुपये प्रति बोरी हो गई है, जो 22 से 33 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाती है.

AIKS ने खाद के दाम में बढ़ोत्तरी की कई वजहें बताईं

AIKS के अध्यक्ष अशोक धावले और महासचिव वीजू कृष्णन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के चलते शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में आई रुकावटों को बताया. संगठन ने कहा कि इन रुकावटों की वजह से खाद बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात पर असर पड़ा है. संगठन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, खासकर आयातित अमोनिया और कच्चे सल्फर की कीमतों में इजाफे का बोझ डीलरों और किसानों पर डाल दिया गया है. संगठन ने आगे आरोप लगाया कि बड़े व्यापारी और निजी डीलर जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं, जिससे किसानों को खाद ऊंची कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सरकार पर कॉरपोरेट और बिचौलियों को बढ़ावा देने का आरोप

AIKS के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों को खाद की कमी, कीमतों में बढ़ोतरी और अवैध रूप से ज्यादा पैसे वसूले जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. दावा किया कि कागजों पर तो खाद की कीमतें में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन खुदरा स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की खबरें हर जगह से आ रही हैं. इसने केंद्र और राज्य सरकारों पर जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, और इसके बजाय कॉर्पोरेट व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा मुनाफाखोरी को बढ़ावा देने की बात कही.

फसल पैदावार घटने का संकट और खाद्य सुरक्षा पर खतरे की चिंता

किसान संगठन ने AIKS कहा कि जो किसान इन बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं, वे जरूरी खादों का इस्तेमाल करना छोड़ रहे हैं. किसान सभा के बयान में कहा गया है कि कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इस चलन से फसल की पैदावार कम हो सकती है और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक संकट और गहरा सकता है. कहा गया है कि अगर खाद की समय पर उपलब्धता नहीं रही तो फसलों की ग्रोथ प्रभावित होगी और उत्पादन घटने के साथ ही क्वालिटी पर बुरा असर पड़ेगा, जो सिर्फ किसानों को ही नहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्थ और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़