बारिश और बिजली के मौसम में पशुओं को बचाना जरूरी, लापरवाही से हो सकता है बड़ा नुकसान

बरसात और गरज-चमक के मौसम में पशुओं पर वज्रपात का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खराब मौसम में पशुओं को खुले मैदान और पेड़ों के नीचे न रखें. समय रहते सुरक्षित आश्रय में ले जाना ही जान और नुकसान दोनों से बचाव का सबसे आसान तरीका है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Apr, 2026 | 11:30 PM

Livestock Protection: बरसात का मौसम आते ही खेतों में हरियाली जरूर बढ़ती है, लेकिन इसके साथ आसमान से गिरने वाली बिजली यानी खराब मौसम का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है. इंसानों के साथ-साथ पशु भी इसकी चपेट में आकर जान गंवा सकते हैं. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने राहत आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश सरकार की एडवाइजरी के आधार पर पशुपालकों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी है. विभाग का कहना है कि थोड़ी सी समझदारी से गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. राज्य हेल्पलाइन नंबर भी ऐसी आपदा में तुरंत मदद के लिए सक्रिय है.

क्यों बढ़ जाता है पशुओं पर वज्रपात का खतरा?

आम तौर पर तेज बारिश, गरज और चमक के समय पशु खुले मैदान  में घबराकर किसी बड़े पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो जाते हैं. यही उनकी सबसे बड़ी गलती बन जाती है. राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, बिजली अक्सर ऊंची चीजों पर गिरती है, इसलिए पेड़ के नीचे खड़े पशु सीधे खतरे में आ जाते हैं. कई बार बिजली गिरने से पेड़ टूटकर नीचे गिर जाता है, जिससे पशु दब सकते हैं. इतना ही नहीं, बिजली से आग लगने की आशंका भी रहती है, जिससे गोशाला के आसपास सूखा चारा, भूसा और लकड़ी तुरंत आग पकड़ सकते हैं.

मौसम बिगड़ते ही सबसे पहले करें यह काम

पशुपालन विभाग की सलाह है कि जैसे ही मौसम खराब दिखे, तेज बादल गरजें या बिजली चमकने लगे, पशुओं को तुरंत खुले खेत, चारागाह या पेड़ों के नीचे से हटाकर पक्के या सुरक्षित शेड में ले जाएं. अगर आपके पास टीन शेड, पक्का कमरा या मजबूत गोशाला है तो वही सबसे सुरक्षित जगह है. कोशिश करें कि पशु बंधे हुए तार, बिजली के खंभों, मोटर, बोरिंग या लोहे की जाली के पास न रहें. गांवों में कई किसान पशुओं को खुले में खूटे से बांध देते हैं, लेकिन वज्रपात के समय यह आदत बहुत खतरनाक साबित हो सकती  है.

पेड़ के नीचे नहीं, सुरक्षित आश्रय में रखें पशु

विभाग ने साफ कहा है कि गरज-चमक के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे  बिल्कुल न बांधें. अक्सर किसान सोचते हैं कि पेड़ बारिश से बचा लेगा, लेकिन वज्रपात में यही सबसे बड़ा जोखिम बन जाता है. सुरक्षित आश्रय का मतलब ऐसी जगह से है जहां छत मजबूत हो, पानी जमा न होता हो और आसपास बिजली के खुले तार न हों. गोशाला में सूखा फर्श, पर्याप्त जगह और हवा का इंतजाम भी जरूरी है ताकि पशु घबराएं नहीं. यदि आपके यहां बड़े पशु अधिक हैं, तो उन्हें एक साथ बहुत सटाकर न रखें, बल्कि थोड़ा फासला देकर बांधें. इससे किसी एक हादसे में बड़े नुकसान की आशंका कम होती है.

हादसा होने पर तुरंत करें यह काम

अगर दुर्भाग्य से किसी पशु पर बिजली गिर जाए या वह बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले खुद सुरक्षित रहें. बारिश और बिजली रुकने से पहले पशु को छूने की जल्दबाजी न करें. तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक, पशुपालन विभाग के कर्मचारी या ब्लॉक स्तर के डॉक्टर को सूचना दें. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की आपदा हेल्पलाइन 1070 पर कॉल करके जानकारी दें, ताकि राहत और आगे की कार्रवाई समय पर हो सके. राहत आयुक्त कार्यालय ने इस नंबर को राज्य स्तरीय हेल्पलाइन के रूप में जारी किया है.

पशुपालन विभाग के अनुसार, पशु सिर्फ किसान की संपत्ति  नहीं, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का सबसे बड़ा सहारा होते हैं. ऐसे में वज्रपात के समय थोड़ी सतर्कता किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचा सकती है. मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखें, पशुओं को खुले में न छोड़ें और समय रहते उन्हें सुरक्षित जगह पहुंचाएं. यही समझदारी आपके पशुधन और कमाई दोनों को सुरक्षित रखेगी.

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Published: 2 Apr, 2026 | 11:30 PM
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