आंध्र प्रदेश में कम बारिश की वजह से कृषि क्षेत्र पर संकट गहराता जा रहा है. राज्य में सामान्य से 52.7 फीसदी कम बारिश हुई है. इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ा है. ऐसे किसान सरकार से तुरंत विशेष सूखा राहत पैकेज देने की मांग कर रहे हैं. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में अब तक सिर्फ 18.9 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की खेती हुई है, जबकि सामान्य लक्ष्य 30.84 लाख हेक्टेयर है. यानी सामान्य क्षेत्र के मुकाबले करीब 61 फीसदी ही बुवाई हो पाई है. इसकी तुलना में देश में खरीफ बुवाई 95.67 फीसदी और पड़ोसी तेलंगाना में 88 फीसदी तक पहुंच चुकी है.
धान की बुवाई आंध्र प्रदेश में सामान्य क्षेत्र के 62 फीसदी तक ही हुई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 98.32 फीसदी और तेलंगाना में 74 फीसदी है. दलहन की बुवाई 70 फीसदी रही, जबकि देश में यह 91.9 फीसदी और तेलंगाना में 117 फीसदी है. कपास की बुवाई राज्य में सामान्य क्षेत्र के 75 फीसदी तक हुई है. वहीं, देश में यह 86.4 फीसदी और तेलंगाना में 102 फीसदी है. साथ ही मक्का की बुवाई 61 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 110.82 फीसदी और तेलंगाना में 94 फीसदी है.
आंध्र में मूंगफली की बुवाई सबसे पिछड़ी
मूंगफली की स्थिति सबसे खराब है. आंध्र प्रदेश में इसकी बुवाई सामान्य क्षेत्र के सिर्फ 34 फीसदी में हुई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 104 फीसदी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस मॉनसून सीजन में देशभर में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं, आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी 52.7 फीसदी तक पहुंच गई है. यह किसी बड़े राज्य में दर्ज सबसे ज्यादा बारिश की कमी में शामिल है.
कम बारिश से खेती पर बढ़ा संकट
अन्य राज्यों की बात करें तो बिहार में 40 फीसदी, कर्नाटक में 30 फीसदी और पंजाब में 28 फीसदी बारिश कम हुई है. आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी का सीधा असर खेती और खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है. आंध्र प्रदेश में कम बारिश और खेती में देरी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि कम उत्पादन और खराब फसल के कारण किसानों की आय घट रही है. ऐसे में किसान सरकार से तुरंत सीधी आर्थिक मदद और लंबित सहायता राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं.
सिर्फ राहत पैकेज का ऐलान काफी नहीं
आंध्र प्रदेश कृषि मिशन के पूर्व उपाध्यक्ष एमवीएस नागिरेड्डी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि सिर्फ राहत पैकेज की घोषणा करना काफी नहीं है. सरकार को किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देनी चाहिए और उनकी लंबित मदद जल्द जारी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गोदावरी और पेन्ना डेल्टा क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के लगभग पूरे कृषि क्षेत्र पर सूखे का असर है. लंबे समय से बारिश नहीं होने, भूजल स्तर गिरने, बुवाई में देरी और फसलों को नुकसान से किसान परेशान हैं.
इन जिलों में फसलों पर सूखे की सबसे ज्यादा मार
अनंतपुर, श्री सत्य साईं, कुरनूल, नंद्याल, वाईएसआर कडपा और पलनाडु जिलों में मूंगफली, दलहन, कपास, मक्का और मोटे अनाज की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. वहीं, किसान संगठनों ने कृष्णा डेल्टा के किसानों को धान की जगह दूसरी फसलें उगाने की सरकार की सलाह पर भी सवाल उठाए हैं. आंध्र प्रदेश के कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में अब तक करीब 1.21 लाख हेक्टेयर में खेती हुई है, जो सामान्य क्षेत्र का 74 फीसदी है. इसमें अकेले धान की खेती 1.19 लाख हेक्टेयर में हुई है. यह धान के सामान्य क्षेत्र का 98.36 फीसदी है.