Arhar Crop Care: अरहर में दाना भरते ही करें ये जरूरी स्प्रे, दाने बनेंगे मोटे, चमकदार और वजनदार

अरहर की फसल में दाना भरने का समय सबसे अहम होता है. इस दौरान सही उर्वरक, संतुलित नमी और कीट नियंत्रण जरूरी है. थोड़ी सी लापरवाही से दाने पिचके रह सकते हैं. अगर किसान समय पर स्प्रे और देखभाल करें, तो उपज में अच्छी बढ़ोतरी और बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है.

नोएडा | Updated On: 22 Feb, 2026 | 07:08 PM

Arhar Farming Tips: अरहर की फसल जब फूल और फलियों से भरने लगती है, तभी असली परीक्षा शुरू होती है. यही वह समय है जो तय करता है कि खेत से औसत पैदावार मिलेगी या रिकॉर्ड उत्पादन. अगर इस स्टेज पर सही पोषण और देखभाल मिल जाए, तो दाने मोटे, चमकदार और अच्छे वजन के बनते हैं. थोड़ी सी लापरवाही से दाने पिचके भी रह सकते हैं. इसलिए किसान इस समय खास सावधानी बरतें.

दाना भरने की अवस्था है सबसे अहम

इस समय अरहर की फसल  दाना भरने की अवस्था में होती है. यानी फलियों के अंदर दाने बन रहे होते हैं. यही चरण पैदावार तय करता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पोटाश और सल्फर की खास जरूरत होती है. पोटाश दानों को मजबूत और सुडौल बनाता है. साथ ही पौधे की रोग से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. वहीं सल्फर दानों की गुणवत्ता सुधारता है और प्रोटीन की मात्रा बेहतर करता है.अगर बुवाई के समय ये पोषक तत्व नहीं डाले गए हों, तो अब तरल उर्वरक का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है. इससे पौधे को तुरंत पोषण मिलता है और दाने तेजी से विकसित होते हैं.

एनपीके और बोरॉन का सही इस्तेमाल

जब फलियों में दाना  बनने लगे, तब एनपीके 0:52:34 का एक किलो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसमें मौजूद फास्फोरस दानों को मजबूती देता है और पोटेशियम उनकी चमक बढ़ाता है. इससे उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इसके साथ ही 20 प्रतिशत बोरॉन 250 ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें. इससे दाने फटते नहीं हैं और पूरा वजन पकड़ते हैं. फलियों में दाने अच्छे से भरते हैं और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं.

नमी और कीट नियंत्रण का रखें ध्यान

दाना बनते समय खेत में नमी का संतुलन बहुत जरूरी है. अगर मिट्टी में दरारें पड़ जाएं या पानी की कमी हो, तो दाने छोटे और पिचके रह सकते हैं. हल्की सिंचाई करें, लेकिन पानी जमा न होने दें. जलभराव से जड़ें कमजोर हो सकती हैं. इस समय फली छेदक कीट बड़ा खतरा होता है. इल्लियां फलियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. बचाव के लिए समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें. जो किसान जैविक तरीका अपनाना चाहते हैं, वे समुद्री शैवाल अर्क या अमीनो एसिड टॉनिक का उपयोग कर सकते हैं.

सही समय पर कटाई भी जरूरी

अच्छी पैदावार के लिए कटाई का समय  भी सही होना चाहिए. जब करीब 80 प्रतिशत फलियां भूरी हो जाएं, तभी कटाई करें. कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाएं, लेकिन बहुत तेज धूप में ज्यादा देर न रखें. ज्यादा धूप से दानों की चमक कम हो सकती है. भंडारण भी सही तरीके से करें, ताकि दानों का वजन और गुणवत्ता बनी रहे. साफ और सूखी जगह पर स्टोर करने से बाजार तक दाने सुरक्षित रहते हैं.

Published: 23 Feb, 2026 | 06:00 AM

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