एक बार लगाएं पौधे और कई साल तक कमाएं पैसा, सरकार भी दे रही है इसकी फसल पर मदद

तेज पत्ता की खेती को किसानों के लिए कम जोखिम और ज्यादा मुनाफे वाली खेती माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बार-बार नई फसल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. एक बार पौधा तैयार होने के बाद कई सालों तक उससे उत्पादन लिया जा सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 8 May, 2026 | 08:33 AM

Bay leaf farming: भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला तेज पत्ता सिर्फ खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए कमाई का शानदार जरिया भी बनता जा रहा है. मसाले और औषधीय गुणों से भरपूर तेज पत्ते की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर तेज पत्ता की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऐसी फसल है जिसमें लागत कम आती है और लंबे समय तक लगातार आमदनी मिलती रहती है. एक बार पौधे तैयार हो जाएं तो कई सालों तक उनसे पत्तों की कटाई की जा सकती है. यही कारण है कि इसे किसानों के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है.

क्यों बढ़ रही है तेज पत्ते की मांग?

तेज पत्ता भारतीय मसालों का एक अहम हिस्सा है. इसका इस्तेमाल दाल, सब्जी, पुलाव, बिरयानी और कई दूसरे व्यंजनों में किया जाता है. इसके अलावा आयुर्वेद में भी तेज पत्ते का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है. इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. माना जाता है कि तेज पत्ता पाचन सुधारने, शरीर की सूजन कम करने और कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है.

भारत के अलावा फ्रांस, इटली और बेल्जियम जैसे देशों में भी तेज पत्ते का उत्पादन और उपयोग काफी ज्यादा होता है.

किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह खेती?

तेज पत्ता की खेती को किसानों के लिए कम जोखिम और ज्यादा मुनाफे वाली खेती माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बार-बार नई फसल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. एक बार पौधा तैयार होने के बाद कई सालों तक उससे उत्पादन लिया जा सकता है. इसके पौधों को ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं होती, जिससे खेती का खर्च कम हो जाता है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए किसानों को फसल बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती.

सरकार भी दे रही आर्थिक मदद

सरकार भी किसानों को औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है. राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से तेज पत्ता की खेती पर किसानों को 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक तेज पत्ता के एक पौधे से सालाना 3 हजार से 5 हजार रुपये तक की कमाई हो सकती है. यानी अगर किसान केवल 25 पौधे भी लगाते हैं तो वे एक लाख रुपये से ज्यादा की आय प्राप्त कर सकते हैं.

एक हेक्टेयर से कितनी हो सकती है कमाई?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एक हेक्टेयर जमीन में तेज पत्ता की खेती करके किसान सालाना 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं. जैसे-जैसे पौधे पुराने और मजबूत होते जाते हैं, वैसे-वैसे पत्तों का उत्पादन भी बढ़ता जाता है. इससे किसानों की आमदनी में लगातार बढ़ोतरी होती रहती है.

किन इलाकों में अच्छी होती है खेती?

तेज पत्ता की खेती के लिए किसी खास तरह की जलवायु की जरूरत नहीं होती. यह सामान्य भारतीय मौसम में भी आसानी से उग जाता है. हल्की ठंड और मध्यम गर्मी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती अच्छी मानी जाती है. पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में इसे उगाया जा सकता है. ऐसी जमीन जहां पानी का जमाव न हो, वहां तेज पत्ता के पौधे तेजी से बढ़ते हैं.

कैसे शुरू करें तेज पत्ता की खेती?

अगर किसान तेज पत्ता की खेती शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें अच्छी जमीन का चयन करना चाहिए. खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी होता है ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए. इसके बाद खेत में गोबर की सड़ी खाद मिलानी चाहिए. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है.

तेज पत्ता के पौधे नर्सरी से खरीदे जा सकते हैं. किसान चाहें तो बीज से भी पौधे तैयार कर सकते हैं, लेकिन नर्सरी वाले पौधे जल्दी तैयार हो जाते हैं.

सिंचाई में कम खर्च

तेज पत्ता की खेती की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती. गर्मियों में 15 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना पर्याप्त माना जाता है. वहीं सर्दियों में महीने में केवल एक बार पानी देने से भी पौधे अच्छी तरह बढ़ते रहते हैं. इस वजह से पानी की कमी वाले इलाकों में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है.

रोग और कीट का खतरा कम

तेज पत्ता के पौधे सामान्य तौर पर काफी मजबूत माने जाते हैं. इनमें कीट और रोग का असर कम देखने को मिलता है. फिर भी विशेषज्ञ समय-समय पर जैविक कीटनाशकों के उपयोग की सलाह देते हैं ताकि पौधे स्वस्थ बने रहें और उत्पादन अच्छा मिले.

कब शुरू होती है कटाई?

तेज पत्ता के पौधों से लगभग 2 से 3 साल के भीतर पत्तों की कटाई शुरू की जा सकती है. कटाई के बाद पत्तों को छांव में सुखाया जाता है ताकि उनकी खुशबू और गुणवत्ता बनी रहे. सूखने के बाद इन्हें बाजार में अच्छे दाम पर बेचा जा सकता है.

बाजार में हमेशा रहती है मांग

मसाले, दवा और खाद्य उद्योग में लगातार इस्तेमाल होने की वजह से तेज पत्ते की मांग कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती. देश के बड़े शहरों के अलावा विदेशों में भी इसकी अच्छी कीमत मिलती है. यही वजह है कि यह खेती किसानों के लिए लंबे समय तक कमाई का मजबूत जरिया बनती जा रही है.

पारंपरिक खेती का अच्छा विकल्प

आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है और कई पारंपरिक फसलों में किसानों को अच्छा मुनाफा नहीं मिल पा रहा, तब तेज पत्ता की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है.

कम लागत, कम पानी, कम देखभाल और लंबे समय तक होने वाली कमाई इसे किसानों के लिए फायदे वाली फसल बनाती है. अगर सही तरीके से इसकी खेती की जाए तो किसान अच्छी आय के साथ अपने भविष्य को भी सुरक्षित बना सकते हैं.

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