इस राज्य में किसानों को 3 करोड़ रुपये एकड़ मिलेगा मुआवजा, मुख्यमंत्री ने किया ऐलान

कर्नाटक सरकार ने बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए किसानों को जमीन के बदले 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का ऐलान किया है. इसके बाद दूसरे जिलों के किसान भी इसी दर की मांग कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा जमीन की लोकेशन, गाइडेंस वैल्यू, प्रोजेक्ट की जरूरत और किसानों की सहमति के आधार पर तय होगा.

नोएडा | Published: 11 Aug, 2026 | 01:49 PM

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के बदले किसानों को 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की घोषणा की है. इसके बाद राज्य के दूसरे इलाकों के किसान भी भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण के लिए इसी दर से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि पिछली सरकार जमीन के लिए 25 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देती थी, जबकि मौजूदा सरकार ने इसे बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दिया है. जो किसान यह मुआवजा नहीं लेना चाहते, उन्हें विकसित जमीन का 50 फीसदी हिस्सा देने का विकल्प भी मिलेगा.

हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जमीन का मुआवजा उसकी लोकेशन और परियोजना को लागू करने की जरूरत जैसे कई मानकों के आधार पर तय किया जाता है. बिदादी में प्रस्तावित AI-City प्रोजेक्ट के लिए उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित करने के सरकार के फैसले से किसान नाराज हैं. किसान नेता कुरुबुरु शांताकुमार ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सरकार ने पहले तय किया था कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए उपजाऊ या कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद बिदादी की उपजाऊ जमीन ली जा रही है.

बिदादी की तर्ज पर मुआवजे की मांग

उन्होंने कहा कि सरकार को भविष्य की विकास परियोजनाओं  के लिए पूरे राज्य में बिदादी की तर्ज पर मुआवजा तय करना चाहिए. तुमकुरु, अनेकल, पावगड़ा और बल्लारी जैसे इलाकों में जमीन अधिग्रहण होने पर भी किसानों को 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा मिलना चाहिए. राजस्व, उद्योग और आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिदादी में तय 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की दर पूरे राज्य में लागू नहीं की जा सकती. एक अधिकारी के मुताबिक, बिदादी प्रोजेक्ट की जरूरत, उसकी तात्कालिकता और बेंगलुरु से नजदीकी को देखते हुए मुआवजा तय किया गया है.

किसानों ने जमीन देने से किया इनकार

अधिकारी ने कहा कि पहले जमीन अधिग्रहण के लिए 1984 के कानून के आधार पर मुआवजा तय होता था. अब 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का पालन किया जा रहा है. इस कानून के तहत आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट में जमीन मालिकों को जमीन की गाइडेंस वैल्यू का तीन गुना मुआवजा दिया गया था. बिदादी में इसके अलावा ‘कंसेंट अवॉर्ड’ का प्रावधान भी जोड़ा गया है. इसमें किसान और सरकार अपनी-अपनी मुआवजा राशि बताते हैं और दोनों की सहमति से अंतिम रकम तय की जाती है. किसान नेता कुरुबुरु शांताकुमार ने कहा कि बिदादी के किसानों ने जमीन के लिए कोई मुआवजा राशि  नहीं बताई है और वे अपनी जमीन देने के इच्छुक भी नहीं हैं. इसके बावजूद सरकार ने एक एकड़ जमीन के लिए 3 करोड़ रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

हर प्रोजेक्ट में 3 करोड़ मुआवजा संभव नहीं

एक अधिकारी के मुताबिक, बिदादी बेंगलुरु के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, इसलिए यहां ज्यादा मुआवजा दिया जा रहा है. मेकेदाटु और दूसरे एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में भी ऐसी व्यवस्था संभव है. हालांकि, दूसरे जिलों में जमीन और गाइडेंस वैल्यू कम होने के कारण इतनी राशि देना मुश्किल हो सकता है. मुआवजा किसानों की मांग और सरकार की सहमति पर भी निर्भर करेगा.

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