गेहूं-धान नहीं! किसान करें ‘ग्रीन गोल्ड’ की खेती, सरकार दे रही 60,000 रुपये की मदद, जानें आवेदन का पूरा तरीका
Bans Ki Kheti: खेती में मुनाफा बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने बांस की खेती को बढ़ावा देने की बड़ी पहल की है. राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को कुल लागत का 50 फीसदी यानी 60 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी. बांस की फसल 3-5 साल में तैयार हो जाती है और इसके बाद लंबे समय तक उत्पादन देती है. फर्नीचर, कागज और निर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण बाजार की कोई कमी नहीं है.
Bamboo Farming: खेती में बढ़ती लागत और मौसम की मार से परेशान किसानों के लिए अब एक राहत भरी खबर है. बिहार सरकार (Bihar Government) बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 60 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रही है. कम लागत, कम पानी और लंबे समय तक कमाई देने वाली बांस की खेती अब किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है.
सरकार का मानना है कि बांस की खेती से न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि खेती से जुड़ा जोखिम भी कम होगा और गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे. खास बात यह है कि बांस की फसल सूखा हो या ज्यादा बारिश, हर हाल में टिकाऊ साबित होती है.
बांस की खेती पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?
बिहार सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन योजना (National Bamboo Mission) के तहत बांस की खेती पर कुल लागत का 50 फीसदी खर्च खुद उठाएगी. कृषि विभाग के मुताबिक, एक हेक्टेयर में बांस की खेती पर करीब 1.20 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसमें से किसानों को 60 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी. इससे खेती शुरू करने का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाता है.
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किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं. किसान के पास खेती की जमीन अपने नाम होनी चाहिए और जमीन से जुड़े वैध कागजात जरूरी हैं. घनी बांस खेती के लिए कम से कम 0.04 हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए, जबकि अधिकतम 0.20 हेक्टेयर तक ही खेती की अनुमति है. खेत की मेड़ पर बांस लगाने वाले किसानों को कम से कम 10 पौधे लगाने होंगे. अच्छी बात यह है कि एक ही परिवार में पति-पत्नी दोनों अलग-अलग जमीन पर आवेदन कर सकते हैं.
ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?
बांस की खेती की सब्सिडी के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है. इसके लिए किसान horticulture.bihar.gov.in (Bihar Horticulture Department) वेबसाइट पर जाकर राष्ट्रीय बांस मिशन के लिंक से आवेदन कर सकते हैं. फॉर्म भरने के बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आवेदन की जांच जिले स्तर पर की जाएगी और पात्र पाए जाने पर सब्सिडी की रकम सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी.
किन जिलों में लागू है योजना?
फिलहाल यह योजना बिहार के 27 जिलों में लागू की गई है. इनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सीवान, सुपौल, वैशाली समेत कई जिले शामिल हैं.
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है बांस की खेती?
बांस की खेती 3 से 5 साल में तैयार हो जाती है और इसके बाद कई सालों तक लगातार उत्पादन देती है. बाजार में बांस की मांग तेजी से बढ़ रही है. फर्नीचर, कागज उद्योग, निर्माण कार्य, हस्तशिल्प और सजावटी सामानों में बांस का खूब इस्तेमाल होता है. ऐसे में बाजार की कमी की चिंता भी नहीं रहती.
सरकार की सब्सिडी और बढ़ती मांग को देखते हुए बांस की खेती आने वाले समय में बिहार के किसानों के लिए स्थायी और सुरक्षित आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है.