कपास मिलों के पलायन को रोकेगा नया सरकारी निर्णय, उपज बिक्री और किसानों को पेमेंट भी तेज होगी

Cotton mandi duty cut : वित्तीय बोझ और अधिक इनपुट लागत से परेशान कपास जिनिंग मिलों को राज्य सरकार के फैसले से बड़ी राहत मिली है. इसके साथ ही राज्य की 158 जिनिंग मिलों के संभावित पलायन को भी रोक दिया गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 10 Jun, 2026 | 04:13 PM

कपास किसानों को गुलाबी सुंडी की वजह से लगातार हो रहे नुकसान और बीमारियों से घट रहे उत्पादन ने किसान और बढ़ते वित्तीय बोझ ने मिलर्स की कमर तोड़ दी है. दोनों को राहत देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कपास मंडी शुल्क को घटाकर आधा करने का निर्णय लिया है. इस कदम से कपास जिनिंग मिलों का दूसरे राज्यों में संभावित पलायन रुकेगा और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जबकि इनपुट लागत में कमी आएगी. किसानों की उपज खरीद के साथ भुगतान प्रक्रिया भी तेज होगी. जबकि, व्यापार में भी तेजी आएगी.

13 हजार करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं. इस दौरान मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और किसान कल्याण से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 13 हजार 800 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी किए गए हैं. इसमें कपास मंडी शुल्क में कटौती के फैसले ने जिनिंग मिलों के वित्तीय बोझ को घटाने का काम करेगी. इसको लेकर मिलर्स में चर्चा है.

कपास मंडी शुल्क घटाकर आधा किया

निर्णयों की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने आधिकारिक बयान में कहा कि कृषि और व्यापार जगत को गति देने के लिए मंत्रिपरिषद ने कपास पर मंडी फीस की दर को 1 फीसदी से घटाकर 0.5 फीसदी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा. वहीं कपास व्यापार में तेजी आएगी.

जिनिंग मिलों की लागत घटेगी और पलायन रुकेगा

उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रॉसेसिंग क्षमता लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है. फीस अधिक होने से जिनिंग मिलों पर वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा था. इसके चलते मिलर्स पलायन कर रहे थे. अब प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों के द्वारा अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा और प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी. मिलें प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में सक्षम होगी.

कपास उपज खरीद और भुगतान में तेजी आएगी

कपास मंडी शुल्क में कटौती का फायदा किसानों और व्यापार में तेजी के रूप में भी देखा जाएगा. शुल्क कम होने से व्यापारी अधिक मात्रा में कपास की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर कपास व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. कहा गया है कि किसानों पर इस फैसला का सकारात्मक प्रभाव होगा और स्थानीय कपास की मांग बढ़ेगी. इससे किसानों को अपनी उपज खरीद में तेजी के साथ बेहतर और तुरंत मूल्य मिलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा.

उपज खरीद के लिए मार्कफेड को 8600 करोड़ मंजूर

किसान हित में सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपये से बढ़ाकर एक रुपये 50 पैसे किया गया है. शुल्क के रूप में प्राप्त होने वाली 500 करोड़ रुपये की अनुमानित अतिरिक्त आय का उपयोग सीधे किसान सड़क निधि और कृषि अनुसंधान के विकास में किया जाएगा. वहीं, आगामी रबी और खरीफ मार्केटिंग सीजन में फसलों की खरीद के लिए एमपीएससीएससी और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है.

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