क्या इस बार धान किसानों को होगा नुकसान, खेती में 10 हजार रुपये एकड़ बढ़ गई लागत!

आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में जून से सितंबर के बीच होने वाली डीजल बिक्री का करीब 50 फीसदी हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़ा होता है. यहां लगभग 5.5 लाख ट्रैक्टर, 1.5 लाख डीजल ट्यूबवेल, हजारों हार्वेस्टर और करीब 1.2 लाख फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें  डीजल से चलती हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 18 May, 2026 | 02:41 PM

Paddy Cultivation: पंजाब में धान की बुवाई का मौसम करीब 20 दिन दूर है, लेकिन इससे पहले ही किसानों को नई चिंता सताने लगी है. डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और यूरिया व DAP जैसे उर्वरकों की कमी से किसान परेशान हैं. किसानों का कहना है कि शुक्रवार को डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से धान की खेती की लागत प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तक बढ़ जाएगी. ऐसे में किसानों को पहले के मुकाबले कम फायदा होगा, क्योंकि सरकार महंगाई के मुकाबले MSP में बहुत कम बढ़ोतरी करती है.

मानसा के पास खियाली छलनवाली गांव के किसान बलकार सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ को कहा कि डीजल महंगा  होने से प्रति एकड़ खेती की लागत में लगभग 5,000 से 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. किसानों का कहना है कि वे डीजल का इस्तेमाल ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों और ट्यूबवेल चलाने के लिए करते हैं. ऐसे में डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है. उन्होंने यह भी बताया कि धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में सिर्फ 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़ती लागत के मुकाबले बहुत कम है.

डीजल से चलता है 5.5 लाख ट्रैक्टर

आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में जून से सितंबर के बीच होने वाली डीजल बिक्री का करीब 50 फीसदी हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़ा होता है. यहां लगभग 5.5 लाख ट्रैक्टर, 1.5 लाख डीजल ट्यूबवेल, हजारों हार्वेस्टर और करीब 1.2 लाख फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें  डीजल से चलती हैं. आप नेता और मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को किसानों के लिए ‘खतरनाक’ बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की नीतियां खेती-किसानी को नुकसान पहुंचा रही हैं. इस मुद्दे के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अमृतसर, लुधियाना और जालंधर में प्रदर्शन भी किया.

खाद की भारी किल्लत

इधर पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता मोंटी सेहगल ने कहा कि खेती के सीजन में कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को सीमित (राशनिंग) किया जा रहा है, ताकि आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके. पंजाब में धान की बुवाई  से पहले उर्वरकों की कमी की समस्या सामने आ रही है. जुलाई के अंत तक यूरिया की कुल जरूरत 16.5 लाख मीट्रिक टन है, जबकि फिलहाल करीब 9 लाख मीट्रिक टन ही उपलब्ध है. उम्मीद है कि जून के अंत तक यह बढ़कर 11 लाख मीट्रिक टन हो जाएगी, लेकिन फिर भी मांग से कम रहेगी. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 30 तक DAP की जरूरत लगभग 2 लाख मीट्रिक टन है, जबकि अभी सिर्फ 50,000 टन ही उपलब्ध है. किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और खाद की कमी इस साल धान की खेती पर नकारात्मक असर डाल सकती है.

पंजाब में धान बुवाई की तारीख

बता दें कि पंजाब में धान मुख्य खरीफ फसल है और इसकी खेती करीब 33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है. धान की खेती में बहुत ज्यादा पानी लगता है, जिससे राज्य में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.  इसे रोकने के लिए सरकार ने धान की बुवाई का समय 1 जून से 9 जून के बीच तय किया है. साथ ही, लंबी अवधि में तैयार होने वाली ‘पूसा 44’ किस्म की जगह कम समय में त्रिज्या वाली ‘पीआर’ फैलाने की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है.

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Published: 18 May, 2026 | 02:37 PM

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