डिजिटल क्रॉप सर्वे का दायरा बढ़ा, 45 करोड़ खेतों की होगी मैपिंग.. किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
केंद्र सरकार खरीफ सीजन में 5.53 लाख गांवों के 45 करोड़ खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे करेगी. अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं. सरकार का दावा है कि इससे फसल उत्पादन का सटीक आकलन, MSP पर खरीद में पारदर्शिता और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह देने में मदद मिलेगी.
Digital Crop Survey: केंद्र सरकार खरीफ सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का दायरा बढ़ाने जा रही है. इस बार देश के 5.53 लाख गांवों में 45 करोड़ खेतों का सर्वे किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे फसलों का रकबा और उत्पादन का आकलन अधिक सटीक होगा और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सकेगा. सरकार के मुताबिक, अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है. इससे फसलों का उत्पादन और रकबा लगभग रियल टाइम में पता चल सकेगा. आने वाले समय में किसानों को उनकी डिजिटल आईडी के आधार पर फसल चयन और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह भी दी जाएगी.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सर्वे के आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए भी फसलों के रकबे का मिलान कर रही है. सरकार का कहना है कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत मार्च 2027 तक 11.62 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया था. अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसान आईडी बन चुकी हैं, यानी करीब 87 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है.
49.69 लाख किसान आईडी बनाई गई
अधिकारियों के मुताबिक, यह लक्ष्य पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के आधार पर तय किया गया था, जबकि देश में किसानों की वास्तविक संख्या इससे अधिक है. इसलिए आगे और किसान आईडी बनाई जाएंगी. तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अपने तय लक्ष्य से ज्यादा किसान आईडी बना ली हैं. अकेले तेलंगाना में 39.77 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 49.69 लाख किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो लक्ष्य से करीब 25 फीसदी अधिक है.
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किसान आईडी बनाने का काम शुरू हो गया
पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समझौता (MoU) होने के बाद किसान आईडी बनाने का काम शुरू हो गया है. वहीं, झारखंड में यह प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. जम्मू-कश्मीर, गोवा और सिक्किम में जमीन के रिकॉर्ड व्यवस्थित किए जा रहे हैं, ताकि जल्द किसान आईडी बनाई जा सके. सरकार ऐसे किसानों को भी किसान आईडी से जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिनके नाम पर जमीन नहीं है. इसमें बटाईदार, किराए पर खेती करने वाले किसान और मंदिर की जमीन पर खेती करने वाले किसान शामिल हैं. इसके लिए कुछ राज्यों में एसओपी (मानक प्रक्रिया) तैयार की जा रही है.
आंकड़ों का इस्तेमाल गेहूं और धान खरीद के दौरान किया गया
अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और असम के कुछ हिस्सों में जमीन का रिकॉर्ड नहीं होने के कारण सैटेलाइट तकनीक के जरिए किसान आईडी बनाने की व्यवस्था विकसित की गई है. मेघालय के एक जिले में इसका पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहा है. इसके अलावा, कम कृषि भूमि वाले केंद्र शासित प्रदेशों में भी किसान आईडी बनाने का काम शुरू हो गया है. सरकार का कहना है कि किसान आईडी के जरिए जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल अब MSP पर फसल खरीद में भी किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में 27 लाख किसानों का डेटा सत्यापित होने के बाद धान खरीद में करीब 5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है. वहीं, पिछले रबी सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के आंकड़ों का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में गेहूं और ओडिशा में धान खरीद के दौरान किया गया.