ड्रैगन फ्रूट की खेती से होगी तगड़ी कमाई, जानिए आसान तरीका और बढ़िया मुनाफे का राज

ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफे का अच्छा विकल्प बन रही है. इसकी बढ़ती मांग और आसान देखभाल इसे लोकप्रिय बना रही है. कई कृषि संस्थान और सरकार भी किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे यह खेती आमदनी बढ़ाने और रोजगार का नया साधन बन रही है.

नोएडा | Updated On: 28 Apr, 2026 | 08:30 PM

Dragon Fruit Farming: आज के समय में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई और लाभकारी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं. ऐसी ही एक फसल है ड्रैगन फ्रूट, जिसे कमलम भी कहा जाता है. ये फल कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. एनएचआरडीएफ (NHRDF) के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार यह फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

ड्रैगन फ्रूट क्या है और क्यों बढ़ रही इसकी मांग

ड्रैगन फ्रूट  एक विदेशी फल है जिसे भारत में कमलम के नाम से जाना जाता है. इसका रंग आकर्षक होता है और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिससे यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसकी मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. यही कारण है कि किसान अब इसे एक फायदे वाली फसल के रूप में अपना रहे हैं. यह फल बाजार में अच्छे दाम पर बिकता है, जिससे किसानों को बेहतर कमाई मिलती है.

कम लागत में ज्यादा मुनाफे वाली फसल

ड्रैगन फ्रूट की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लागत कम आती है और मुनाफा ज्यादा होता है. एक एकड़ जमीन में इस फसल से लगभग 8 से 12 टन तक उत्पादन मिल सकता है. इससे किसान आसानी से लाखों रुपये की कमाई  कर सकते हैं. इसकी कीमत बाजार में 100 से 200 रुपये प्रति किलो तक रहती है, जिससे यह फसल और भी लाभकारी बन जाती है. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार सही देखभाल और तकनीक अपनाकर किसान इससे लगातार अच्छी आमदनी ले सकते हैं.

कम बीमारी और आसान देखभाल वाली फसल

इस फसल की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें कीट और बीमारियों  का खतरा बहुत कम होता है. इस कारण किसानों को ज्यादा दवाइयों और रसायनों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता, जिससे लागत और कम हो जाती है. एक पौधा कई बार फल देता है और हर पौधे से 50 से 120 फल तक प्राप्त हो सकते हैं. ये फल 300 से 800 ग्राम तक वजन के होते हैं, जिससे उत्पादन काफी अच्छा मिलता है.

सरकार और संस्थानों से मिल रहा सहयोग

भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती  को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारी संस्थान और कृषि विश्वविद्यालय काम कर रहे हैं. कई राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में किसानों को प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है. सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे संस्थान भी किसानों को नई तकनीक सिखा रहे हैं. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, अगर किसान सही जानकारी और प्रशिक्षण लेकर इस फसल को अपनाते हैं, तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है.

Published: 28 Apr, 2026 | 11:30 PM

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