धान पर अल नीनो का संकट, किसान करें इन 5 फसलों की खेती.. कम पानी में होगी ज्यादा पैदावार

Paddy Alternatives: कमजोर मॉनसून और अल नीनो के खतरे के बीच धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलें किसानों के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं. ऐसे में रागी, बाजरा, ज्वार, कोदो और कुटकी जैसी फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार और ज्यादा MSP देकर किसानों की कमाई बढ़ा सकती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 20 Jun, 2026 | 11:00 PM

EL Nino Impact: देश के कई हिस्सों में किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जून का आधे से ज्यादा महीना बीत चुका है, लेकिन मॉनसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रही. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि खरीफ सीजन की अधिकांश फसलें बारिश पर निर्भर करती हैं. इस बीच मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो के असर की आशंका भी जताई है, जिससे कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

ऐसे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार, किसानों को फसल चयन में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां अधिक पानी वाली फसलों की बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती फायदेमंद साबित हो सकती है.

धान की खेती पर बढ़ सकता है दबाव

देश के कई राज्यों में धान खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है. धान की अच्छी पैदावार के लिए लगातार और पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. अगर मानसून कमजोर रहता है या बारिश का वितरण असमान होता है, तो धान की फसल प्रभावित हो सकती है. पानी की कमी के कारण पौधों में रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी रहता है. इससे उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों का चयन करना है.

मोटे अनाज बन सकते हैं बेहतर विकल्प

कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि, अल नीनो की स्थिति में मोटे अनाज यानी मिलेट्स किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकते हैं. रागी, बाजरा, ज्वार, कोदो और कुटकी जैसी फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं. इन फसलों की खासियत यह है कि ये सूखा सहन करने में सक्षम होती हैं और खराब मौसम की स्थिति में भी कम नुकसान झेलती हैं. यही वजह है कि, सरकार भी पिछले कुछ सालों से मोटे अनाजों को बढ़ावा दे रही है.

MSP भी बढ़ा रहा किसानों का आकर्षण

कम पानी की जरूरत के अलावा मोटे अनाज किसानों को बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ भी देते हैं. यही कारण है कि, अब कई किसान पारंपरिक फसलों से हटकर इनकी खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

फसल MSP (रुपये प्रति क्विंटल)
रागी 5,205
ज्वार 4,023
कुटकी 3,500
बाजरा 2,900
कोदो 2,500
धान 2,441

इसके अलावा कोदो और कुटकी जैसी फसलों पर कई राज्यों में अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और बोनस भी दिया जाता है, जिससे किसानों की कमाई और बढ़ जाती है.

सरकार भी कर रही है प्रोत्साहित

मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेट्स की मांग बढ़ रही है क्योंकि इन्हें पोषण से भरपूर और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. एक्सपर्च का मानना है कि, आने वाले सालों में इन फसलों की मांग और बढ़ सकती है. ऐसे में किसानों के लिए यह केवल मौसम से बचाव का उपाय नहीं, बल्कि आय बढ़ाने का एक बड़ा अवसर भी बन सकता है.

बदलते मौसम में बदलनी होगी खेती की रणनीति

जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता के दौर में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई रणनीतियां अपनाने की जरूरत है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो कम पानी वाली फसलें जोखिम कम करने के साथ बेहतर मुनाफा भी दे सकती हैं. अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं. सही योजना और उचित फसल चयन से किसान कमजोर मानसून के दौर में भी अच्छी आय हासिल कर सकते हैं.

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Published: 20 Jun, 2026 | 11:00 PM

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