Onion Farming Tips : ठंड और ओस में कमजोर पड़ती प्याज की फसल, ऐसे करें समय पर बचाव

सर्दी के मौसम में प्याज की फसल पर कीट और रोगों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है. ठंड, ओस और नमी के कारण कई रोग फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. समय पर निगरानी और सही उपाय नहीं करने पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Jan, 2026 | 10:24 PM

Onion Farming Tips : सर्दियों का मौसम जहां प्याज की फसल के लिए सही नही माना जाता है, वहीं इसी दौरान कुछ रोग किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. कड़ाके की ठंड, सुबह की ओस और बदलता मौसम प्याज की फसल को कमजोर बना देता है. ऐसे में अगर किसान थोड़ी भी लापरवाही करें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर सीधा असर पड़ता है. खासकर इस समय थ्रिप्स कीट और परपल ब्लॉच रोग प्याज की फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं.

सर्दी में क्यों बढ़ जाता है थ्रिप्स का खतरा

सर्दियों में जब तापमान  कम होता है और नमी बनी रहती है, तब थ्रिप्स कीट तेजी से पनपते हैं. ये छोटे कीट प्याज की पत्तियों  का रस चूस लेते हैं, जिससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं और पीली पड़ जाती हैं. धीरे-धीरे पौधा कमजोर हो जाता है और कंद का विकास रुक जाता है. अगर समय रहते इनकी पहचान और रोकथाम नहीं की गई, तो पूरी फसल को भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए किसानों को खेत का नियमित निरीक्षण करते रहना बेहद जरूरी है.

परपल ब्लॉच रोग से बिगड़ती है फसल की सेहत

सर्दी के मौसम में प्याज की फसल  पर परपल ब्लॉच नामक रोग का प्रकोप भी ज्यादा देखा जाता है. यह एक फफूंद जनित रोग है, जिसमें पत्तियों पर बैंगनी या भूरे रंग के गोल-गोल धब्बे दिखाई देने लगते हैं. ये धब्बे धीरे-धीरे फैलते हैं और पूरी पत्ती सूख जाती है. अधिक नमी, लगातार ओस, घना रोपण और असंतुलित खाद इस रोग को बढ़ावा देती है. इसका सीधा असर प्याज के आकार और उपज पर पड़ता है.

रासायनिक उपाय अपनाते समय रखें सावधानी

रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही किसान फफूंदनाशकों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए डाइथेन एम-45, मैन्कोजेब या कॉपर आधारित दवाओं का छिड़काव 7 से 10 दिन के अंतराल पर किया जा सकता है. दवा के घोल में चिपकने वाला पदार्थ मिलाने से असर बेहतर होता है. हालांकि ध्यान रखें कि एक ही दवा का बार-बार उपयोग न करें और जरूरत से ज्यादा मात्रा में छिड़काव से बचें, वरना फसल को नुकसान हो सकता है.

प्राकृतिक तरीकों से भी मिलेगी राहत

जो किसान रसायनों का कम उपयोग  करना चाहते हैं, उनके लिए प्राकृतिक उपाय भी काफी कारगर हैं. खेत में नीम की खली डालने से मिट्टी में मौजूद रोगकारक फफूंद की सक्रियता कम होती है. नीम तेल को पानी में मिलाकर छिड़काव करने से भी थ्रिप्स और फफूंद रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. इसके अलावा गोमूत्र या छाछ का 10 प्रतिशत घोल पत्तियों पर छिड़कने से फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता  बढ़ती है. समय पर निगरानी, संतुलित खाद और सही उपाय अपनाकर किसान सर्दी के मौसम में प्याज की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और भारी नुकसान से बच सकते हैं.

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Published: 8 Jan, 2026 | 10:24 PM

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