अल नीनो और कमजोर मॉनसून की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने जल संरक्षण, पशुधन सुरक्षा और किसानों की वित्तीय सुरक्षा को अपनी रणनीति का प्रमुख आधार बनाया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार केवल फसलों की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र की सुरक्षा के लिए काम कर रही है.
बैठक में जल संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी गई. केंद्र ने राज्यों को तालाबों, खेत–तालाबों, जलाशयों, चेक डैम, स्टॉप डैम और नालों की सफाई तथा मरम्मत के निर्देश दिए हैं. मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों को तेज किया जाएगा ताकि जल भंडारण क्षमता बढ़ सके.
पेयजल आपूर्ति पर विशेष ध्यान
संवेदनशील जिलों में पेयजल उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है. जहां जल उपलब्धता बेहतर है वहां से जरूरत वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी. बैठक में विभिन्न नदी बेसिनों और जलाशयों की स्टोरेज स्थिति की समीक्षा भी की गई.
चारा संकट से निपटने की तैयारी
सरकार ने माना कि यदि मॉनसून बहुत कमजोर रहा तो पशुधन के लिए चारे का संकट पैदा हो सकता है. इसे देखते हुए पर्याप्त उपलब्धता वाले क्षेत्रों से कमी वाले इलाकों तक चारा पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. चारा भंडारण, वैकल्पिक चारा स्रोतों और सप्लाई चेन को पहले से तैयार किया जा रहा है. साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी निगरानी रखी जाएगी.
PMFBY, KCC और PM-Kisan बनेंगे सहारा
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की वित्तीय सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
सरकार प्रभावित क्षेत्रों में PMFBY का कवरेज बढ़ाने, नए KCC जारी करने और किसानों को उपलब्ध वित्तीय सहायता का लाभ दिलाने पर जोर दे रही है.
किसानों से कहा– घबराएं नहीं
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे घबराने के बजाय वैज्ञानिक सलाह का पालन करें. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं ताकि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किसी बड़े संकट से बचाया जा सके.
खाद्य सुरक्षा पर नहीं तत्काल खतरा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में चावल और गेहूं का बफर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. सरकार ने 2026 खरीफ सीजन के लिए लगभग 176 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है और वर्तमान परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा को लेकर कोई तत्काल खतरा नहीं है.