गेहूं-सोयाबीन छोड़ किसानों ने अपनाई फूलों की खेती, कम लागत में हर सीजन मिल रहा जबरदस्त मुनाफा
किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती भी अपना रहे हैं. गुलाब और गेंदा जैसे फूल कम लागत में तैयार होकर बाजार में अच्छी कीमत दिला रहे हैं. शादी-समारोह और सजावट में इनकी मांग ज्यादा होने से किसानों को नियमित आय का नया मौका मिल रहा है.
Flower Farming: खेती में अच्छी कमाई की तलाश में अब कई किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नई राह अपना रहे हैं. खेतों में अब सिर्फ गेहूं, धान या सोयाबीन ही नहीं, बल्कि रंग-बिरंगे फूल भी लहलहाने लगे हैं. कम समय में तैयार होने वाली फूलों की खेती किसानों को अच्छी कमाई का मौका दे रही है. उद्यान विभाग छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया के अनुसार अगर सही तरीके से गुलाब और गेंदा जैसे फूलों की खेती की जाए तो कुछ ही महीनों में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
फूलों की खेती से बढ़ रही किसानों की आय
कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया, उद्यान विभाग छत्तीसगढ़ के अनुसार अब किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती भी अपनाने लगे हैं. कई किसानों ने अपनी जमीन के छोटे हिस्से में गुलाब और गेंदा की खेती शुरू की और धीरे-धीरे यह खेती उनकी आय का अच्छा जरिया बन गई. फूलों की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. इसी वजह से किसान अब इसे नकदी फसल के रूप में भी देखने लगे हैं. कम लागत में होने वाली यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
गुलाब और गेंदा की बाजार में जबरदस्त मांग
उद्यान विभाग के अनुसार गुलाब और गेंदा जैसे फूलों की मांग सालभर बनी रहती है. इन फूलों का उपयोग शादी-समारोह, धार्मिक कार्यक्रम, सजावट और उपहार के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है. इसी वजह से स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी इन फूलों की अच्छी मांग रहती है. जब किसानों के फूल ताजे और अच्छी गुणवत्ता के होते हैं तो उन्हें बाजार में अच्छा दाम मिलता है. गुलाब के फूल का थोक भाव करीब 30 से 35 पैसे प्रति फूल तक मिल जाता है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होने लगती है.
कम लागत में फूलों की खेती दे रही बेहतर मुनाफा.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
फूलों की खेती में लागत ज्यादा नहीं आती और मुनाफा अच्छा मिल सकता है. खासकर गेंदा की फसल कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी मांग लगभग पूरे साल बनी रहती है. विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर खेत में फूलों की खेती करने पर किसान लगभग 100 से 150 क्विंटल तक फूल प्राप्त कर सकते हैं. अगर किसान सही समय पर बाजार में फूल बेचते हैं तो उन्हें बेहतर कीमत मिलती है और अच्छी कमाई हो सकती है. कई किसानों ने इस खेती से अब तक लाखों रुपये तक की कमाई भी की है. यही वजह है कि धीरे-धीरे फूलों की खेती किसानों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है.
किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती भी अपनाने लगे हैं.
सही मिट्टी और देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन
कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया के अनुसार फूलों की अच्छी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत की अच्छी तैयारी और जैविक खाद का उपयोग करने से उत्पादन बेहतर होता है. खेत में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिलाने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है. इसके साथ ही समय-समय पर सिंचाई, खाद और उर्वरक देने से फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फूलों की तुड़ाई सुबह के समय करनी चाहिए. इससे फूल ज्यादा ताजे रहते हैं और बाजार में उनकी कीमत भी अच्छी मिलती है.
फूलों की खेती किसानों के लिए नकदी फसल का रूप लेती जा रही है.
नकदी फसल बनती जा रही फूलों की खेती
उद्यान विभाग के अनुसार, फूलों की खेती अब किसानों के लिए नकदी फसल का रूप लेती जा रही है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को नियमित आय देने में मदद कर रही है. आज कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती को भी अपना रहे हैं. इससे किसानों को आय के नए रास्ते मिल रहे हैं और खेती का जोखिम भी कम हो रहा है.
एफ.आर. कोसरिया के अनुसार अगर किसान सही तकनीक, अच्छी किस्मों और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फूलों की खेती करें तो यह खेती उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती है. कम लागत और अच्छी कमाई की वजह से आने वाले समय में फूलों की खेती किसानों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है.