Watermelon farming: तरबूज किसानों के लिए भी अच्छी कमाई का जरिया होता है. देश के कई राज्यों में किसान इसकी खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल अगर सही देखभाल के साथ उगाई जाए तो अच्छा मुनाफा दे सकती है.
लेकिन तरबूज की खेती जितनी फायदेमंद है, उतनी ही चुनौतियों से भरी भी है. खासकर कीटों का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चिंता बन जाता है. यदि समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो पूरी फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं. कई बार तो फल छोटे रह जाते हैं, पत्तियां सूख जाती हैं और पौधा कमजोर पड़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि किसान कीटों की पहचान समय पर करें और सही तरीके से उनका नियंत्रण करें.
रस चूसने वाले कीट बनते हैं पहली परेशानी
तरबूज के खेत में अक्सर सबसे पहले रस चूसने वाले कीट दिखाई देते हैं. इनमें एफिड्स यानी माहू प्रमुख हैं. ये बहुत छोटे आकार के कीट होते हैं, जो पत्तियों और कोमल तनों से रस चूसते रहते हैं. इनके कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधा धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि ये कीट कई तरह के वायरस भी फैलाते हैं, जिससे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.
ऐसी स्थिति में किसान नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं. यह एक सुरक्षित और असरदार उपाय है. खेत में लेडीबर्ड जैसे मित्र कीटों को बढ़ावा देना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि ये एफिड्स को खा जाते हैं और उनका प्रकोप कम करते हैं.
स्पाइडर माइट्स से पत्तियों का नुकसान
गर्मी और सूखे मौसम में स्पाइडर माइट्स तेजी से बढ़ते हैं. ये पत्तियों की निचली सतह पर रहते हैं और महीन जाले बना देते हैं. शुरुआत में पत्तियों पर हल्के पीले धब्बे दिखाई देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे पूरी पत्ती सूख सकती है. इससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है और फल का विकास रुक जाता है.
इनसे बचाव के लिए खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है. समय-समय पर सिंचाई करने से इनका प्रकोप कम होता है. अगर संक्रमण ज्यादा हो जाए तो विशेषज्ञ की सलाह से माइट नियंत्रक दवाओं का सीमित उपयोग किया जा सकता है.
खीरा बीटल से फसल को दोहरा खतरा
खीरा बीटल तरबूज की फसल के लिए खतरनाक माने जाते हैं. ये पत्तियों, फूलों और छोटे फलों को नुकसान पहुंचाते हैं. साथ ही बैक्टीरियल विल्ट जैसी बीमारी भी फैलाते हैं, जिससे पूरा पौधा अचानक मुरझा सकता है.
इससे बचने के लिए किसान शुरुआती अवस्था में पौधों को जालीदार कवर से ढक सकते हैं. इससे कीट सीधे पौधों तक नहीं पहुंच पाते. खेत की नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर जैविक कीटनाशकों का उपयोग भी मददगार साबित होता है.
थ्रिप्स से फूल और फल दोनों प्रभावित
थ्रिप्स बहुत छोटे लेकिन तेज गति से फैलने वाले कीट होते हैं. इनके कारण पत्तियां चांदी जैसी चमकदार दिखने लगती हैं और फूलों की गुणवत्ता खराब हो जाती है. फल पर दाग-धब्बे पड़ सकते हैं, जिससे बाजार में उसकी कीमत कम हो जाती है.
इनसे बचने के लिए नीले या पीले चिपचिपे ट्रैप लगाए जा सकते हैं. यह एक आसान और कम खर्चीला उपाय है. जरूरत पड़ने पर जैविक स्प्रे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन हमेशा संतुलित मात्रा में ही छिड़काव करना चाहिए.
व्हाइटफ्लाई से पौधों की बढ़वार रुकती है
व्हाइटफ्लाई यानी सफेद मक्खी भी तरबूज की फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है. ये पत्तियों से रस चूसती हैं, जिससे पत्तियां मुरझाने लगती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. इनके कारण फफूंद रोग भी पनप सकते हैं.
इनसे बचाव के लिए खेत में साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है. परावर्तक मल्च का उपयोग करने से भी इनका प्रकोप कम किया जा सकता है. जैविक उपाय अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है.
समय पर पहचान ही है सबसे बड़ा उपाय
तरबूज की खेती में सफलता का राज है नियमित निगरानी और संतुलित प्रबंधन. किसान अगर हर सप्ताह खेत का निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षणों को पहचान लें, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय जैविक और प्राकृतिक उपायों को प्राथमिकता देना अधिक लाभदायक होता है.