खाद्यान्न उत्पादन 3570 लाख टन के साथ नये रिकॉर्ड पर पहुंचा, गेहूं-सरसों, सोयाबीन-मूंगफली पैदावार में उछाल

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आज भारत का खाद्यान्न उत्पादन हरित क्रांति के शुरुआती दौर की तुलना में कई गुना अधिक हो चुका है और अब वृद्धि की रफ्तार भी पहले से तेज है. उन्होंने कहा कि 2014–15 के मुकाबले खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40–42 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है.

नोएडा | Updated On: 10 Mar, 2026 | 06:10 PM

कृषि क्षेत्र में तेजी से किए जा रहे काम और उत्पादन बढ़ाने के लिए नई किस्मों के इस्तेमाल के चलते खाद्यान्न उत्पादन नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 3570 लाख टन के पार पहुंच गया है, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा गेहूं, सरसों, सोयाबीन और मूंगफल की पैदावार में भारी उछाल दर्ज किया गया है. जबकि, दालों के उत्पादन में 6 लाख टन की बढ़ोत्तर दर्ज की गई है. इसी तरह बागवानी उत्पादों की पैदावार भी नए स्तर पर पहुंची है.

इतना उत्पादन की रखने की चिंता बढ़ी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 3570 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों मजबूत हुई हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने करीब 1500 लाख टन से अधिक चावल उत्पादन के साथ चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है. जबकि, गेहूं, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली जैसी फसलों में भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज हुआ है. उन्होंने कहा कि पहले भारत को पीएल-480 के तहत आयातित गेहूं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज हालात यह हैं कि देश के गोदाम गेहूं और चावल से भरे पड़े हैं और सरकार को चिंता इस बात की है कि “रखे कहां”, जबकि दुनिया भारत के किसानों और नीतियों की सराहना कर रही है.

दालों और फल-सब्जियों के उत्पादन में बढ़त

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फलों और सब्जियों के साथ-साथ दालों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी करवाई है, जिससे कुल उर्वरक उपयोग और लागत में कमी के साथ पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ी है. उन्होंने बताया कि दालों का उत्पादन लगभग 190 लाख टन से बढ़कर 250–260 लाख टन के आसपास पहुंच गया है और बागवानी उत्पादन भी 3690 लाख टन से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बना है.

एक दशक में 42 फीसदी उत्पादन बढ़ा

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आज भारत का खाद्यान्न उत्पादन हरित क्रांति के शुरुआती दौर की तुलना में कई गुना अधिक हो चुका है और अब वृद्धि की रफ्तार भी पहले से तेज है. उन्होंने कहा कि 2014–15 के मुकाबले खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40–42 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत केवल अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि विश्व बंधु की भावना के साथ दुनिया की जरूरतों को भी पूरा करने वाला “फूड बास्केट ऑफ द वर्ल्ड” बने. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में रिकॉर्ड उत्पादन, मजबूत भंडारण क्षमता और निर्यात की संभावनाओं ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया है और आने वाले समय में यह भूमिका और मजबूत होगी.

प्राकृतिक खेती से उत्पादन घटता नहीं, बढ़ता है

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिशन के तहत गंगा जैसी नदियों के किनारे के विस्तृत क्षेत्रों में रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देने, लाखों किसानों को जागरूक करने और प्रति एकड़ प्रोत्साहन की व्यवस्था करने की जानकारी देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर प्राकृतिक खेती सही तरीके से की जाए तो उत्पादन घटता नहीं, कई मामलों में बढ़ता है. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध और असंतुलित उपयोग से पैदा हो रही गंभीर समस्याओं पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, जबकि इससे एक ओर मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता लगातार खराब हुई, दूसरी ओर इंसानों में कई तरह की बीमारियां बढ़ीं.

उन्होंने बताया कि गंगा जैसी नदियों के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर तक के क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देशभर में 1 करोड़ से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए संवेदनशील और प्रशिक्षित किया गया है और लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक मुक्त खेती शुरू हो चुकी है.

Published: 10 Mar, 2026 | 04:09 PM

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