धान किसानों के लिए बड़ी खबर! नई जीन एडिटिंग किस्में देंगी ज्यादा पैदावार, कम पानी में भी होंगी तैयार
बदलती जलवायु के बीच खेती को बड़ी तकनीकी ताकत मिलने वाली है. भारत में जीन एडिटिंग से तैयार धान की दो नई किस्में जल्द किसानों तक पहुंच सकती हैं. दावा है कि ये कम पानी में बेहतर प्रदर्शन करेंगी, खारेपन को सहेंगी और पैदावार बढ़ाने में मदद करेंगी.
बदलती जलवायु, पानी की कमी और घटती उत्पादकता के बीच खेती को नई तकनीक की जरूरत है. इसी दिशा में जीनोम एडिटिंग कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है. वैश्विक बायोटेक कंपनी बायर इस तकनीक के जरिए ऐसी फसल किस्में विकसित करने पर जोर दे रही है, जो बदलते मौसम का सामना कर सकें. भारत में भी जीनोम एडिटिंग से तैयार धान की दो किस्में किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है.
जीनोम एडिटिंग से कम समय में तैयार होंगी नई किस्में
बायर के क्रॉप साइंस डिवीजन के नियामक विज्ञान प्रमुख एक्सल ट्रॉटविन के अनुसार, पारंपरिक जीएम तकनीक की तुलना में जीनोम एडिटिंग के जरिए नई किस्में कम समय में विकसित की जा सकती हैं. जीएम फसलों में बाहरी डीएनए जोड़ने की जरूरत पड़ती है, जबकि जीनोम एडिटिंग में पौधे के अपने जीन में ही लक्षित बदलाव किया जाता है. इसका इस्तेमाल बेहतर पैदावार और जलवायु सहनशील फसलें तैयार करने में किया जा रहा है.
धान, मक्का और सोयाबीन पर बायर का बड़ा फोकस
बायर क्रॉप साइंस की प्लांट बायोटेक्नोलॉजी प्रमुख अमांडा मैक्लेरेन के मुताबिक, जीनोम एडिटिंग का इस्तेमाल मक्का, कपास और चावल जैसी फसलों में बड़े बदलाव के लिए किया जा सकता है. कंपनी 2031-32 तक मक्का और सोयाबीन की पहली जीनोम-एडिटेड किस्मों को व्यावसायिक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. इसके साथ कपास, कैनोला, हाइब्रिड गेहूं, चावल और सब्जियों पर भी शोध जारी है.
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भारत में धान की दो किस्में जल्द किसानों तक
भारत में भी इस तकनीक को लेकर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. मार्च 2022 में पर्यावरण मंत्रालय ने जीनोम-एडिटेड फसलों की कुछ श्रेणियों को कड़े जैव-सुरक्षा नियमों से छूट दी थी. राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के पूर्व निदेशक के.सी. बंसल के अनुसार, जीनोम एडिटिंग से तैयार डीआरआर राइस 100 (कमला) और पूसा डीएसटी राइस 1 इस साल के अंत तक किसानों तक पहुंच सकती हैं. इन किस्मों की खासियत पानी की बचत, खारेपन को सहन करने की क्षमता और संभावित रूप से 15 से 20 प्रतिशत अधिक पैदावार बताई गई है. इससे पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
40 फसलों पर चल रहा शोध, बदल रहे नियम
भारत में जीनोम एडिटिंग का दायरा सिर्फ धान तक सीमित नहीं है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संस्थानों में करीब 40 कृषि एवं बागवानी फसलों पर शोध किया जा रहा है. वहीं, दुनिया के 30 से अधिक देशों ने जीनोम-एडिटेड फसलों की कुछ श्रेणियों को गैर-जीएम के रूप में मान्यता दी है. अमेरिका, कनाडा, जापान, ब्राजील, अर्जेंटीना और यूरोपीय संघ समेत कई देशों में भी इस तकनीक के लिए नियम और नीतियां विकसित की जा रही हैं. ऐसे में आने वाले वर्षों में जीनोम एडिटिंग खेती को जलवायु बदलाव के अनुरूप ढालने की अहम तकनीक बन सकती है.