BT Cotton MRP 2026: केंद्र सरकार का कृषि मंत्रालय जल्द ही आगामी खरीफ सीजन के लिए बॉलगार्ड I और II बीटी कपास बीज की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) जारी करेगा, क्योंकि बुवाई जल्द शुरू हो रही है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस साल MRP बढ़ने की संभावना कम है, लेकिन अंतिम फैसला शीर्ष स्तर पर लिया जाएगा. पिछले साल बॉलगार्ड II का MRP 900 रुपये प्रति पैकेट (450 ग्राम) तय किया गया था, जो 2024-25 में 864 रुपये पैकेट था. बॉलगार्ड I का MRP 2016 में कीमत नियंत्रण लागू होने के बाद से 635 रुपये पैकेट ही बना हुआ है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में भी बॉलगार्ड II का MRP 710 रुपये पैकेट पर ही रखा गया था. पिछले साल MRP में 4 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 2024-25 में सिर्फ 1 फीसदी बढ़ा था. इसलिए इस साल कीमत न बढ़ने से उद्योग पर ज्यादा असर नहीं पड़ने की संभावना है. सरकार इस समय बीटी कपास के MRP को लेकर हितधारकों की बैठक कर रही है. कॉटन सीड्स प्राइस (कंट्रोल) ऑर्डर, 2015 के तहत हर साल MRP की घोषणा करना कानूनी जिम्मेदारी है, चाहे कीमत बढ़े या न बढ़े.
किसान संघ ने बीटी कपास का MRP तय करने का विरोध किया
हाल ही में आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ ने बीटी कपास का MRP तय करने का विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे गैर-जीएम कपास के पैकेट की कीमत 300-400 रुपये रह जाती है और बीटी कपास की कीट प्रतिरोधक क्षमता (PBW) विवादित है, इसलिए इसकी कीमत घोषित करने की जरूरत नहीं है. अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बीटी कपास का MRP सबसे पहले 2016 में तय किया गया था. इसकी जरूरत इसलिए महसूस हुई, क्योंकि पहले किसानों को बीटी कपास के बीज बहुत महंगे दामों पर बेचे जाते थे. सूत्रों ने कहा कि अगर कीमत तय नहीं की गई, तो किसानों से फिर ज्यादा दाम वसूले जा सकते हैं. ध्यान रहे, यह अधिकतम सीमा है, न्यूनतम कीमत नहीं.
95 फीसदी जमीन पर बीटी कपास उगाई जाती है
कपास की खेती वाले क्षेत्रों में लगभग 95 फीसदी जमीन पर अब बीटी कपास उगाई जाती है. हालांकि, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि पिंक बॉलवर्म (PBW) ने बीटी प्रोटीन के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लिया है और यह अब सभी कपास उगाने वाले इलाकों में बड़ा कीट बनता जा रहा है. वहीं, मंत्री ने माना कि बीटी कपास अभी भी एक मुख्य कीट अमेरिकन बॉलवर्म (Helicoverpa armigera) को नियंत्रित करने में कारगर है.
कपास के खेतों में कीटों के बढ़े हमले
उन्होंने कहा कि कपास के खेतों में चूसने वाले कीट (sucking pests) सालों में तेजी से बढ़े हैं. इसके चलते किसान अब कीटनाशकों पर पहले की तुलना में ज्यादा खर्च कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीटी कपास अपनाने से पैदावार के रुझानों का सही अंदाजा नहीं लगता. बीटी कपास शुरुआत में कीटनाशक उपयोग को कम करने में जरूर मदद करती थी, लेकिन अब यह पैदावार का मजबूत संकेतक नहीं है.