Rice Nursery Preparation: चावल की खेती देश के करोड़ों किसानों की आय का बड़ा जरिया है. खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान धान की नर्सरी तैयार करने में जुट जाते हैं, क्योंकि अच्छी फसल की नींव मजबूत और स्वस्थ पौध पर ही टिकी होती है. अगर शुरुआत में बीज और नर्सरी का सही प्रबंधन किया जाए, तो बाद में रोगों का खतरा कम हो जाता है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.
कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की खेती में कई किसान छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिसका असर पूरी फसल पर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि बीज चयन, बीज उपचार, खेत की तैयारी और बुवाई की सही तकनीक को समझकर काम किया जाए.
नर्सरी तैयार करने से पहले खेत की सही तैयारी जरूरी
धान की नर्सरी तैयार करने के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करना बेहद जरूरी है. खेत की कम से कम तीन बार जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी और समतल हो जाए. इसके लिए किसान कल्टीवेटर, हैरो और रोटावेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. खेत में बड़े मिट्टी के ढेले नहीं रहने चाहिए, क्योंकि इससे बीज का जमाव प्रभावित होता है. समतल और मुलायम मिट्टी में बीज तेजी से अंकुरित होते हैं और पौध स्वस्थ बनती है.
बीज चयन में गलती पड़ सकती है भारी
धान की अच्छी फसल के लिए अच्छी क्वालिटी वाले बीज का चयन बेहद जरूरी माना जाता है. कई बार किसान बिना जांच के बीज बो देते हैं, जिससे कमजोर पौध तैयार होती है और रोगों का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक एक एकड़ खेत की रोपाई के लिए करीब 8 किलो बीज पर्याप्त होता है. बीज की क्वालिटी जांचने के लिए नमक के पानी का इस्तेमाल करना चाहिए.
ऐसे करें बीज की जांच
- 100 लीटर पानी में 2 किलो नमक मिलाकर घोल तैयार करें
- बीज को इस घोल में डालें
- जो बीज ऊपर तैरने लगें उन्हें अलग कर दें
- नीचे बैठे बीज ही बुवाई के लिए उपयोग करें
बीज उपचार क्यों है जरूरी?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की खेती में बीज उपचार बहुत जरूरी है, क्योंकि यह पौधों को मजबूत बनाता है और बीज व मिट्टी से होने वाले रोगों से बचाता है. इसके लिए बीजों को पहले साफ पानी से दो बार धोकर 24 घंटे तक भिगोना चाहिए. फिर इन्हें छाया में हल्का सुखाकर कार्बेन्डाजिम या मैनकोजेब जैसे फफूंदनाशक से उपचारित किया जाता है. इससे बीजों में रोग लगने का खतरा कम हो जाता है और अंकुरण बेहतर होता है, जिससे फसल अच्छी मिलती है.
सही समय और तरीके से करें बुवाई
उपचारित बीजों को 24 घंटे भिगोने के बाद गीली बोरी या जमीन पर फैला दें ताकि वे अंकुरित होने लगें. जब बीजों में हल्का सा अंकुर निकल आए, तब उन्हें नर्सरी की क्यारियों में बो दिया जाता है. कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बुवाई शाम के समय करें, क्योंकि तब मौसम ठंडा रहता है और बीज अच्छे से जमते हैं. ध्यान रखें कि क्यारियों में पानी ज्यादा न हो, बस हल्की नमी बनी रहे ताकि बीज आसानी से बढ़ सकें.
नर्सरी की देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन
धान की पौध लगभग 21 से 25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाती है. इस दौरान नर्सरी की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है.
इन बातों का रखें ध्यान
- खेत में नमी बनी रहनी चाहिए
- समय-समय पर खरपतवार हटाते रहें
- कीट या रोग दिखने पर तुरंत उपचार करें
- रोपाई से पहले पौध की जड़ों का उपचार जरूर करें